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Showing posts from April, 2021

बाबा रामदेव ने भारत के पढेलिखे युवाओं, जनता और टीवी जगत के दिग्गज पत्रका...

अब इस बात से इनकार नहीं कर सकते या हमे इससे अपना मुहँ नहीं फेरना चाहिए कि भारत ऐसा देश बन चुका है जहाँ बाबाओं को लोग बहुत पसंद करते हैं , इनके बात को बड़े चाब से चबा-चबा कर हजम करते हैं इसलिए यहाँ बाबाओं के पास भीड़ लगी होती है। साधुसंत जैसे सोच या विचार प्रकट करनेवाले महाशयों को भी भारत के लोग दिलों जान से चाहते हैं। इन्हें अपने घरों में स्थान देने में भी नहीं हिचकते। जबकि , यदि एक ईमानदार व्यक्ति कितनों समझा दे कि आपके लिए ये ठीक रहेगा फ़िर भी इसकी बात नहीं मानते हैं और जब एक बाबा वहीँ बात कह दे तो लोगों पहले बाबा के बातों को जल्द हीं समझ में आ जाता है। खास बात यह है कि भारत के लोग उनके बात में आ जाते हैं और उनके भाषणों पर तालियां बजाते है जो बहुत कम पढ़े होते हैं। आपको विश्वास नहीं हो रहा होगा , आप सबूत मांग रहें होंगें तो लीजिये पेश है । वर्ष 2013-14 का समय तो याद होगा! भारत के इस दौर को हमेशा याद किया जायेगा और बड़े हीं सिद्दत के साथ याद किया जायेगा। क्योंकि , भारत का यहीं वो समय था जिसमें बाबाओं के बात पर भारत के लोगों ने कथक किया और एक कम पढ़े वैसा व्यक्ति जिसने अपने पत्नी , माँ-बाप...

दो हजार के नोटों का दर्शन हुआ दुर्लभ आब तो एटीम भी हमें इस नोट को देने ...

देखिये! आप मुझसे नाराज मत होइएगा ,  हम भी आपके जैसे हैं जनाब। देशभक्त हैं । आप चाहे तो हमारी परीक्षा ले सकते हैं ,  लेकिन एक बात का ख्याल रखियेगा कि हम हनुमान और राम को नहीं मानते हैं। हम भागवत गीता का पाठ पढ़ाने वाले श्री कृष्ण को मानते हैं। इसलिए आप    हमसे हनुमान जैसे सीना चीर कर दिखाने की उम्मीद मत कीजियेगा। हाँ ,  इतना हमसे उम्मीद तो कर हीं सकते हैं कि हम अपने भूमि के लिए जान तक दे सकते हैं ,  वो ऐसे    जिस प्रकार से एक सिपाही अपने वतन की रक्षा करने में अपनेआप को समर्पित कर देता है वैसे हीं हमसे उम्मीद कर सकते हैं। तो हमारे साथ बोलिए ,  भारत माता की जय !   असली मुद्दा पर लौटने का वक्त आ गया है। करीब छह महीना से जब भी एटीएम में जाता हूँ ,  पैसा निकलता हूँ और एटीम से पैसा निकलता है लेकिन हमे तो सिर्फ पांच सौ के नोट हीं मिलते हैं। बहुत दिनों से दो हजार के नोट हमे नहीं मिल रहा है। इस नोट को सिर्फ आर्थिक समाचार पत्रों के पन्नो पर हीं देखता हूँ। इतना हीं नहीं ,  आपको यह भी बता देना चाहता हूँ कि मेरा असली काम ये लिखने का नहीं है...

रामधारी सिंह दिनकर के द्वारा लिखी गई कविता "जनतंत्र का जन्म" याद आ गई तो...

भारत के किसान लगभग चार महीनों से दिल्ली के पास आंदोलन कर रहें हैं। दिल्ली के कड़ाके की ठण्ड से शुरुआत हुआ आंदोलन आज उतरी भारत के तपती जून और बॉडी को झुलस कर रख देनेवाली गर्मी तक आ पहुंचा है। इतना होने के बाद भी भारत सरकार को किसानों के हालात समझ में नहीं आ रही है। किसानों के मांग को आज तक सुना नहीं गया। मनमोहनसिंह जब भारत के प्रधानमंत्री तब देश के लोगों के लिए उपवास रखकर आंदोलन करनेवाले अन्ना हजारे भी किसानों को धोखा दे गए। ये जनाब बोले थे कि यदि मोदी सरकार जनवरी तक किसानों की बात नहीं मानती है तो हम किसानों के समर्थन में अपने जीवन का आखरी भूख हडताल पर बैठेंगें। लेकिन , जैसे हीं जनवरी और फरवरी भी आया तो अन्ना हजारे मोदी के बड़े नेता के साथ बैठकर पत्रकारों को बताये कि अब हम किसानों के समर्थन में भूख हड़ताल पर नहीं बैठेंगें!   https://youtu.be/cQzLXWh9MDI आप सोच रहे होंगें कि इस घटना पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखित कविता का कविता पाठ करने का मतलब क्या है ? मैं भी इन्सान हूँ जनाब और देशभक्त भी। इतना हीं नहीं , भारतमाता के नारे रोज सुबह-सुबह लगाता हूँ इसलिए अपने दर्द को बत...