बहुत कुछ सोचना पड़ता है, क्योंकि हम बेटी की बाप हैं। ऐसे कैसे मुकदमा में फंस जाय, मेरी बेटी पर बदनामी का धब्बा लग जाएगा तो। इससे शादी भला कौन करेगा ? बेटी को कोर्ट में हज़ारों बार जाना पड़ेगा, दरोगा कई बार सवाल करेगा, समाज कहेगा कि जरुर लड़की में हीं गलती होगी तब न ऐसे हुआ। छोरा, दुसरों के साथ काहे न कुछ किया। पुलिस गवाह खोजेगा कौन गवाह देगा ? इतना आसान नहीं है, मुझमे इतना हिम्मत नहीं कि आगे की लड़ाई लड़ सकूं। हमें बख्श दो! हमें कोर्ट-कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ना है, अब जो हुआ सो हुआ ये अभागी के किस्मत में यहीं लिखा था। लेकिन, हम सब तुम्हारे साथ हैं। तुमको डरने की जरूरत नहीं है। रात में जिस समय तुम्हारे बेटी के बाल पकड़कर छोरा लेकर भाग रहा था, उस समय गांव वाला नहीं दौड़ता, हल्ला नहीं करता तो छोरा तुम्हारे बेटी को लेकर भाग गया होता। आज तुम किसी का चेहरा दिखाने लायक नहीं होते और सब यहीं कहता कि तुम्हारी बेटी अपने मन से दो बच्चे का बाप के साथ भाग गई। हम सब गांव वाले मिलकर तेरे लिए, छोरा के परिवार वालों से पंगा लिया। यदि छोरा, उल्टा हम सब पर हीं मुकदमा कर दिया तो क्या होगा ? जरा सोचो! हम सब ही...