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पूर्व सेना प्रमुख की 'अप्रकाशित' किताब पर संसद में संग्राम: राहुल गांधी के दावों पर अमित शाह और स्पीकर की तीखी आपत्ति

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पूर्व सेना प्रमुख की 'अप्रकाशित' किताब पर संसद में संग्राम: राहुल गांधी के दावों पर अमित शाह और स्पीकर की तीखी आपत्ति। नई दिल्ली/पटना: संसद के बजट सत्र (2026) के दौरान लोकसभा में सोमवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की एक 'अप्रकाशित' किताब (Memoir) के अंशों का जिक्र किया। राहुल गांधी के इन दावों पर सत्ता पक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही में कई बार व्यवधान पड़ा। क्या है पूरा विवाद? राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए राहुल गांधी ने चीन सीमा विवाद और डोकलाम का मुद्दा उठाया। उन्होंने एक मैगजीन में छपे पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे के संस्मरणों (Four Stars of Destiny) के हवाले से सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल ने दावा किया कि किताब में चीनी सेना की घुसपैठ और उस पर सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर कुछ ऐसी बातें हैं जो देश के सामने आनी चाहिए। अमित शाह और राजनाथ सिंह का पलटवार जैसे ही राहुल गांधी ने किताब से पंक्तियाँ पढ़नी शुरू कीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ...

बजट 2026: कैंसर मरीजों को बड़ी राहत, युवाओं को रोजगार और बेटियों के लिए हर जिले में हॉस्टल

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बजट 2026: कैंसर मरीजों को बड़ी राहत, युवाओं को रोजगार और बेटियों के लिए हर जिले में हॉस्टल। नई दिल्ली | Nalanda5 News Desk वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026 भारत के विकास की नई इबारत लिखने वाला साबित हो रहा है। इस बजट में सरकार ने 'अंत्योदय' और 'विकसित भारत' के संकल्प को दोहराते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्रों में क्रांतिकारी घोषणाएं की हैं। बजट का मुख्य केंद्र आम आदमी की जेब को राहत देना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना रहा है। 1. कैंसर के इलाज में ऐतिहासिक राहत स्वास्थ्य क्षेत्र में इस साल का बजट कैंसर से जूझ रहे लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है। वित्त मंत्री ने कैंसर के उपचार में उपयोग होने वाली 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को पूरी तरह खत्म करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही हर जिला अस्पताल में 'डे केयर कैंसर सेंटर' स्थापित करने की योजना भी शुरू की जा रही है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा। 2. बेटियों के लिए 'हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल' शिक्षा के क्षेत...

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर: अजित पवार के निधन के बाद पत्नी सुनेत्रा पवार बनीं डिप्टी सीएम, भाजपा का बड़ा दांव।

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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर: अजित पवार के निधन के बाद पत्नी सुनेत्रा पवार बनीं डिप्टी सीएम, भाजपा का बड़ा दांव। मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और दुखद खबर सामने आ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिग्गज नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का एक दुखद विमान हादसे (Plane Crash) में आकस्मिक निधन हो गया है। इस घटना ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ दी है। इस भीषण त्रासदी के बीच, राज्य की महायुति सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय लिया है। अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाने और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र का नया उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है। भीषण विमान हादसा: अजित पवार का दुखद अंत प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, अजित पवार एक आधिकारिक दौरे पर थे जब उनका निजी विमान तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में किसी के बचने की उम्मीद नहीं थी और बचाव दल ने उनके निधन की पुष्टि की। अजित पवार को उनकी बेबाकी और कुशल प्रशासन के लिए ज...

IND vs NZ: तिरुवनंतपुरम में भारत का ऐतिहासिक शंखनाद, इशान किशन के तूफानी शतक से न्यूजीलैंड पस्त

