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दो हजार के नोटों का दर्शन हुआ दुर्लभ आब तो एटीम भी हमें इस नोट को देने ...



देखिये! आप मुझसे नाराज मत होइएगाहम भी आपके जैसे हैं जनाब। देशभक्त हैं । आप चाहे तो हमारी परीक्षा ले सकते हैंलेकिन एक बात का ख्याल रखियेगा कि हम हनुमान और राम को नहीं मानते हैं। हम भागवत गीता का पाठ पढ़ाने वाले श्री कृष्ण को मानते हैं। इसलिए आप  हमसे हनुमान जैसे सीना चीर कर दिखाने की उम्मीद मत कीजियेगा। हाँइतना हमसे उम्मीद तो कर हीं सकते हैं कि हम अपने भूमि के लिए जान तक दे सकते हैंवो ऐसे  जिस प्रकार से एक सिपाही अपने वतन की रक्षा करने में अपनेआप को समर्पित कर देता है वैसे हीं हमसे उम्मीद कर सकते हैं। तो हमारे साथ बोलिएभारत माता की जय ! 

असली मुद्दा पर लौटने का वक्त आ गया है। करीब छह महीना से जब भी एटीएम में जाता हूँपैसा निकलता हूँ और एटीम से पैसा निकलता है लेकिन हमे तो सिर्फ पांच सौ के नोट हीं मिलते हैं। बहुत दिनों से दो हजार के नोट हमे नहीं मिल रहा है। इस नोट को सिर्फ आर्थिक समाचार पत्रों के पन्नो पर हीं देखता हूँ। इतना हीं नहींआपको यह भी बता देना चाहता हूँ कि मेरा असली काम ये लिखने का नहीं है। यह तो एक शौक है। हमारे अन्दर ये जूनून है लिखने का इसलिए लिखता हूँ। जबकि मेरा असली काम है पैसा का कलेक्शन करना और फ़िर इसे एलआईसी में जमा करना।आप सब की कृपा से इस काम में हमें लाखो रुपया जमा करने का अवसर मिल हीं जाता है।  

अब असली मुद्दा पर आने का वक्त हो गया है और लेख को समाप्त करने का भी। जरा सोचिये! जब पांच सौ रुपया के नोट से हीं काम चल जाता है तो दो हजार के नोट का लीगल टेंडर देने का क्या मतलब जब भारत के प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह थे उस समय भारत के अधिकांश लोगों का कहना था कि एक हजार के नोट को बंद कर दिया जाय इससे कालाधन रोज बड़ा हो रहा है। भारत के लोग इस तलाश में भीड़ गए कि देश को कोई ऐसा प्रधानमंत्री मिले जो यह फैसला ले कि पांच सौ और एक हजार का नोट चलन से बाहर हो जाय और देश कालाधन से मुक्त हो जाय।  

जरा फ़िर से सोचिये!  जब एक हजार के नोटों से कालाधन का विकास हो रहा था तो क्या दो हजार के नोट से कालाधन घटने लगता। नहीं ना! फ़िरइस नोट का शुरुआत करने का मतलब साफ़ हो जाता है कि यह सरकर देश को बड़े स्तर पर लूटने वाली है वो भी लीगल और जनता के समर्थन के साथ। आप को जानकर बहुत हैरानी होगी कि भारतीय मीडिया जिस समय भारत में दो हजार नोट का लीगल टेंडर शुरू हुआ उस समय भारत के मीडिया ने लोगों को बताया कि दो हजार के नोट में ऐसा नैनों चिप्स लगा हैजिससे सरकार को पता चल जायेगा कि यह नोट देश के किस कोने में छुपा हुआ है । 

 मित्रोंये दो हजार के नोट एटीम में इसलिए कम हैं कि ये अभी शुट्केस में बंद होकर नेताओं के घरों में कैद हो चुके है और कैद होते जा रहे है और फ़िर ये नोट देखते हीं देखते लीगल डिजिटल करेन्सी में तब्दील हो जायेगा और तब जाकर यह नोट हम जैसे आम आदमी के हाथों में आएगा। धन्यवाद! 

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