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इटावा में आकार ले रहा 'मिनी केदारनाथ': अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट बना चर्चा का विषय |

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इटावा में आकार ले रहा 'मिनी केदारनाथ': अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट बना चर्चा का विषय, जानें क्या है खास इटावा/सैफई: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इन दिनों अपने एक भव्य प्रोजेक्ट को लेकर सुर्खियों में हैं। उनके गृह जनपद इटावा के सैफई पार्क के सामने भगवान शिव का एक विशाल मंदिर बन रहा है, जिसे इसकी बनावट और भव्यता के कारण 'मिनी केदारनाथ' कहा जा रहा है। केदारनाथ धाम की तर्ज पर निर्माण इस मंदिर का आधिकारिक नाम 'केदारेश्वर महादेव मंदिर' रखा गया है। मंदिर का डिजाइन काफी हद तक उत्तराखंड के केदारनाथ धाम से प्रेरित है। करीब 11 एकड़ से अधिक भूमि पर बन रहे इस मंदिर में सफेद पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जिन पर बेहद बारीक नक्काशी की गई है। इस मंदिर का निर्माण अखिलेश यादव की अध्यक्षता वाला एक ट्रस्ट करवा रहा है। लेख की मुख्य विशेषताएं: नेपाल से आई देवशिला: मंदिर में स्थापित करने के लिए नेपाल की गंडकी नदी (पोखरा) से विशेष 'शालिग्राम शिला' लाई गई है। यह वही शिला है जिसका पूजन अखिलेश यादव ने सपरिवार किया था। प्राचीन...

1000 साल बाद फिर क्यों चर्चा में है भारत का पहला ज्योतिर्लिंग?-सोमनाथ मंदिर |

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सोमनाथ मंदिर: 1000 साल बाद फिर क्यों चर्चा में है भारत का पहला ज्योतिर्लिंग? नई दिल्ली/वेरावल (गुजरात): भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक, सोमनाथ मंदिर एक बार फिर पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। साल 2026 सोमनाथ के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज हो रहा है। आखिर क्या है 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' और क्यों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर आम जनता तक की नजरें आज इस पावन धाम पर टिकी हैं? आइए जानते हैं N5Bharat की इस विशेष रिपोर्ट में। 1. 1000 साल का इतिहास: विध्वंस पर आस्था की विजय वर्तमान में सोमनाथ मंदिर के चर्चा में होने का सबसे बड़ा कारण इसकी ऐतिहासिक यात्रा के 1000 वर्ष पूरे होना है। इतिहासकारों के अनुसार, जनवरी 1026 में विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर भीषण हमला कर इसे क्षतिग्रस्त किया था। आज 2026 में, उस आक्रमण के एक सहस्राब्दी (1000 साल) बाद, भारत इस अवसर को 'शोक' के रूप में नहीं, बल्कि अपनी अटूट श्रद्धा और पुनरुत्थान के 'स्वाभिमान पर्व' के रूप में मना रहा है। 2. प्रधानमंत्री मोदी का दौरा और ...

बिहार के विराट रामायण मंदिर में स्थापित होगा विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग

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बिहार के विराट रामायण मंदिर में स्थापित होगा विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग: 17 जनवरी को महाभिषेक पूर्वी चंपारण, बिहार: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड स्थित कैथवलिया में बन रहा 'विराट रामायण मंदिर' जल्द ही एक नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम करने जा रहा है। यहाँ दुनिया के सबसे विशाल शिवलिंग की स्थापना की तैयारी पूरी हो चुकी है। यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से लगभग 2500 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर बिहार पहुँच चुका है। शिवलिंग की मुख्य विशेषताएँ यह शिवलिंग अपनी भव्यता और वजन के कारण पूरी दुनिया में अद्वितीय है: ऊंचाई और आकार: शिवलिंग की कुल ऊंचाई 33 फीट और इसकी परिधि (गोलाई) भी 33 फीट है। वजन: इसका कुल वजन 210 मीट्रिक टन (2.10 लाख किलो) है। निर्माण: इसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम में एक ही विशाल काले ग्रेनाइट पत्थर (Monolithic Black Granite) को तराश कर बनाया गया है। इसे तैयार करने में कारीगरों को लगभग 10 साल का समय लगा। सहस्रलिंगम: इस मुख्य शिवलिंग की सतह पर 1000 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं, जिसे शास्त्रों में 'सहस्रलिंगम' कहा जाता है। स्थापना और धार्...

केदारनाथ में कुदरत का सफेद पहरा: क्या समय पर शुरू हो पाएगी 2026 की यात्रा?

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केदारनाथ में कुदरत का सफेद पहरा: क्या समय पर शुरू हो पाएगी 2026 की यात्रा? रुद्रप्रयाग/देहरादून: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में नए साल के आगाज के साथ ही मौसम ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ का धाम इस समय कई फीट गहरी बर्फ की सफेद चादर में लिपटा हुआ है। पिछले चार दिनों से लगातार हो रही बर्फबारी ने जहाँ पूरी केदारपुरी को चांदी जैसा चमका दिया है, वहीं आगामी 'चारधाम यात्रा 2026' के समय पर शुरू होने को लेकर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। पुनर्निर्माण कार्य ठप, मजदूरों का पलायन शुरू केदारनाथ धाम में वर्तमान में 'मास्टर प्लान' के तहत युद्धस्तर पर निर्माण कार्य चल रहे थे। प्रशासन का लक्ष्य था कि यात्रा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं तैयार कर ली जाएं। लेकिन भारी बर्फबारी और शून्य से कई डिग्री नीचे गिरे तापमान के कारण: मशीनें थमी: भारी बर्फ के कारण कंस्ट्रक्शन मशीनें और निर्माण सामग्री बर्फ में दब गई हैं। कामकाज बंद: वुड स्टोन और अन्य कार्यदायी संस्थाओं ने फिलहाल काम रोक दिया है। मजदूरों की वापसी: ...

‘हर-हर गंगे’ के उद्घोष के साथ प्रयागराज में 'माघ मेला' 2026 का हुआ शंखनाद- प्रयागराज उत्तर प्रदेश। "

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‘हर-हर गंगे’ के उद्घोष के साथ प्रयागराज में 'माघ मेला' 2026 का हुआ शंखनाद- प्रयागराज उत्तर प्रदेश। " प्रयागराज | 3 जनवरी 2026| प्रयागराज में ‘हर-हर गंगे’ के उद्घोष के साथ माघ मेला 2026 शुरू हो गया है। शिवरात्री तक चलने वाला ‘माघ मेला’ की उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन ने लाखों-लाख श्रद्धालुओं की पूरी तैयारी कर ली है। आज तीन जनवरी पहला स्नान पौष पूर्णिमा पर लाखों श्रद्घालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी। तीर्थराज प्रयाग में आज पौष पूर्णिमा के साथ ही डेढ़ महीने तक चलने वाले वार्षिक माघ मेले का भव्य शुभारंभ हो गया है। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद, संगम तट पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा है। ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। आज सुबह 4 बजे से ही संगम के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मेला प्रशासन के अनुमान के मुताबिक, दोपहर तक करीब 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं के स्नान करने की संभावना है। घाटों पर सुरक्षा और सुविधा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि कड़ाके की ठंड में भी श्रद्धालु सुगमता से स्नान कर सकें। पौ...