दाढ़ी बढ़ाने की प्रथा देखते हीं देखते कब और कैसे फैशन बन गया पता तक नहीं चला।
पहले ऐसा ट्रेंड था
कि लम्बी दाढ़ी वाले व्यक्ति को लोग बाबा कहते थे लेकिन बाद में जैसे-जैसे समय बदला
वैसे-वैसे बहुत कुछ बदल गया वो कैसे ?
वर्तमान समय में
हमारे देश में लम्बी दाढ़ी वाले बाबाओं की धूम मची है, ऐसा लगता है इन बाबा लोगों
का बाढ़ आ गया है। कुछ बाबा तो आजकल जेल की हवा भी खा रहें हैं। इन बाबाओं को
देखकर उन दिनों की याद आ गई जब हम छोटे थे, तब बाबा को देखते हीं डर से पूरा शारीर
कांपने लगता। लेकिन जैसे-जैसे बड़ा होते गए बाबा के प्रति नजरिया बदलता गया यूं
कहें परिवर्तन हुआ। बचपन के समयों में घर के दरवाजे और गांवों में बाबाओं का
आनाजाना खूब होता था और गर्मी के मौसम में ये धूम चरम सीमा पर होता। जब गांव के
किसान अपना फसल काटकर खेत से घर ले आते और निश्चिन्त होकर अपने बच्चों, परिवारों
तथा दोस्तों के साथ मौज-मस्ती कर रहे होते, उस समय बाबा लोग गांव में खूब आते ये
समय इन लोगों के लिए उपयुक्त समय था।
पिता ज़ी घर में
किन्हीं की उक्ति को बार-बार जिक्र किया करते कि “मन न रंगाये, रंगाये जोगी कपड़ा
और दढ़िया (दाढ़ी के बाल) बढ़ा के जोगी बन गैले बकरा”। मेरे पिताजी बाबाओं को इसी
नजरिये से देखा करते और हम थे जो इन बाबाओं के देखते हीं भाग खड़े होते। हमे तो आजतक
भारत के बाबाओं से डर हीं लगता है। बाल्यावस्था में हीं थे तब हमारे गांव के एक
व्यक्ति थे जो दाढ़ी बढ़ा कर घूमा करते इतना हीं नहीं उनके गला में बहुत सारे माला
भी लटका होता था। उनके गले में लटके हुए मालों का राज आज तक पता नहीं चला, लेकिन
लोगों से इतना सुनने को मिलता है कि वे अपने जबानी में रुद्राक्ष और तुलसी के
मालाओं का धारण करते थे। आज भी उनके गले में रुद्राक्ष का माला देखने को मिलता है,
लेकिन दाढ़ी के बाल को बढ़ने से पहले हीं उसे ब्लेड से साफ़ कर लेते हैं और मूंछे को
कैंची से छोटा करते रहते हैं।
उस समय के पढ़े-लिखे
कुछ युवा भी दाढ़ी-मूंछ बढ़ा लिया करते थे, उनके बारे में लोग कहा करते कि भाई साहब
मन्नत रखें हैं कि जबतक सरकारी नौकरी नहीं करते तबतक अपनी दाढ़ी-मूंछ को बढ़ते
रहने देंगें इसे छोटा व साफ़ नहीं करेंगें।
अब भला इन्हें कौन समझाये कि सरकारी नौकरी पढ़ने-लिखने व मेहनत करने से मिलता है दाढ़ी
बढ़ाने से नहीं। इस बात से वे भी बहुत अच्छी तरह से परिचित थे कि सरकारी नौकरी करने
के लिए कठोर मेहनत करनी पड़ती है जान तक लगानी पड़ती है फ़िर भी यह निश्चित नहीं है
कि सरकारी नौकरी मिल जाय। जिसके बावजूद भी लोग इस प्रथा को बनाये रखने में हीं
समझदारी समझा। शायद ये लोगों को बताना चाहते थे कि हमने सरकारी नौकरी के लिए
प्रयास किया, अपनी दाढ़ी-मूंछ को भी बढ़ा लिया था फ़िर भी नौकरी नहीं हुआ। इससे
ज्यादा कर हीं क्या सकते थे!