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IND vs NZ: तिरुवनंतपुरम में भारत का ऐतिहासिक शंखनाद, इशान किशन के तूफानी शतक से न्यूजीलैंड पस्त। तिरुवनंतपुरम: टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई टी20 सीरीज को 4-1 से जीतकर इतिहास रच दिया है। सीरीज के आखिरी और निर्णायक मुकाबले में भारत ने कीवी टीम को चारों खाने चित कर दिया। इस जीत के सबसे बड़े नायक रहे युवा विकेटकीपर बल्लेबाज इशान किशन , जिन्होंने अपने बल्ले से रनों की ऐसी आग उगली कि न्यूजीलैंड का गेंदबाजी आक्रमण पूरी तरह बिखर गया। इशान किशन का रिकॉर्ड-तोड़ शतक इस मैच की सबसे बड़ी हाईलाइट इशान किशन की बल्लेबाजी रही। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट के सबसे बड़े स्कोर में से एक को छूते हुए शानदार शतक जड़ा। इशान की इस पारी ने न केवल भारत को विशाल स्कोर तक पहुँचाया, बल्कि विरोधी टीम का मनोबल भी तोड़ दिया। उनकी इस विस्फोटक पारी के लिए उन्हें 'मैन ऑफ द मैच' के पुरस्कार से नवाजा गया। सूर्या की कप्तानी का जलवा: बने 'मैन ऑफ द सीरीज' भारतीय टीम की इस सफलता के पीछे कप्तान सूर्यकुमार यादव (SKY) की चतुर कप्तानी का बड़ा हाथ रहा। सूर्या ने पूरी सीरीज में न केवल बेहतरीन...

UGC के नए ड्राफ्ट पर मचा घमासान: क्या सामान्य वर्ग के साथ होगा न्याय? निशिकांत दुबे ने दिया बड़ा आश्वासन

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UGC के नए ड्राफ्ट पर मचा घमासान: क्या सामान्य वर्ग के साथ होगा न्याय? निशिकांत दुबे ने दिया बड़ा आश्वासन नई दिल्ली/पटना: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के भर्ती संबंधी नए दिशा-निर्देशों (Draft Guidelines) को लेकर देश के सामान्य वर्ग के शिक्षित युवाओं और राजनीति के गलियारों में बहस तेज हो गई है। जहाँ एक ओर सोशल मीडिया पर इसे लेकर नाराजगी जताई जा रही है, वहीं केंद्र सरकार और भाजपा सांसदों की ओर से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। विवाद की जड़ क्या है? हाल ही में UGC ने उच्च शिक्षा संस्थानों में फैकल्टी की भर्ती और आरक्षण को लेकर एक नया ड्राफ्ट जारी किया था। इस ड्राफ्ट के कुछ प्रावधानों को लेकर सामान्य वर्ग (General Category) के अभ्यर्थियों में यह डर पैदा हो गया कि इससे उनके हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विवाद बढ़ता देख अब सरकार के करीबियों और सांसदों ने मोर्चा संभाला है। सांसद निशिकांत दुबे का बड़ा बयान: 'पीएम मोदी पर रखें भरोसा' इस पूरे मुद्दे पर भाजपा के दिग्गज सांसद निशिकांत दुबे ने अपनी बात रखी है। उन्होंने सामान्य वर्ग के युवाओं को आश्वस्त करते हुए कहा ...

UGC Bill 2026 पर कोर्ट का स्टे: सामान्य वर्ग को मिली राहत या लोकतंत्र की गरिमा पर प्रहार?

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UGC Bill 2026 पर कोर्ट का स्टे: सामान्य वर्ग को मिली राहत या लोकतंत्र की गरिमा पर प्रहार? नई दिल्ली | [30जनवरी] देश की शिक्षा व्यवस्था और आरक्षण नीतियों को लेकर छिड़ी बहस के बीच एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। हाल ही में प्रस्तावित UGC बिल 2026 पर कोर्ट ने स्टे (Stay Order) लगा दिया है। कोर्ट के इस फैसले को जहाँ सामान्य वर्ग अपनी बड़ी जीत मान रहा है, वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के एक वर्ग ने इसे लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत बताया है। क्या है पूरा मामला? UGC बिल 2026, जिसे सरकार उच्च शिक्षा में व्यापक सुधार और समानता के उद्देश्य से लाई थी, शुरुआत से ही विवादों के केंद्र में रहा है। इस बिल के प्रावधानों के खिलाफ सामान्य वर्ग के संगठनों ने मोर्चा खोल दिया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह बिल उनके संवैधानिक हितों को प्रभावित करता है। लंबी सुनवाई के बाद, कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस पर रोक लगाने का निर्णय लिया। विरोध के दौरान मर्यादाएं तार-तार इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दुखद पहलू विरोध प्रदर्शनों के दौरान देखने को मिला। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनों के बीच कुछ असामाजिक तत...