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Showing posts from September, 2023

महिला आरक्षण बिल एक चुनावी जुमला-सुप्रिया श्रीनेत कांग्रेस सीनियर लीडर।।

महिला आरक्षण बिल एक चुनावी जुमला-सुप्रिया श्रीनेत कांग्रेस सीनियर लीडर।। महिला आरक्षण बिल-2023 लागू कर दिया गया है। मोदी सरकार इसे भारी बहुमत से लागू कर दी। विपक्ष के एक भी नेताओं के द्वारा इस बिल का विरोध नहीं किया गया। सभी दल के लोगों ने इस बिल को तहे-दिल से स्वागत किया। विशेषकर कांग्रेस इस बिल को लेकर काफी उत्साहित दिखी। मोदी सरकार महिला आरक्षण बिल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 के नाम से संसद में पास की है। इस अधिनियम को मोदी सरकार विशेष सत्र बुलाकर पास की है। किसी को इसकी ख़बर नहीं दी गई थी। सरकार द्वारा अचानक महिलाओं के लिए तोहफा दे दिया गया कि घोषणा कर दी गई। मोदी सरकार महिला आरक्षण बिल पास कर दी और इस बिल को विपक्षी दलों ने भी दिल खोलकर समर्थन किये, लेकिन ये मोदी सरकार एक चालाकी कर दी। दूसरे शब्दों में मोदी के भाषा में कहें तो महिलाओं के साथ मोदी सरकार छल कर दी है। एक तरह से धोख-धङी करना भी नाम दिया जा सकता है, इसे। कांग्रेस सीनियर लीडर सुप्रिया श्रीनेत महिला आरक्षण बिल को ‘जुमला’ शब्द से संबोधित कीं है। उनका कहना है कि यह जो मोदी सरकार बिल पास कि वह चुनावी जुमला है। म...

भारत और पाकिस्तान के बीच शुरू हुई बस सेवा के दो माह बाद कारगिल युद्ध हुआ|

भारत और पाकिस्तान के बीच शुरू हुई बस सेवा के दो माह बाद कारगिल युद्ध हुआ | दिल्ली-लाहौर बस सेवा की शुरूआत एक तरफ भारत के प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और दूसरी तरफ पाकिस्तान प्रधान मंत्री नवाज शरिफ के समय हुई थी। और इन्हीं दोनों नेताओँ के समया दोनों देशों के बीच कारगिल का युद्ध भी हो गया। यह दोनों देशों के नागरिकों के लिए बङे इतफ़ाक की बात है एक हीं नेता के समय शांति बहाल हुआ और शांति भंग भी हुआ।   19 फरवरी 1999 के दिन भारत और पाकिस्तान के बीच शांतिपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों की सरकारों के प्रयासों से दिल्ली से लाहौर बस सेवा कि शुरूआत की गई थी। इसक उद्घाटन यात्रा में , तत्कालीन भारतीय प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी बस पर सवार होकर पाकिस्तान गए। और अटल जी को स्वागत के लिए पाकिस्तान के प्रधान मंत्री नवाज शरीफ थे।   दिल्ली-लाहौर बस सेवा की शुरूआत के दो माह बाद पाकिस्तान और भारत के बीच भयानक युद्ध छीङ गई, जिसे कारगिल युद्ध नाम दिया गया और इसमें सेना मारे गए। इस युद्ध की शुरूआत मई 1999 को हो गई थी। और युद्ध का कारण बना पाकिस्...

एक डिलीवरी मैन के लिए एक शब्द, आम शब्द होता है, जब वह अपने रणभूमि में होते हैं- सर/मैडम।

