यह लेख गैर राजनीतिक
है, किसी पार्टी या नेता को टारगेट करके नहीं लिखा जा रहा है, इसका मकसद सिर्फ देश
हीत है, यदि किसी नेता या पार्टी का जिक्र होता है तो उसके संलिप्तता के कारण होगा
और इसके जरिये किसी को किसी प्रकार का नुकसान पहुँचाना नहीं है।
भारतीय जनता पार्टी
की सरकार ने जनता को नाक में दम कर रखी है, अतिवादी का शिकार हो चुकी है, हलांकि
इसकी मंशा जनता के हीत के लिए हीं होती हो, लेकिन इसके निर्णय मुहम्मद-बिन-तुगलक़ के
फ़ैसले को ताजा कर देती है। मध्यकालीन इतिहास का राजा तुगलक अपने फ़ैसले से प्रसिद्ध
रहा उन्होंने जो भी फैसला लिया आवाम में भगदड़ मच गई, लोगों को परेशानीयों के अलावा
कुछ भी नहीं मिला। वैसा हीं मोदी सरकार में देखा गया सरकार ने नोटबंदी की पुरा देश
में हाहाकार मच गया। लोग अपना सभी काम छोड़कर नोट भंजाने के लिए बैंक के लम्बी कतार
में खड़ा होने लगे। पैसा बदलने और भारी भीड़ से बचने को लेकर बैंक कर्मचारी को घूस
तक दे दिया और अपना काम निकला। सरकार ने फ़िर जीएसटी लागू करने का फैसला लिया जो आज
तक ग्रामीण कारोबारियों समझने में लगे हैं। सरकार ने पुराने नोट का समाप्त करके नए
नोट ले आयी, लेकिन एटीएम मशीन उसके उपयुक्त नहीं होने के कारण लोगों के मांग के
अनुसार करेंसी की आपूर्ति नहीं हो सकी, परिणामस्वरूप आवाम को भारी दिक्कत का सामना
करना पड़ा। इनके द्वारा लिए गए इन सब फैसलों से देश का आर्थिक विकास की गाड़ी पिछे
गया है। अर्थशास्त्र में एक थ्योरी है, जिसके अनुसार जनता में आर्थिक अभाव को दूर
करना हो तो एक हीं चिज (जैसे सड़क या ईमारत) को तोड़ा और बनाया जाना चाहिए । इससे
जनता की आर्थिक तंगी समाप्त हो जाती है। गौर से समझने पर मालूम होगा कि हमारी
सरकार यहीं थ्योरी पर काम कर रही है। बस अन्तर सिर्फ इतना है कि अर्थशास्त्र की यह
थ्योरी जनता को हीत में ध्यान रखकर लाया गया जबकि इसका इस्तेमाल भारतीय जनता
पार्टी के लोग अपने फायदे के लिए कर रही है। जनता के मुद्दों को तोड़-मरोड़ रही है
और उसे ठीक भी कर रही है वो इसलिए कर रही है कि जनता के बीच इस सरकार का अस्तित्व
कायम रहे। जिस प्रकार कांग्रेस साठ सालों बागडोर सम्भाली है उसी को दोहराने के
फ़िराक में भारतीय जनता पार्टी के महकमा जनता के सामने अपनी छबि बनाने के प्रयास
में तन-धन से लगें हैं। इसका सबसे बड़ा साक्ष्य यह है कि मोदी सेना कहते नहीं थकती
की कांग्रेस ने साठ साल शासन किया और इस दरम्यान देश को बरबाद करने का काम किया है
जबकि इस बात में रति भर की सच्चाई नहीं है।
मोदी सरकार को क्या,
देश के किसी पार्टी को लेकर देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता यह सभी में कूट-कूट
कर भरा है, लेकिन इनके काम करने का मंशा भिन्न है, जिसका हकीकत विद्वान के द्वारा
शोध करने पर हीं मालूम पड़ेगा। देखा जाय तो मोदी सरकार यह चाहती है कि जनता के लिए
हम जरूरत हों, हमारी सरकार के बगैर जनता बीमार हो जाय। जिस प्रकार से ड्रग्स के
आदि लोग इसके बगैर नहीं रह सकते वैसे हीं मोदी सरकार जनता को बनाने पे उतारू है और
इसके लिए जरुरी है कि जनता को डोज पे डोज दिया जाय। यहीं वजह है कि सरकार लगातार कुछ
नया करने पे उतारू है। यही वजह है कि मोदी सरकार समान्य वर्ग में आरक्षण लागू हो
