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महिला आरक्षण बिल एक चुनावी जुमला-सुप्रिया श्रीनेत कांग्रेस सीनियर लीडर।।


महिला आरक्षण बिल एक चुनावी जुमला-सुप्रिया श्रीनेत कांग्रेस सीनियर लीडर।।

महिला आरक्षण बिल-2023 लागू कर दिया गया है। मोदी सरकार इसे भारी बहुमत से लागू कर दी। विपक्ष के एक भी नेताओं के द्वारा इस बिल का विरोध नहीं किया गया। सभी दल के लोगों ने इस बिल को तहे-दिल से स्वागत किया। विशेषकर कांग्रेस इस बिल को लेकर काफी उत्साहित दिखी।


मोदी सरकार महिला आरक्षण बिल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 के नाम से संसद में पास की है। इस अधिनियम को मोदी सरकार विशेष सत्र बुलाकर पास की है। किसी को इसकी ख़बर नहीं दी गई थी। सरकार द्वारा अचानक महिलाओं के लिए तोहफा दे दिया गया कि घोषणा कर दी गई।


मोदी सरकार महिला आरक्षण बिल पास कर दी और इस बिल को विपक्षी दलों ने भी दिल खोलकर समर्थन किये, लेकिन ये मोदी सरकार एक चालाकी कर दी। दूसरे शब्दों में मोदी के भाषा में कहें तो महिलाओं के साथ मोदी सरकार छल कर दी है। एक तरह से धोख-धङी करना भी नाम दिया जा सकता है, इसे।


कांग्रेस सीनियर लीडर सुप्रिया श्रीनेत महिला आरक्षण बिल को ‘जुमला’ शब्द से संबोधित कीं है। उनका कहना है कि यह जो मोदी सरकार बिल पास कि वह चुनावी जुमला है। मोदी ऐसे जुमला चुनाव के समय खुब फेंकते हैं। जब चुनाव रहता है तो मोदी अक्सर चुनावी जुमला फेंकते है।


दरअसल, मोदी सरकार जो महिला आरक्षण बिल लेकर आई है, उसमें एक शर्त लगा दिया गया है। शर्त ये है कि ये बिल तबतक लागू नहीं होंगे जबतक देश में जनगणना नहीं हो जाते। और जनगणना कांग्रेस के समय हुई थी, वहीं अभी तक है। वर्ष 2021 जनगणना कराने का समय था, जिसे मोदी सरकार नहीं करायी। अब 2024 में लोकसभा चुनाव होने है, लेकिन जनगणना के असार नहीं है। इस तर्क से वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण बिल लागू नहीं होंगे।


जब महिला आरक्षण बिल को लागू करने नहीं थे, तो इस बिल का पास करने का मतलब यहीं होता है कि चुनाव नज़दिक है इसलिए महिला आरक्षण बिल को सिर्फ पास कर दिया गया और लागू नहीं किया गया। दिस इज मोदी स्टाईल।महिला आरक्षण बिल एक चुनावी जुमला-सुप्रिया श्रीनेत || कांग्रेस ||

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