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पुलिसिया शिकंजा।

बहुत कुछ सोचना पड़ता है, क्योंकि हम बेटी की बाप हैं। ऐसे कैसे मुकदमा में फंस जाय, मेरी बेटी पर बदनामी का धब्बा लग जाएगा तो। इससे शादी भला कौन करेगा ? बेटी को कोर्ट में हज़ारों बार जाना पड़ेगा, दरोगा कई बार सवाल करेगा, समाज कहेगा कि जरुर लड़की में हीं गलती होगी तब न ऐसे हुआ। छोरा, दुसरों के साथ काहे न कुछ किया। पुलिस गवाह खोजेगा कौन गवाह देगा ? इतना आसान नहीं है, मुझमे इतना हिम्मत नहीं कि आगे की लड़ाई लड़ सकूं। हमें बख्श दो! हमें कोर्ट-कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ना है, अब जो हुआ सो हुआ ये अभागी के किस्मत में यहीं लिखा था।

लेकिन, हम सब तुम्हारे साथ हैं। तुमको डरने की जरूरत नहीं है। रात में जिस समय तुम्हारे बेटी के बाल पकड़कर छोरा लेकर भाग रहा था, उस समय गांव वाला नहीं दौड़ता, हल्ला नहीं करता तो छोरा तुम्हारे बेटी को लेकर भाग गया होता। आज तुम किसी का चेहरा दिखाने लायक नहीं होते और सब यहीं कहता कि तुम्हारी बेटी अपने मन से दो बच्चे का बाप के साथ भाग गई। हम सब गांव वाले मिलकर तेरे लिए, छोरा के परिवार वालों से पंगा लिया। यदि छोरा, उल्टा हम सब पर हीं मुकदमा कर दिया तो क्या होगा ? जरा सोचो! हम सब हीं फंस जाओगे। गांव के इज्जत का सवाल है, केस करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है हमारे पास।

तुमको पता है! हमारे मुख्यमंत्री का कहना है कि बिहार के कोई अपराधी को बख्शा नहीं जायेगा, बिहार के प्रशासन अब बहुत हीं मजबूत हो चुका है, पहले जैसी बात नहीं है। उसमें भी, मुख्यमंत्री के गृह जिला के हमलोग निवासी हैं। अरे, हम सब को न्याय नहीं मिलेगा तो किसको न्याय मिलेगा? यहाँ सुशासन का राज्य चल रहा है कुशासन का नहीं जो चिंता करते हो। महिलाओं के लिए तो विशेष कानून भी बनाया गया है, चौबीस घंटा के अन्दर छोरा को जेल जाना पड़ेगा, नालंदा पुलिस उसको छोड़ने वाला नहीं है।

हाँ, कानून हीं कुछ कर सकता है। अब, हम-आप कुछ भी नहीं कर सकते। कानून पर भरोसा रखना होगा इसके अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है। यदि हमलोग कानून को हाथ में लेकर छोरा के साथ मार-पिट करते हैं तो क्या हमसब को कानून छोड़ देगा? नहीं, उल्टे हमलोग हीं फंस जाओगे।

अब सब इतना कह रहे हो तो चलो थाना चलते हैं और क्या? लेकिन एक बात! यह बात पेपर में नहीं छपना चाहिए, नहीं तो हमारी बिटिया का बहुत बदनामी होगी। हमारे समाज में इससे कोई शादी नहीं करेगा। पेपर में छपने से दुनिया जान जायेगा, किसी को चेहरा दिखाने लायक नहीं रहेंगें हम। बिटिया इस बदनामी का डंस झेल नहीं पायेगी, अभी छोटी है। उसको समाज का ताना झेलने का उम्र हीं कहाँ हुआ है, वह जिन्दा नहीं रहेगी।

