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Showing posts from 2019

The demonetisation of India in 2016 is a mega crime.

Prime Minister Narendra Modi, while making the announcement on the night of November 8, 2016, presented good news to the 1.25 billion people of India, in which the notes of five hundred and one thousand were brought out of circulation in the country. It was called as demonetisation, which was a sudden decision taken by the government. Many big claims were made about its benefits, dreams were shown to more than one public, such an atmosphere was created in the country that it was felt that demonetisation would lead to welfare of the country. There will be complete end to the black money present in the country, after which the property of honesty will be dominated in India. At the time of demonetisation, all the arguments were given to the citizens of India in the language tone in which the middle and lower classes of India use the language of interaction between each other. The public was told that taking a sudden decision will work, the black money hoarders will be cautious due to th...

आर्थिक स्थिति में लुढ़कता भारत को पटरी पर लाने की कवायद।।

भारत में बेरोजगारी का आलम बड़ा व्यापक और स्वभाव से जिद्दी हो गया है हटने का नाम हीं नहीं ले रहा है। इतना हीं नहीं रोजगार भी बेदर्द हो गया है। इनको भी देश के युवाओं का चेहरा रास नहीं आ रहा है, फूटी कौड़ी नहीं सोहा रहा है। इतना बेदर्द तो अंग्रेज भी नहीं हुआ करते थे जनाब! वो भी समय आने पर नरम दिल वाला बन हीं जाते थे, हाँथ जोड़कर उन्होंने भी प्रणाम करना सीख गए, लोगों के सामने इज्जत से पेश आना भी सीख गए, अपने अन्दर लज्जा को भी समाहित कर लिया और आर्थिक मामले में तो उन्होंने सोने की चिड़ियाँ कहे जानेवाला देश भारत को भी पिछे छोड़ दिया। भरतीय भी इनसे शर्माने लगे थे तथा इर्ष्या के नजरों से देखने लगे थे। अंग्रेजी शासन ने भारत में पहली बार रेलगाड़ी चलायी, सती प्रथा को समाप्त करने का फैसला लिया, देश का एकीकरण किया और अंततः भारत को छोड़कर चले जाने का फैसला भी ले लिया। हमारी वर्तमान सरकार बेरोजगारी व भ्रष्टाचार खत्म करने तथा शिक्षा में सुधार करने के बजाय सामन्य वर्ग का आरक्षण देने, तीन तलाक प्रथा को खत्म करने एवं नागरिकता संशोधन अधिनियम लाने से काम चलाने के फ़िराक में लगी है। अब हमारी सरकार रेपो रे...

नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 में उलझता भारत ।।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नये भारत निर्माण पर जोरशोर से काम कर रही है। पार्टी के रजनीतिक महानायकों नोटबंदी और स्वच्छ भारत निर्माण के बाद नागरिक संशोधन विधेयक 2019 को लागू करने में अपना पूरा दम-खम लगाने पर उतारू है। इसे भारत के लोगों के लिए हितकारी विधेयक बताया जा रहा है इसके दूरगामी प्रभाव भी अच्छे होने के संकेत हैं किसी भी दृष्टी से इसकी आलोचना सुनने के मूड में भारतीय जनता पार्टी के नेतागण व इनके समर्थक नहीं हैं। हरहाल में लागू करना तय कर लिया गया है। जबकि इसके विरोध में आवाज उठने शुरू हो गए हैं, पूर्वोतर भारत से विरोधभाष के संकेत मिल रहें हैं, इस क्षेत्र के जनता विधेयक से नाराज हैं इन्हें परेशानी का डर सता रहा है ये लोग घर से बेघर हो सकते हैं क्योंकि इन्हीं क्षेत्रों में ज्यादातर शरणार्थी लोग रहते हैं, जिनपर सीधे-सीधे विधेयक के माध्यम से तलवार चलाये जाने की उम्मीद जतायी जा रही है। एक दूसरा संकेत यह दिखाई पड़ता है कि इस विधेयक के लागू हो जाने के बाद संविधान के मूलभूत उद्देश्य पर असर पड़नेवाला है और साथ में अंतर्राष्ट्रीय संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ के नागरिक सुरक्षा कानूनों जो...

अपने पड़ोसी देश से भी पिछे रह गया भारत ।।

वैश्विक भुखमरी सूचकांक ( जीएचआई ) का ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत विश्व बिरादरी के सामने कमज़ोर पड़ गया है, भारतीय नेताओं को जीएचआई का रिपोर्ट जानने के बाद जो अमेरिका, जापान, ब्रिटेन चीन आदि जैसे देशों की बराबरी का सपना जनता को दिखलाने के नाम पर वोट मांगते फिरते हैं, छोड़ देना चाहिए। यह भारतीय जनता के साथ धोखा है इससे ज्यादा कुछ भी नहीं। चन्द्रमा और मंगल ग्रह पर जाने तथा बड़े-बड़े अत्याधुनिक हथियार खरीद लेने से भारत को मजबूत देशों के श्रृंखला में खड़ा करने से पहले भारत में व्याप्त भुखमरी जैसे समस्या के समाधान पर ध्यान देना अच्छा फैसला साबित होगा। अभी भारत राजनीतिकलोबिया से ग्रसित है। भारत राजनीतिक से उपर उठकर देश हीत का बात करना भूलता जा रहा है और इसे गलत भी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि एक लोकतान्त्रिक देश के लिए राजनीति हीं खम्भा होता है जिसके बारे में सभी को अवगत होना तथा बहस करना लाजमी हो जाता है। लेकिन चिंता की बात यह है की हम सब भारतीय देश के आर्थिक और सामजिक विकास एवं समानता की राजनीति से कोसों दूर जा चुके हैं। हैरान करनेवाली बात है कि लोग विकास व समानता की राजनीति करना ही...

राजनीतिक पैतरे के भंवर जाल में उलझती भारतीय जनता।।

यह लेख गैर राजनीतिक है, किसी पार्टी या नेता को टारगेट करके नहीं लिखा जा रहा है, इसका मकसद सिर्फ देश हीत है, यदि किसी नेता या पार्टी का जिक्र होता है तो उसके संलिप्तता के कारण होगा और इसके जरिये किसी को किसी प्रकार का नुकसान पहुँचाना नहीं है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जनता को नाक में दम कर रखी है, अतिवादी का शिकार हो चुकी है, हलांकि इसकी मंशा जनता के हीत के लिए हीं होती हो, लेकिन इसके निर्णय मुहम्मद-बिन-तुगलक़ के फ़ैसले को ताजा कर देती है। मध्यकालीन इतिहास का राजा तुगलक अपने फ़ैसले से प्रसिद्ध रहा उन्होंने जो भी फैसला लिया आवाम में भगदड़ मच गई, लोगों को परेशानीयों के अलावा कुछ भी नहीं मिला। वैसा हीं मोदी सरकार में देखा गया सरकार ने नोटबंदी की पुरा देश में हाहाकार मच गया। लोग अपना सभी काम छोड़कर नोट भंजाने के लिए बैंक के लम्बी कतार में खड़ा होने लगे। पैसा बदलने और भारी भीड़ से बचने को लेकर बैंक कर्मचारी को घूस तक दे दिया और अपना काम निकला। सरकार ने फ़िर जीएसटी लागू करने का फैसला लिया जो आज तक ग्रामीण कारोबारियों समझने में लगे हैं। सरकार ने पुराने नोट का समाप्त करके नए नोट ले आय...