विजय (Thalapathy Vijay) का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय।AIADMK (47 सीटें) ने दिया संकेत।।

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विजय (Thalapathy Vijay) का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय।AIADMK (47 सीटें) ने दिया संकेत।।  2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणाम बेहद ऐतिहासिक रहे हैं। अभिनेता से नेता बने विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK) ने अपने पहले ही चुनाव में राज्य के पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के समीकरणों को बदलते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी जगह बनाई है। मौजूदा सत्ताधारी पार्टी DMK (59 सीटें) अपने सहयोगियों के साथ मिलकर भी बहुमत के आंकड़े से काफी दूर है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की हार और पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद DMK ने फिलहाल विपक्ष में बैठने के संकेत दिए हैं। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद राज्य में त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) की स्थिति बन गई है। विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई है, लेकिन सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 118 के जादुई आंकड़े से 10 सीटें पीछे रह गई है। 2021 के चुनाव में कांग्रेस (INC), DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के नेतृत्व वाले 'सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस' (SPA) का हिस्सा थी। इस गठबंधन में DMK ...

एक डिलीवरी मैन के लिए एक शब्द, आम शब्द होता है, जब वह अपने रणभूमि में होते हैं- सर/मैडम।



एक डिलीवरी मैन के लिए एक शब्द, आम शब्द होता है, जब वह अपने रणभूमि में होते हैं- सर/मैडम


डिलीवरी का काम सरल स्वभाव वाला काम नहीं है, कुछ लोग सामान लेने से अचानक सीधे-सीधे मना कर देते हैं। कहते हैः गलती से हो गया, नहीं लेना है, आदी बहाना लगा कर सामान नहीं लेते। उन्हें ऐसा लगता है, हम समझते नहीं। हम सब समझते हैं। लेकिन, उससे क्या फ़ायद होगा! इसलिए, मौन रहना ही बेहत्तर लगता है और फ़िर वहाँ से चल देते हैं।


ऐसी घटनाएं अनेकों बार तथा अक्सर एक डिलीवरी मैन के साथ होते रहते हैं। इसका परिणाम शरीर पर सीधे-सीधे पङता है। शरीर पर बोझ बढ़ जाता है, अनावश्यक बोझ बढ़ता चला जाता है। उस रिजेक्ट सामान को लेकर तब-तक चलते रहने पङते हैं, जब-तक और डिलीवरी न कर दें।


इतना हीं नहीं, अन्य जिसे दूसरें ग्राहक को उनके सामान डिलीवर करने होतें है, उनके आईटम के साथ मिक्स मैच होता रहता है कि समस्या बाल की तरह बढ़ते चले जाते हैं।


वो दृश्य देखने लायक होता है। वो रिजेक्ट सामान, उन ग्राहक के पास और उस समय निकल जाता है जब किसी दूसरे ग्राहक को उनके सामान देने के लिये निकालते हैँ। ग्राहक बङा प्यार से बोलते हैं- ये मेरा है क्या! नही-नहीं, ये आपका नहीं है।


इनके इस सवाल में दो बातें छिपी होती हैं। एक, जो ये पूछता है कि क्या ये मेरा ही सामान है कि किसी दूसरे का सामान है, जो मुझे दे रहें हैं। दूसरा, ये मेरा हीं सामान है, जिसे आप मुझे दे रहें हैं।


इस समय ग्राहक और डिलीवरी मैन के बीच बहुत ही उलझन पैदा हो जाता है। जबकी, ये कुछ नहीं होता। यह क्षणिक भर का होता है। ग्राहक हाथ मे अपना डिलीवरी लेते हीं नाम पता मिलाते हैं और उलझन छूमंतर हो जाता है।


फ़िर ग्राहक के नाम का डिलीवरी देते हैं। और वह अपने नाम के डिलीवरी को बहुत हीं गौर से और बारीकी से देखते हुए अपने घर को जाते हैं। ख़ास बात और रोमांच पैदा करनेवाली बात ये होती है कि वो ऐसे देखते हैं, जैसे ये उनके नाम का नहीं बल्कि इनके नाम का ही किसी दूसरे का डिलीवरी है।

 

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एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात का ख्याल अवश्य रखना चाहिए।