को लेकर आ गई है जबकी लोकसभा के चुनाव सर पर सवार था और इसमें लम्बी प्रक्रिया
होने थे फ़िर भी। सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण को लाने का मतलब हीं नहीं बनता है
क्योंकि एक तरफ हम आरक्षण समाप्त करने की वकालत कर रहे हैं तो दूसरी ओर आरक्षण
लाने का औचित्यपूर्ण फैसला कैसे मान लिया जाय। यह सिर्फ जनता में अस्तित्व बनाये
रखने के लिए ड्रग्स का एक डोज है जिसके बाद आवाम इनके आदि हो जाएगी।
नरेंद्र मोदी उज्वला
योजना को लेकर बहुत हीं एग्रेससिव मोड में दिखते हैं। वहीं इनके समर्थक शौचालय
निर्माण स्कीम को लेकर बोलते नहीं थकते लोगों को ताने मारते फिरते हैं। शौचालय
निर्माण पर मोदी के स्टार समर्थक अक्षय कुमार फिल्म भी बना चुके हैं। सरकार अपने
पांच सालों के कार्यकाल में इन दोनों योजना को महत्वपूर्ण उपलब्धी मानती है और इसके
आधार पर वोट मांग रही है और टीवी पर प्रचार कर रही है कि एक बार फ़िर मोदी सरकार।
इस हिसाब से इसपर सवाल करना बनता है। आखिर इन दोनों योजना में ऐसा क्या है जिसे
इतना प्रचार किया जा रहा है।मोटे तौर पर हिसाब है कि कांग्रेस के समय सिंगल
सिलेंडर रिफिल वाला घरेलू गैस कनेक्शन 4500 रूपये में मिलता था, जिसको मोदी ज़ी ने
गरीब लोगों को मुफ्त में देने का काम किया है। कांग्रेस के समय गैस चूल्हा और मोदी
ज़ी के गैस चूल्हा के क्वालिटी में अन्तर है। मनमोहन सिंह के चूल्हा ज्यादा बेहतर
था यह देखने का चिज है। फ़िर भी फ्री का माल है क्वालिटी मायने नहीं रखता, मुंशी
प्रेमचन्द के समय एक कहावत थी कि मुफ्त के बैल का दांत देखा नहीं जाता। मोदी ज़ी की
दूसरी योजना शौचालय निर्माण है, जिसको लेकर इनके समर्थक जनता को खूब ताना मारते
फिरते हैं और अक्षय कुमार ने तो फिल्म हीं बना दिया है। इसमें शौचालय निर्माण के
लिए जनता को 12,000 रूपये दिया जाता है, यह पैसा लोगों के सीधे बैंक खाता में जाता
है, जिसके बावजूद इसके अधिकारी दो हजार रूपये ले लेते हैं, वो भी पहले पैसा लेकर
शौचालय निर्माण को पास करते हैं। यह भ्रष्टाचार खुलेआम किया गया। खैर, यहाँ
भ्रष्टाचार की बात करना सही नहीं है, क्योंकि सबूत देना पड़ेगा जो नहीं है इसलिए
इसे ख़ारिज करते हैं। आप याद कीजिये मनमोहन सिंह की सरकार ने नेशनल रोजगार गारन्टी
स्कीम (नरेगा/मनरेगा) भारत के गरीब लोगों को दिया था इसमें 220 रूपये के हिसाब से
एक साल में 100 दिनों का रोजगार देने का सरकार ने कानूनी वादा किया था। इसके हिसाब
से एक साल में जनता को 22000 रूपये दिया गया जो पांच सालों में एक लाख दस हजार
बनता है। अब आप सोचिये पांच सालों में नरेंद्र मोदी ने 16500 रूपये
जनता को दिया और वहीं मनमोहन सिंह सरकार ने जनता को 110000 रूपये देने का काम किया।
भारत में सरकारी योजनाओं के माध्यम से अधिकारियों के द्वारा जनता को लूटने
का काम चल रहा है इससे इनकार नहीं किया जा सकता। इसी भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए
भारत के लोग परेशान थे और इसी को जड़ से खत्म करने के लिए जनता से नरेंद्र मोदी ने
वोट मंगा और यहीं वजह रहा की इनको स्पष्ट बहुमत से जनता चुना, लेकिन नरेंद्र मोदी
ज़ी गैस चूल्हा और शौचालय वितरण करके जनता को उलझा कर रख दिया।
