दाढ़ी बढ़ाने की प्रथा देखते हीं देखते कब और कैसे फैशन बन गया पता तक नहीं चला। पहले ऐसा ट्रेंड था कि लम्बी दाढ़ी वाले व्यक्ति को लोग बाबा कहते थे लेकिन बाद में जैसे-जैसे समय बदला वैसे-वैसे बहुत कुछ बदल गया वो कैसे ? वर्तमान समय में हमारे देश में लम्बी दाढ़ी वाले बाबाओं की धूम मची है, ऐसा लगता है इन बाबा लोगों का बाढ़ आ गया है। कुछ बाबा तो आजकल जेल की हवा भी खा रहें हैं। इन बाबाओं को देखकर उन दिनों की याद आ गई जब हम छोटे थे, तब बाबा को देखते हीं डर से पूरा शारीर कांपने लगता। लेकिन जैसे-जैसे बड़ा होते गए बाबा के प्रति नजरिया बदलता गया यूं कहें परिवर्तन हुआ। बचपन के समयों में घर के दरवाजे और गांवों में बाबाओं का आनाजाना खूब होता था और गर्मी के मौसम में ये धूम चरम सीमा पर होता। जब गांव के किसान अपना फसल काटकर खेत से घर ले आते और निश्चिन्त होकर अपने बच्चों, परिवारों तथा दोस्तों के साथ मौज-मस्ती कर रहे होते, उस समय बाबा लोग गांव में खूब आते ये समय इन लोगों के लिए उपयुक्त समय था। पिता ज़ी घर में किन्हीं की उक्ति को बार-बार जिक्र किया करते कि “मन न रंगाये, रंगाये जोगी कपड़ा और दढ़िया (दाढ़ी के ब...