यह जहाज अपनी ऐतिहासिक पोरबंदर से मस्कट की यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार है यहाँ INSV कौंडिन्य की एक तस्वीर है, जो प्राचीन भारतीय 'टंकाई पद्धति' (Stitched ship technique) से निर्मित जहाज की झलक दिखाती है। नई दिल्ली/पोरबंदर: भारतीय नौसेना ने इतिहास के पन्नों को एक बार फिर समुद्र की लहरों पर जीवंत कर दिया है। सदियों पुरानी 'टंकाई पद्धति' (Stitched-ship technique) से निर्मित विशेष नौकायन पोत INSV कौंडिन्य अपनी पहली ऐतिहासिक विदेश यात्रा के लिए गुजरात के पोरबंदर तट से ओमान के मस्कट के लिए रवाना हो गया है। प्राचीन इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना INSV कौंडिन्य कोई साधारण जहाज नहीं है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने में एक भी लोहे की कील का उपयोग नहीं किया गया है। सिलाई तकनीक: केरल के पारंपरिक कारीगरों ने लकड़ी के तख्तों को नारियल के रेशों (Coir ropes) से सिलकर तैयार किया है। अजंता से प्रेरणा: इसका डिजाइन अजंता की गुफाओं में मिले 1,500 साल पुराने चित्रों पर आधारित है, जो प्राचीन भारत की उन्नत नौसेना शक्ति को दर्शाता है। पूरी तरह प्राकृतिक: इसे वाटरप्रूफ बनाने के लि...