कलंकित फैसला के नींव पर खड़ा हुआ नई संसद भवन का इमारत। नई संसद भवन का उद्घाटन तो हो गया , लेकिन इसका निर्माण से लेकर उद्घटन तक पर नजर डाली जाय तो इसमें एक संगिन अपराध दिखई पड़ेगा। पीएम मोदी की एक बड़ी साजिश दिखाई देगी। मोदी ने जो चाल चले हैं , उसमें एक स्वच्छ संस्कार का संकेत नहीं दिखता , स्वस्थ्य लोकतंत्र नहीं दिखता और एक उचित समय पर निर्णय नहीं लिया गया साफ-साफ दिखाई पड़ते हैं। मोदी के द्वारा भारत के नई संसद भवन की आधारशिला 1 अक्टूबर को रखी गई, जबकि 2 अक्टूबर के दिन भारत के राष्ट्रपिता माहात्मा गांधी का जन्म दिन आता है। इस दिन को भारत क्या , पूरा विश्व प्रमुखता के साथ याद करता है। लेकिन , पीएम नरेन्द्र मोदी के दिल में गांधी के प्रति इतना नफरत भरा है कि संसद भवन का आधारशिला गांधी जी के जन्म दिन के एक दिन पूर्व रखा। नरेन्द्र मोदी यहीं नहीं रूके हैं। ये भरत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को भी नहीं बख्शे हैं। मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के प्रति कितना सम्मान रखते हैं , इस बात का भी खुलास हो जाता है। पूर्व पीएम अटल बिहार वाजपेयी जी का जन्म दिवस 25 दिसम्बर को आता...