India's manufacturing sector fall down 0.2%.
एक समय था जब भारतीय
रोजगारों का दुनियां में डंका बजता था। यह उस समय कि बात है, जिस समय भारत के लोग
अपना धन्धा अपने हांथों से ज्यादा किया करते थे, मशीन का अभाव था और बाजार की
पहुंच भी कम हीं था। आज के समय इतना संचार व तेज गति का यातायात के साधन भी मौजूद
नहीं थे। फ़िर भी भारतीय मुद्रा (रुपया) विश्व के दूसरे देशों के मुद्राओं से मजबूत
हीं था तथा रोजगार भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था। पढ़े-लिखे लोग कम थे लेकिन जो
भी थे उनके पास रोजगार का अभाव कम हीं था और विनिर्माण (manufacturing) का कार्य
भी जोरों पर था। इसलिए तो भारतीय कपड़े दुनिया में प्रसिद्ध था। भारत सिले - सिलाये
कपड़े का प्रमुख निर्यातक बन चुका था। ढाका के मलमल का पूरी दुनियां दिवानी थी। आज
के भारत में मशीन (Machine) , वैश्विकरण (Globalization), संचार (Communication)
तथा यातायात का प्रयाप्त मात्र में विकास होने के बावजूद भी भारत के वर्तमान
विनिर्माण (manufacturing) क्षेत्र ढलान की ओर लुढ़कता दिखाई दे रहा है।
भारत सरकार ने
भारतीय अर्थव्यवस्था का चालू वित वर्ष की तीसरी तिमाही का रिपोर्ट जारी कर चुका है
जिसमें सरकार के संस्था का बताना है कि इस बार आर्थिक वृद्धि दर बहुत हीं धीमी
रही। इतनी धीमी गति से चली है कि यह पिछले सात साल के किसी एक तिमाही का न्यूनतम
स्तर को पार कर गई देश का चालू वित (वर्ष
2019–20) वर्ष के तीसरी तिमाही (अक्टूबर – दिसम्बर) का आर्थिक वृद्धि 4.7 फीसद
रहा। यह भारतीय अर्थव्यस्था के पिछले सात साल के चालू वित वर्ष का किसी तिमाही का
न्यूनतम दर प्राप्त हुआ है जो किसी देश का अर्थव्यस्था के बहुत हीं चिंताजनक
रिपोर्ट है जबकि चालू वित वर्ष के इस तिमाही खरीफ फसलों की कटाई होती है और इस समय
देश में त्योहारों का भी बोलबाला होता है अर्थव्यवस्था का कहना है कि इस समय देश
की आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट के बजाय बढ़ोत्तरी होनी चाहिए थी जो नहीं हुआ इसलिए
यह चिन्ता का विषय हो सकता है। भारत सरकार अगले चालू वित वर्ष का आर्थिक वृद्धि दर
का अनुमान में भी गिरावट देखा जा रहा है
सरकार ने अगले चालू वित वर्ष के लिए पांच (5%) फीसद आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान
किया है जिसे ग्यारह (11 Years) का न्यूनतम स्तर बताया जा रहा है। भारत के पूर्व
प्रधानमंत्री व अर्थशाष्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह का मानना है कि अर्थशास्त्र में
0.1 फीसद के उतार – चढ़ाव का महत्व है। यह किसी अर्थव्यस्था की बहुत प्रभावित करता सकता
है। आपको मालूम हो कि भारतीय अर्थव्यस्था 2019-20 की तीसरी तिमाही का विनिर्माण (manufacturing)
उत्पादन 0.2 फीसद घट गया है।
अब सवाल यह उठता है कि विनिर्माण (manufacturing) क्या है ? यह अर्थव्यस्था को
किस प्रकार से प्रभावित करता है: मशीन (machine),
घरेलू हाथ का औजार और श्रमिकों (labours) के द्वारा कच्चे माल को मूल्यवान उत्पाद
में बदलकर वस्तुओं का निर्माण करना या बाजार योग्य बनाना विनिर्माण
(manufacturing) कहलाता है। यह कृषि को आधुनिक बनाने में मदद करता है, लोगों को
कृषि पर से निर्भरता से हटाकर प्राईमरी (primary) और सेकेंडरी (secondary) क्षेत्र
(sector) के उद्द्योग में रोजगार देने को अवसर प्रदान करता है। रोजगार के अवसर
बढ़ते हैं, देश दूसरे देश में अपने वस्तुओं का निर्यात करता है, जिससे विदेशी सम्पति
देश अर्जित करता है। परिणामस्वरूप देश के लोग आर्थिक रूप से सम्पन्न हो जाते हैं।
www.nalanda5.com