एक डिलीवरी मैन के लिए एक शब्द, आम शब्द होता है, जब वह अपने रणभूमि में होते हैं- सर / मैडम । डिलीवरी का काम सरल स्वभाव वाला काम नहीं है, कुछ लोग सामान लेने से अचानक सीधे-सीधे मना कर देते हैं। कहते हैः गलती से हो गया, नहीं लेना है, आदी बहाना लगा कर सामान नहीं लेते। उन्हें ऐसा लगता है, हम समझते नहीं। हम सब समझते हैं। लेकिन, उससे क्या फ़ायद होगा! इसलिए, मौन रहना ही बेहत्तर लगता है और फ़िर वहाँ से चल देते हैं। ऐसी घटनाएं अनेकों बार तथा अक्सर एक डिलीवरी मैन के साथ होते रहते हैं। इसका परिणाम शरीर पर सीधे-सीधे पङता है। शरीर पर बोझ बढ़ जाता है, अनावश्यक बोझ बढ़ता चला जाता है। उस रिजेक्ट सामान को लेकर तब-तक चलते रहने पङते हैं, जब-तक और डिलीवरी न कर दें। इतना हीं नहीं, अन्य जिसे दूसरें ग्राहक को उनके सामान डिलीवर करने होतें है, उनके आईटम के साथ मिक्स मैच होता रहता है कि समस्या बाल की तरह बढ़ते चले जाते हैं। वो दृश्य देखने लायक होता है। वो रिजेक्ट सामान, उन ग्राहक के पास और उस समय निकल जाता है जब किसी दूसरे ग्राहक को उनके सामान देने के लिये निकालते हैँ। ग्राहक बङा प्यार से बोलते हैं- “ ये...

।।डिलीवरी मैन।। आपको ये महसूस नहीं होगा कि आप इतने उम्रदराज डिलीवरी मैन से मिल रहें है।

।। डिलीवरी  मैन।। संयम और सुझ-बूझ के साथ किया गया कार्य सफलता के मार्ग पर ले हीं चला जाता है। एक डिलीवरी मैन में ऐसे गुण होते हैं। जो कोई, डिलीवरी मैन का कार्य करते हैं, उनमें इन गुणों का होना ये सिद्ध करता है कि वह अपने काम के प्रति काफ़ी जागरूक व कर्मशिल हैं। आप जब भी एक अच्छे डिलीवरी मैन से मिलेंगे, तो उनमें ये सब आप देख सकते हैं। एक उम्र से चालिस-पचास के आस-पास के हैं। लेकिन, जब वह अपने कार्य पर निकलते हैं और लोगों से मिलते हैं, तो उनके काम को देखकर और उनसे मिलने के बाद आपको ये महसूस नहीं होगा कि आप इतने उम्रदराज डिलीवरी मैन से मिल रहें है। आपको ये भी एहसास नहीं होगा कि आप एक थके हुए इन्सान से मिले और उनसे समान लिया। उनका नाम लेना या उनके बारे में ज्यादा परिचय देने का मतलब ये हो जाता है कि उनके निजी ज़िंदगी में सेन्धमारी करना। वह शरीर से स्वस्थ दिखते है, लेकिन बीमार न पङने की गारंटी नहीं दिया जा सकता। जब भी उनको, मेरे घर पर कोई समान की डिलीवरी करना होता है, उनको मेरे पास आना होता है तो वह चले आते हैं। वह आते ही कहते हैं कि आपका समान जैसे ही ...

चुनावी वादा को जुमला बतानेवाले अमित शाह, चुनाव प्रचार-प्रसार करने शुरू की।

चुनावी वादा को जुमला बतानेवाले अमित शाह, चुनाव प्रचार-प्रसार करने शुरू की। गृहमंत्री अमित शाह इन-दिनों विधान सभा चुनाव #election को लेकर काफी व्यस्त हो चुके हैं। भरत के जिन राज्यों में चुनाव है, वहाँ अपना प्रचार-प्रसार भी करना शुरू कर दिये हैं। देश के चार राज्यों में चुनाव होने हैं। कुछ दिनों पूर्व राजस्थान का दौरा कर हे थे और अभी थोङे दिन पहले छत्तीसगढ #chhatisgarh पहुँचे थे। छत्तीसगढ में अमित शाह ने यहाँ की कांग्रेस सरकार के विरोध में ‘आरोप पत्र’ का अनावरण किया। इसके माध्यम से कांग्रेस की भूपेश बघेल #bhupeshbaghel की सरकार पर जोरदार प्रहार किये। इस आरोप पत्र के जऱिये छत्तीसगढ सरकार को लपेटे में लिया। इस सरकार पर अनेक आरोप लगाये। आपको मालूम हो छत्तीसगढ में कांग्रेस की सरकार है और इस सरकार ने छत्तीसगढ में विकास के काम बहुत की है। इनके विकास का प्रमाण इससे मिलता है कि छत्तीसगढ में बेरोज़गारी दर बहुत कम है, भारत के सभी राज्यों से बेरोज़गारी दर कम है। लोगों को रोज़गार देने में छत्तीसगढ भारत का सबसे बेहतर राज्य के रूप में जाना जाता है। विचार करनेवाली बात है कि अमितशाह की पार्ट...

