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Showing posts from May, 2023

कलंकित फैसला के नींव पर खड़ा हुआ नई संसद भवन का इमारत-नई दिल्ली

कलंकित फैसला के नींव पर खड़ा हुआ नई संसद भवन का इमारत। नई संसद भवन का उद्घाटन तो हो गया , लेकिन इसका निर्माण से लेकर उद्घटन तक पर नजर डाली जाय तो इसमें एक संगिन अपराध दिखई पड़ेगा। पीएम मोदी की एक बड़ी साजिश दिखाई देगी। मोदी ने जो चाल चले हैं , उसमें एक स्वच्छ संस्कार का संकेत नहीं दिखता , स्वस्थ्य लोकतंत्र नहीं दिखता और एक उचित समय पर निर्णय नहीं लिया गया साफ-साफ दिखाई पड़ते हैं। मोदी के द्वारा भारत के नई संसद भवन की आधारशिला 1 अक्टूबर को रखी गई, जबकि  2 अक्टूबर के दिन भारत के राष्ट्रपिता माहात्मा गांधी का जन्म दिन आता है। इस दिन को भारत क्या , पूरा विश्व प्रमुखता के साथ याद करता है। लेकिन , पीएम नरेन्द्र मोदी के दिल में गांधी के प्रति इतना नफरत भरा है कि संसद भवन का आधारशिला गांधी जी के जन्म दिन के एक दिन पूर्व रखा। नरेन्द्र मोदी यहीं नहीं रूके हैं। ये भरत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को भी नहीं बख्शे हैं। मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के प्रति कितना सम्मान रखते हैं , इस बात का भी खुलास हो जाता है। पूर्व पीएम अटल बिहार वाजपेयी जी का जन्म दिवस 25 दिसम्बर को आता...

पीएम मोदी के द्वारा नई संसद भवन का उद्घाटन किया गया, तो महिला पहलवान कानून द्वारा रौंद दी गईं- दिल्ली।।

आज दिल्ली में पीएम मोदी के द्वारा नई संसद भवन उद्घाटन किया गया , तो महिला पहलवान कानून द्वारा रौंद दी गईं।। आज भारत की राजधानी दिल्ली , दो दृश्य का गवाह बना है- पहला की पीएम नरेंद्र मोदी नई संसद भवन का उद्घाटन किए और दूसरा महिला पहलवानों कानून द्वारा रौंद दी गईं। इन पहलवानों को कोई बचानेवाला नहीं था , इनके सर्मथन में कोई आवाज उठानेवाला नहीं था। सबसे बड़ी बात ये रहा कि इन खिलाड़ियों को मानसिक और शारीरिक शोषण करनेवाला बृजभूषण सिंह नई संसद भवन के उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी जी के साथ संसद में मौजूद था। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने आज नई संसद भवन का उद्घाटन अपने साथियों के साथ किए। समारोह में ढोंगी पंडितों को बुलाया गया और साधुओं को बुलाया गया , लेकिन भारत के प्रथम नागरिक कहे जानेवाले देश के ‘राष्ट्र पति’ को नहीं बुलाया गया। भारत के राष्ट्र पति महोदया को इस समारोह से क्यों दूर रखा गया, इसका कोई आधिकारिक जानकारी सर्वजनिक नहीं की गई है। नई संसद भवन जिसे ‘सेन्ट्र ल विस्टा’ के नाम से जाना जाता है , इसे बनाने कि शुरूआत कोरोना काल के समय हुई थी। जिस समय भारत के लोग बेहाल जीवन जीने को मजबूर ...

“मणिपुर में हालात भयावह, लाशों को कोई पूछनेवाला या लेजानेवाला नहीं है”— कांग्रेस।

“ मणिपुर में हालात भयावह, लाशों को कोई पूछनेवाला या लेजानेवाला नहीं है ” — कांग्रेस। भारत के पूर्वी क्षेत्र स्थित मणिपुर राज्य दंगा-फसाद के आग में जल कर भस्म होते जा रही है और इधर केन्द्र सरकार हाथ-पर-हाथ धरे किस अनहोनी का इन्तजार कर रही है ? यह आन्तरिक कलह से जुड़ा बहुत बड़ा और जरूरी सवाल है , जिसका जवाब भारत के लोग को स्वंय तलाश करने होंगे , ऐसा लगने लगा है। इस घटना की शुरूआत के महीनों होनें को हैं , लेकिन अभी तक केन्द्र सरकार इसे नियंत्रण करने में असफल ही रही। कांग्रेस ट्वीट करके मणिपुर से जुड़े घटना के वर्तमान हालात के बारे में जानकारी पोस्ट की है। कांग्रेस ने इस पोस्ट में लिखा है कि मणिपुर में 54,000 लोग बेघर हो गए हैं। राज्य के सरकारी संपत्ति लगभग 20 पुलिस स्टेशन को जला दिया गया है। दंगाईयों ने लोगों के 2,000 मकानों को आग के हवाले करके इसे जला दिया। दंगाईयों ने हिंसा के दौरान 6,000 गोलियाँ , 1,000 सेमी आॅटोमेटिक हथियार लूट लिये हैं। पाँच मंदिरों को जला दिया गया है। इतना ही नहीं करिब दो सौ चर्चो को आग के हवाले कर दिया गया है और इसे जला दिया। चर्चो और मंदिरों को जलाने से य...