बिहार के इस क्षेत्र
में दाढ़ी बढ़ाकर मन्नत मांगने की प्रथा सरकारी नौकरी तक हीं सीमित नहीं था, बल्कि
कुछ लोग बच्चों प्राप्ति के लिए अपने दाढ़ी-मूंछ बढ़ने के लिए छोड़ देते थे। ऐसे तो इस
समाज में संतान प्राप्ति हेतू बहुत बड़े-बड़े मन्नत मांगने की प्रथा है, इसके लिए तो
लोग चार-चार शादियाँ करने में परहेज नहीं करते थे लेकिन अब ऐसे प्रथा को लोग बकवास
मानते हैं क्योंकि अब लोगों को यह पता हो गया है कि संतान का पैदा होना या न होने
की जानकारी मेडिकल को पता हो गया है। उस समय संतान प्राप्ति हेतू दाढ़ी रखने की
प्रथा आम थी कोई भी इसे रख सकता था और इसके लिए किसी योग्यता या कानूनी वाध्यता
नहीं था।
दाढ़ी बढ़ाकर घुमनेवालों
को लोग आगे चलकर नेता होने के नजरिये से देखना शुरू कर दिया। जैसे हीं किसी को
लम्बी दाढ़ी-मूंछ वालों के कन्धों पर कपड़ा का झोला की वेशभूषा में घर से बाहर निकल
जाय तो उसे लोग नेता कहकर हीं बुलाते ऐसे लोगों को समाज में एक अलग पहचान बन जाता, ये लोग जिसके दरवाजे पर पहुंच जाते वहां इन्हें बैठने के लिए कहते और खटिया को
बिछा देते। लेकिन ये सारे प्रथा समय गुजरते के साथ खत्म हो गया और वर्तमान समयों में
विलुप्त के कगार पर पहुंच गया है। अभी का हाल यह है कि यदि आप अपनी दाढ़ी-मूंछ बढ़ा
कर घूमना शुरू कर दिया तो लोग आपको पागल तक कहने में जरा सा भी संकोच नहीं करेंगें। अब तो लोगों के बिच हल्की लम्बी दाढ़ी-मूंछ रखने का फैशन चल रहा है और सुनने में ये भी
आ रहा है कि ऐसे लोगों को आजकल की लड़कियां खूब पसंद करती हैं, ये बिहार क्या भारत
का ट्रेंड हो चुका है।
भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री के हल्की दाढ़ी-मूंछ लुक को भी लोग बहुत पसंद करते हैं, युवाओं के बिच इनके इस लुक को लेकर खूब चर्चा है तथा प्रधानमंत्री के इस ट्रेंड को लोग अनुसरण भी कर रहें हैं इतना हीं नहीं इस फैशन को लोगों ने लॉकडाउन में भी इसे ख़राब होने नहीं दिया। लोग सैलून में जाकर अपने फैशन को बरकरार रखे हुए हैं। जबकि ऐसा लगता है कि कोरोना के डर से प्रधानमंत्री स्वयं अपनी दाढ़ी-मूंछ को बढ़ाते जा रहे हैं। परन्तु कुछ लोग दबी जुबान में प्रधानमंत्री के इस नये स्टाइल को भी चर्चा का विषय बना दिया है। हद तो तब हो गई जब एक सोलह साल के बच्चा ने हमे यह कह दिया कि ‘आपको पता है, हमारे प्रधानमंत्री संकल्प लिये हैं कि जबतक देश से कोरोना को नहीं भगा देंगे तबतक अपनी दाढ़ी-मूंछ बढ़ते रहने देंगे’। इस बच्चा को बहुत देर तक समझया कि यह गलत बात है, तुम्हे किसी ने गलत बता दिया है, अपने देश के नेता के बारे में ऐसी बात नहीं करते तब जाकर वह माना और कहा कि अंकल आप ठीक कहते हैं दाढ़ी-मूंछ से कोरोना का क्या संबंध हो सकता है भला!

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