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पीएम मोदी के द्वारा नई संसद भवन का उद्घाटन किया गया, तो महिला पहलवान कानून द्वारा रौंद दी गईं- दिल्ली।।

आज दिल्ली में पीएम मोदी के द्वारा नई संसद भवन उद्घाटन किया गया, तो महिला पहलवान कानून द्वारा रौंद दी गईं।।


आज भारत की राजधानी दिल्ली, दो दृश्य का गवाह बना है- पहला की पीएम नरेंद्र मोदी नई संसद भवन का उद्घाटन किए और दूसरा महिला पहलवानों कानून द्वारा रौंद दी गईं। इन पहलवानों को कोई बचानेवाला नहीं था, इनके सर्मथन में कोई आवाज उठानेवाला नहीं था। सबसे बड़ी बात ये रहा कि इन खिलाड़ियों को मानसिक और शारीरिक शोषण करनेवाला बृजभूषण सिंह नई संसद भवन के उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी जी के साथ संसद में मौजूद था।


भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने आज नई संसद भवन का उद्घाटन अपने साथियों के साथ किए। समारोह में ढोंगी पंडितों को बुलाया गया और साधुओं को बुलाया गया, लेकिन भारत के प्रथम नागरिक कहे जानेवाले देश के ‘राष्ट्रपति’ को नहीं बुलाया गया। भारत के राष्ट्रपति महोदया को इस समारोह से क्यों दूर रखा गया, इसका कोई आधिकारिक जानकारी सर्वजनिक नहीं की गई है।


नई संसद भवन जिसे ‘सेन्ट्रल विस्टा’ के नाम से जाना जाता है, इसे बनाने कि शुरूआत कोरोना काल के समय हुई थी। जिस समय भारत के लोग बेहाल जीवन जीने को मजबूर थे, लोगों का रोजगार खत्म हो चुका था और इन्हे आर्थिक मदद की जरूरत थी। विश्व के सभी देश अपने-अपने नागरिकों को आर्थिक मदद दे रहे थे, उस समय पीएम मोदी जनता से लूटने के काम करना शुरू कर दिए और फिर सेंट्रल विस्टा बनाने का प्लान बनाए।


कहा जाता है कि नई संसद भवन के निर्माण में 862 करोड़ रुपए खर्च आए हैं। इतना से कोरोना के समय आर्थिक संकट से जूझ रहें लोगों को अर्थिक मदद की जा सकती थी। लेकिन, पीएम मोदी जी लोगों का आर्थिक मदद देने से बेहतर लोगों से पैसा लूटना और संसद भवन निर्माण करना अच्छाा समझे।

आज पीएम मोदी एक ओर नई संसद भवन का उद्घाटन का काम कर रहे थे, तो दूसरी ओर भारत को विश्व में नाम ऊँचा करनेवाली महिला खिलाड़ियां अपने अस्मिता को बचाने के लिए राजधानी दिल्ली और नई संसद भवन के पास ही सड़क पर आंदोलन कर रहीं थीं और पुलिस की लाठियाँ खा रहीं थीं।


इन लोगों का इतना सा दोष है कि पीएम मोदी के सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौण, मानसिक और शारीरिक शोषण का मामला लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर के पास महिनों से आंदोलन कर रहीं है। आज न्याय न मिलने की वजह से आंदोलन नई संसद भवन के पास करने चलीं गई, क्योंकि इन सभी के गुनाहगार बृजभूषण संसद भवन में मौजूद था।

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