कांग्रेस को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मिला प्रचण्ड बहुमत, मोदी-पावर का हुआ पावर गुल।

कांग्रेस को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मिला प्रचण्ड बहुमत , मोदी - पावर का हुआ पावर गुल। कर्नाटक विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत से इस बात को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि कर्नाटक के लोगों को काम करनेवाली सरकार की जरूरत है , जनता कीे समस्या को सुनने व समझने वाली सरकार की जरूरत है और ऐसी सरकार की जरूरत है , जो समाज को एकजूट करते हुए राज्य को प्रगति के मार्ग पर ले जाये। ये सारे गुण कांग्रेस में देखा जा सकता है। विशेष बात ये है कि ऐसी सरकार से कर्नाटक के लोग परेशान हो चुके हैं , जो चुनावी वादा को जुमला नाम देता हो , जिसमें भाजपा के लोग पीएचडी का डिग्री हासिल करके कई सालों से बैठे हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी चुनाव के समय जो वादा करती है , वो निभाने के लिए जानी जाने लगी है।   यहीं वजह रहा कि कांग्रेस को कर्नाटक विधान सभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुए हैं। कुल 224 विधानसभा सीट में कांग्रेस को 135 सीट प्राप्त हुए हैं। और वहीं भारतीय जनता पार्टी भाजपा को 66 सीट मिले हैं। इस चुनाव परिणाम में कांग्रेस को 55 सीटें की बढ़त हासिल हुई। जबकि भाजपा को 38 सीटें का नुकसान ह...

कांग्रेस हाईकमान से फिर मुलाकात किए नीतिश कुमार, बीजेपी बिहार से साफ हो सकती है।

कांग्रेस हाईकमान से फिर मुलाकात किए नीतिश कुमार , बीजेपी बिहार से साफ हो सकती है। बिहार के सीनियर नेता श्री नीतिश कुमार , कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी आज दिल्ली में मुलाकात किए। इस मुलाकात का वीडियों कांग्रेस अपने ट्वीटर हैंडल पर ट्वीट करके इसकी जानकारी दी। यह मुलाकात कांग्रेस कार्ययालय में हीं हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष और राहुल गांधी एक साथ बैठे हुए हैं वहीं नीतीश कुमार पास के ही सोफा पर बैठे हैं। कुछ माह पहले भी नीतीश कुमार अपने सहयोगी बिहार के नेताओं को लेकर कांग्रेस के इन लीडरों के साथ मुलाकात कर चुके हैं , इस समय बिहार के युवा नेता तेजस्वी यादव भी मौजूद थे। इनके अलवा और भी कई नेताएं उस मीटिंग में शामिल हुए थे। उस समय के बाद नीतिश जी और कांग्रेस के इन नेताओं के साथ यह दूसरी बार मीटिंग है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मीटिंग पर ट्वीट करते हुए लिखें हैं कि अब एकजुट होगा देश , लोकतंत्र की मजबूती ही हमारा संदेश है। श्री राहुल गांधी और हमने आज बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार के साथ वर्तमान राजनैतिक स्थिति पर चर्चा कर देश को एक नई दिशा देने की...

उस्ताद मंगू दो बैरिस्टरों को हिकारत भरी नजर से देख कर, मन-ही-मन कहा- ‘टोडी बच्चे!’

उस्ताद मंगू दो बैरिस्टरों को हिकारत भरी नजर से देख कर , मन-ही-मन कहा- ‘टोडी बच्चे!’ नया कानून सआदत हसन मंटो एक परिचयः सआदत हसन मंटो ने कुल 43 साल के जीवन में अनेक विवादास्पद , चर्चित और विशिष्ट कहानियाँ लिखीं। उनके लेखन से उर्दू साहित्य में यथार्थवाद का एक नया दौर शुरू हुआ। उनकी चेतना पर भारत-पाक विभाजन का तीखा असर पड़ा। उनकी अनेक ऐसी कहानियाँ ‘स्याह हाशिये’ नामक कहानी संग्रह में मिलती हैं। ‘खोल दो’ , ‘ टोबा टेकसिंह’ , ‘ हतक’ , ‘ लाइसेंस’ , ‘ काली सलवार’ मंटो की प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। स्न 1947 में विभाजन के समय मंटो पाकिस्तान चले गए। पिछले भाग में अपने पढ़ा , ऐसी खबर सुनाऊँ कि तेरा जी खुश हो जाए! तेरी इस गंजी खोपड़ी पर बाल उग आएँ। उस्ताद मंगू अपने दोस्तों ये कहकर खुश हुआ और फिर से पुराने स्टाइल में आ गया। ऐसी खबर सुनाऊँ कि तेरा जी खुश हो जाए! तेरी इस गंजी खोपड़ी पर बाल उग आएँ’-उस्ताद मंगू। अब आगे......... उस्ताद मंगू दो बैरिस्टरों को हिकारत भरी नजर से देख कर , मन-ही-मन कहा- ‘टोडी बच्चे!’ कुछ अर्से से पेशावर और दूसरे शहरों में , सुर्खपोशों (गफ्फार खाँ के खुदाई खिदमतगारों) का...