महँगाई से राहता देने की साज़िश का शिकार हुए भारत के मतदाताओं।

महँगाई से राहता देने की साज़िश का शिकार हुए भारत के मतदाताओं। वर्तमान भारत की मोदी सरकार, जिस मुद्दा को लेकर सत्ता हासिल की उस मुद्दा का नाम हैः महँगाई और भ्रष्टाचार, जिनमें महँगाई एक प्रमुख मुद्दा था। आज हम उसी महँगाई पर चर्चा करेंगे, जिसको मुद्दा बनाकर मोदी चुनाव जीता। लेकिन, भारत के वो मतदाताओं, जिसने मोदी को महँगाई के नाम पर वोट किया, उनके लिए कितनी शर्म की बात होगी कि मोदी सरकार महँगाई को नियंत्रण करने के लिए कोई कदम तक नहीं उठाई। यदि मोदी सरकार महँगाई कम करने के लिए एक भी कदम उठाती, तो इनके मतदाताओं को चिंता करने को नहीं कहा जाता। यहाँ इस बात को भी साफ़ कर लेने की जरूरत ये है कि यदि मोदी सरकार महँगाई को नियंत्रण करने के लिए कदम उठाए, कठोर फैसले लिए हैं, तो वो क्या है, जिसे आजतक मोदी सरकार उसे जनता के बीच सार्वजनिक करना जरूरी नहीं समझी। उसे गुप्त रखना हीं बेहतर विकल्प समझी। दरअसल! गौर से देखा जाय, तो पता चलता है कि मोदी सरकार लोगों को महँगाई से राहत देने के लिए अभी-तक कोई ठोस कदम नहीं उठाई है। यदि मोदी सरकार महँगाई रोक-थाम के लिए कदम उठाने का काम करती, तो भारत के सभी वस्...

चार राज्यों में विधान सभा चुनाव और घरेलू गैस के दाम घटने को किस रूप में समझा जाय।

चार राज्यों में विधान सभा चुनाव और घरेलू गैस के दाम घटने को किस रूप में समझा जाय। एसे तो भारत में घरेलू गैस के दाम मुद्दा मोदी सरकार के लिए बहुत ही लक्की साबित हुआ है। इसके सहारे चुनाव जीत गए। और मोदी इसे फिर से हत्यार बनाते दिख रहे है। ऐसा लगता है, मोदी टीम फिर से घरेलू गैस को चुनावी मोहरा बना सकती है। सरकार के फैसला से ये कहा जा सकता है- घरेलू गैस के दाम के ज़रिये चुनाव लङा जा सकता है। मोदी टीम हाल हीं में घरेलू गैस के दाम में दो सौ रुपये घटाने कि घोषणा कर दी है। अब, लोग इसका फायदा भी उठाना शुरू कर दिये हैं। इसको लेकर मोदी महकमा भी देश में काफ़ी उत्तेजित माहौल बनाने में लग गए हैं। इसे रक्षाबंधन गिफ्ट के नाम से घोषणा किये हैं। ख़बर ये है कि मोदी सरकार इसे देश-भर में लागू की है। जबकि, विपक्ष नेताओं का कहना है कि हाल ही में भारत के चार राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं, इसलिए मोदी सरकार अचानक घरेलू गैस के दामों में गिरावट की है। छत्तिसगढ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्रकारों को कहा कि पिछले कुछ समयों में आपको याद होगा कि बीजेपी उपचुनाव में पीट गई थी, सभी चुनावी सीटे हार गई थी। ...