1000 साल बाद फिर क्यों चर्चा में है भारत का पहला ज्योतिर्लिंग?-सोमनाथ मंदिर |
सोमनाथ मंदिर: 1000 साल बाद फिर क्यों चर्चा में है भारत का पहला ज्योतिर्लिंग?
नई दिल्ली/वेरावल (गुजरात): भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक, सोमनाथ मंदिर एक बार फिर पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। साल 2026 सोमनाथ के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज हो रहा है। आखिर क्या है 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' और क्यों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर आम जनता तक की नजरें आज इस पावन धाम पर टिकी हैं? आइए जानते हैं N5Bharat की इस विशेष रिपोर्ट में।
1. 1000 साल का इतिहास: विध्वंस पर आस्था की विजय
वर्तमान में सोमनाथ मंदिर के चर्चा में होने का सबसे बड़ा कारण इसकी ऐतिहासिक यात्रा के 1000 वर्ष पूरे होना है। इतिहासकारों के अनुसार, जनवरी 1026 में विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर भीषण हमला कर इसे क्षतिग्रस्त किया था। आज 2026 में, उस आक्रमण के एक सहस्राब्दी (1000 साल) बाद, भारत इस अवसर को 'शोक' के रूप में नहीं, बल्कि अपनी अटूट श्रद्धा और पुनरुत्थान के 'स्वाभिमान पर्व' के रूप में मना रहा है।
2. प्रधानमंत्री मोदी का दौरा और 'शौर्य यात्रा'
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर का दौरा किया और इस विशेष उत्सव में भाग लिया। पीएम मोदी ने सोमनाथ को 'भारत की सभ्यतागत चेतना' का केंद्र बताते हुए कहा कि सोमनाथ का बार-बार पुनर्निर्माण इस बात का प्रमाण है कि 'विनाश की शक्ति कभी सृजन की शक्ति से बड़ी नहीं हो सकती।' इस अवसर पर 108 घोड़ों के साथ निकाली गई 'शौर्य यात्रा' ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
3. अतिक्रमण हटाओ अभियान और कानूनी विवाद
आध्यात्मिक उत्सवों के अलावा, सोमनाथ हाल के दिनों में अपने आसपास के क्षेत्र में हुए 'डिमोलिशन ड्राइव' (अतिक्रमण हटाओ अभियान) के कारण भी सुर्खियों में रहा है।
बुलडोजर कार्रवाई: प्रशासन ने मंदिर के आसपास की लगभग 15 हेक्टेयर सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख: इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने तत्काल यथास्थिति (Status Quo) बहाल करने से इनकार कर दिया, जिससे प्रशासन की कार्रवाई को मजबूती मिली।
4. आधुनिक सोमनाथ: विकास के नए आयाम
सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में मंदिर का कायाकल्प हुआ है। मंदिर में अब:
अबाधित समुद्र मार्ग (Tirth Stambh): जो बताता है कि सोमनाथ से दक्षिणी ध्रुव तक जल मार्ग में कोई बाधा नहीं है।
स्वर्ण कलश: मंदिर के 1,400 से अधिक कलशों को स्वर्ण जड़ित करने का कार्य भी चर्चा में है।
पर्यटन: सालाना 90 लाख से अधिक श्रद्धालु यहाँ पहुँच रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।
N5Bharat का विश्लेषण: सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास के संघर्ष और विजय की गाथा है। 1026 के विध्वंस से लेकर 2026 के 'स्वाभिमान पर्व' तक की यह यात्रा भारत के 'आत्मनिर्भर' और 'सांस्कृतिक गौरव' का प्रतिबिंब है।
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