ऐसी खबर सुनाऊँ कि तेरा जी खुश हो जाए! तेरी इस गंजी खोपड़ी पर बाल उग आएँ’-उस्ताद मंगू।

ऐसी खबर सुनाऊँ कि तेरा जी खुश हो जाए! तेरी इस गंजी खोपड़ी पर बाल उग आएँ’-उस्ताद मंगू। नया कानून सआदत हसन मंटो एक परिचयः मंटो ने कुल 43 साल के जीवन काल में अनेक विवादास्पद , चर्चित और विशिष्ट कहानियाँ लिखीं। उनके लेखन से उर्दू साहित्य में यथार्थवाद का एक नया दौर शुरू हुआ। उनकी चेतना पर भारत-पाक विभाजन का तीखा असर पड़ा। उनकी अनेक ऐसी कहानियाँ ‘स्याह हाशिये’ नामक कहानी संग्रह में मिलती है। ‘खोल दो’ , ‘ टोबा टेकसिंह’ , ‘ हतक’ , ‘ लाइसेंस’ , ‘ काली सलवार’ मंटो की प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। सन् 1947 में विभाजन के समय मंटो पाकिस्तान चले गए। पिछले भाग में आपने पढ़ा , कैसे नायक मंगू कोचवान नया कानून यानी ‘इंडिया एक्ट’ के आने से बहुत खुश हुआ और इसको अपने साथियों को सुनाने के लिए कितना बेचैनी के साथ इधर-उधर मारा फिरता रहा। नया कानून यानी ‘इंडिया एक्ट’ अनेवाला है को सुनकर मंगू कोचवान ऐसे नाचने लगा, जैसे घने बादल को देख मोर नाचता हो। अब आगे............ ऐसी खबर सुनाऊँ कि तेरा जी खुश हो जाए! तेरी इस गंजी खोपड़ी पर बाल उग आएँ।’ उस्ताद मंगू। वह बेहद खुश था। खासकर उस समय उसके मन को बड़ी ठंडक पहुँच...

नया कानून यानी ‘इंडिया एक्ट’ अनेवाला है को सुनकर मंगू कोचवान ऐसे नाचने लगा, जैसे घने बादल को देख मोर नाचता हो।

नया कानून यानी ‘इंडिया एक्ट’ अनेवाला है को सुनकर मंगू कोचवान ऐसे नाचने लगा , जैसे घने बादल को देख मोर नाचता हो। नया कानून सआदत हसन मंटो एक परिचयः सआदत हसन मंटो ने कुल 43 वर्ष के जीवन काल में अनेक विवादास्पद , चर्चित और विशिष्ट कहानियाँ लिखीं। उनके लेखन से उर्दू साहित्य में यथार्थवाद का एक नया दौर शुरू हुआ। उनकी चेतना पर भारत-पाक विभाजन का तीखा असर पड़ा। उनकी अनेक ऐसी कहानियाँ ‘स्याह हाशिये’ नामक कहानी संग्रह में मिलती हैं। ‘खोल दो’ , ‘ टोबा टेकसिंह’ , ‘ हतक’ , ‘ लाइसेंस’ , ‘ काली सलवार’ , मंटो की प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। सन् 1947 में विभाजन के समय मंटो पाकिस्तान चले गए। पिछले भाग में आपने पढ़ा , भारत में नया कानून यानी ‘इंडिया एक्ट’ आनेवाला है के बारे में सुनकर मंगू कोचवान इतना खुश हुआ , जिसका कोई ठिकाना नहीं रहा और वह इस कानून के सहारे देश में सबकुछ बदल जाएगा की कल्पना करना शरू कर दिया। कोई नया कानून-वानून बने तो इन लोगों से छुटकारा मिले। तेरी कसम, जान-में-जान आ जाए अब आगे......... नया कानून यानी ‘इंडिया एक्ट’ अनेवाला है को सुनकर मंगू कोचवान ऐसे नाचने लगा , जैसे घने बादल को ...