आख़िरकार गांव वालों के सहयोग से भुनिया को उसके बाप ने थाना दर्शन करा हीं दिया। दरोगा ज़ी कई सवाल पूछे और उससे लिखत भी लिया। पढ़ाई कराने का फायदा उसको बाप को दिखा कि यदि भुनिया को नहीं पढ़ता तो वह आज अपनी लड़ाई नहीं लड़ती। जो भी उसके साथ उस लड़का ने कुकर्म करने का प्रयास किया वो सब लिख दी, भाषा तथा शब्दों की गलतियाँ होना लाजमी था, क्योंकि बेटी बिहार बोर्ड से पढ़ी थी जिस बोर्ड के बारे में भला कौन नहीं जनता की पढ़ाई कैसी होती है।खैर मनाइये कि उस गलतियाँ को दरोगा ज़ी के चमचों नें सुधार कर लिया लेकिन कानून से कितना इन्साफ मिलेगा या कैसा इन्साफ मिलेगा और कबतक इन्साफ मिलेगा महीनों बीत चुके हैं अभी तक कुकर्मी नौजवान कानून के गिरफ्त में नहीं आया है इससे धीरे-धीरे लोग अनुमान लगाने लगे हैं पांच लोगों के बिच इसकी चर्चा भी होने लगी है।

मामला एक लड़की का था इसलिए वेरिफिकेशन के लिए डीएसपी साहब स्वयं गांव पहुंचे और लोगों से इसकी तहकीकात करनी शुरू की। गांव के लोग अपने साथी संगती के साथ तुरंत जमा हो गए और डीएसपी साहब को घेर लिया। कुछ लोग दूर रहकर हीं जमा हो लिए। भीड़ को देख प्रशासन को जांचने में ज्यादा सन्देह करने का मौका नहीं मिला और बात तो सोलह आना सच था। इसमें तो पुलिस को करवाई जल्द से जल्द करनी चाहिए, लड़का को जेल भेजना चाहिए तो अभी जाँच हीं चल रहा है। इसमें भी पुलिस को सक है, पूरा गांव थाना गया था फ़िर भी यह नौवत आन पड़ी है क्या समय आ गया है कहते हैं प्रशासन का राज्य चलता है आज गांव वालों ने देख लिया। गांववालों को डीएसपी साहब का रवैया हजम नहीं हुआ, गांव के कानून के जानकर लोग गुस्से से अपना खून जलाकर रह गए। लेकिन कानून को तो सबूत और गवाह चाहिए इसके बगैर कानून एक सड़ी बांस की छड़ी के बराबर नहीं है, फ़िर न्याय कैसे कर सकती है। हाँ किसी नेता की बेटी के साथ यह घटना घटित होती तो अभीतक छोरा हवालात में कैद होता। यह सब जानते हुए भी गांव के लोग चर्चा करते नहीं थकते कि छोरा को पुलिस क्यों नहीं पकड़ रही है। दुनिया के किसी भी कोना में छुपा क्यों न हो पुलिस उसको दबोच हीं लेगी। गांव के लोगों के बिच हुए बहस को सुनकर डीएसपी साहब अपनी नौकरी की ज़िम्मेदारी को पूरा करके चल दिए।

अभी पन्द्र्हिया हीं लगा होगा कि डीएसपी साहब का फ़रमान गांव वालों के पास पहुंचा, वह गवाहों को बुलावा भेजा है। इतना सुनते हीं भुनिया कुमारी के बाप गांव के चुनिंदे लोगों का हाथ पैर पकड़ना शुरू कर दिया। डीएसपी का बुलावा था यह थाना थोड़े था कि लोग चल देते। अब सब अपना-अपना दिमाग चलाने लगे। किसी ने कहा कि पुलिस को गिरफ्तार करना चाहिए तो गवाह ख़ोज रही है। हम सब कोर्ट में जाकर गवाह देंगें अभी किसी तरह से काम चलाओ। हम तो चलने के लिए तैयार लेकिन अकेले नहीं जा सकते गांव के सभी लोग चलेगा तो हम चलेगें अकेले हिम्मत नहीं है। कुछ लोग ने यहाँ तक अपनी जानकरी का पिटारा खोला कि छोरा को उसके गांव वाला मदद कर रहा है और उस गांव का पांच सौ वोट है, उन लोग वोट की ताकत से एक नेता को पटा लिया है वहीं नेता के पैरवी से डीएसपी गवाह ख़ोज रहा है वहाँ जाने पर डीएसपी कुछ भी कर सकता है।

भुनिया के बाप पूरा गांव छान मारा लेकिन कोई भी जाने को तैयार नहीं हुआ, आख़िर बिना गवाह के कोर्ट का मुकदमा वह कैसे लड़ता ? 

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