भारतीय टीम की साउथ अफ्रीकन पर एक बार फिर शानदार जीत|| सात विकेट और चार ओवर शेष रहते जीता कप्तान सूर्यकुमार यादव का फैसला सही||



भारतीय टीम की साउथ अफ्रीकन पर एक बार फिर शानदार जीत|| सात विकेट और चार ओवर शेष रहते जीता कप्तान सूर्यकुमार यादव का फैसला सही||

हिमाचल प्रदेश/धर्मशाला:  धर्मशाला में खेले गए भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। बीते कल धर्मशाला में खेले गए साउथ अफ्रीका और भारत के बीच टी-20 मैच चार ओवर एक गेंद शेष रहते और सात विकेट से भारत ने मैच जीत गया है। 

धर्मशाला में खेला गया यह टी-20 मैच भारत के गेंदबाजी प्रभुत्व (Bowling Dominance) और आक्रामक पावरप्ले बल्लेबाजी (Aggressive Powerplay Batting) का एक बेहतरीन प्रदर्शन था। 

🇮🇳 भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका (तीसरा T20I): 

यह मुकाबला पाँच मैचों की सीरीज़ में 2-1 की बढ़त लेने के लिए निर्णायक था, और भारत ने इसे एकतरफा बना दिया।

1. टॉस और कंडीशन्स का प्रभाव मैच भारत के पक्ष में लेकर चला गया :

​टॉस: भारत के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया, जो धर्मशाला की ठंडी और तेज हवा वाली परिस्थितियों में एक सही सामरिक निर्णय साबित हुआ।

परिस्थितियाँ: शुरुआती ओवरों में ठंडे मौसम और पिच पर नमी (seam and swing) का लाभ तेज गेंदबाजों को मिला, जिसका भारतीय गेंदबाजों ने पूरा फायदा उठाया।

​2. दक्षिण अफ्रीका की पारी का पतन (SA Innings Collapse)

​दक्षिण अफ्रीका की पूरी टीम 20 ओवर में 117 रनों पर सिमट गई। यह दिखाता है कि भारत की तरफ से एक अनुशासित और आक्रामक गेंदबाजी इकाई का प्रदर्शन रहा।

पावरप्ले में घातक गेंदबाजी: अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा ने नई गेंद से टेस्ट मैच जैसी लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी की। दक्षिण अफ्रीका ने पहले 7 ओवर के अंदर ही 30 रन पर 4 विकेट खो दिए।

​अर्शदीप सिंह (2/13): उन्होंने रीज़ा हेंड्रिक्स को शून्य पर आउट कर पहले ही ओवर में बड़ा झटका दिया।

​हर्षित राणा (2/34): उन्होंने क्विंटन डी कॉक और डेवाल्ड ब्रेविस को आउट करके दबाव बनाया।

​मार्कराम का जुझारू प्रयास: कप्तान एडेन मार्कराम ने एक छोर संभाले रखा और मुश्किल परिस्थितियों में 61 रनों की जुझारू पारी खेली। उनकी यह पारी टीम को टी-20 के सबसे न्यूनतम स्कोर से बचाने में महत्वपूर्ण थी, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से सहयोग नहीं मिला।

​स्पिनरों का दम: वरुण चक्रवर्ती (2/11) और कुलदीप यादव (2/12) ने मध्य ओवरों में रनों पर लगाम लगाई और विकेट झटके, जिससे दक्षिण अफ्रीका की वापसी की कोई भी कोशिश नाकाम हो गई।

3. भारत का तेज और आसान लक्ष्य पीछा (The Chase: Blistering Start)

​भारत के लिए 118 रनों का छोटा लक्ष्य था, जिसे टीम ने 15.5 ओवर में, सात विकेट शेष रहते, आसानी से हासिल कर लिया।

​अभिषेक शर्मा का विस्फोट: भारत की जीत की नींव अभिषेक शर्मा ने रखी। उन्होंने सिर्फ 18 गेंदों में 35 रन की तूफानी पारी खेली, जिसमें 3 चौके और 3 छक्के शामिल थे। उनके इस आक्रामक शुरुआत के कारण भारत ने पावरप्ले में ही 68/1 रन बना लिए, जिससे बाकी बल्लेबाजों पर सारा दबाव खत्म हो गया।

​लक्ष्य का प्रबंधन: एक बार जब अभिषेक शर्मा आउट हुए, तो शुभमन गिल (28) और मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने मैच की स्थिति को समझा और अनावश्यक जोखिम लेने से बचते हुए सूझबूझ से पारी को आगे बढ़ाया।

​शांत फिनिश: तिलक वर्मा (25*) और शिवम दुबे (10*) ने नाबाद रहते हुए टीम को जीत दिलाई, यह दर्शाता है कि टीम ने लक्ष्य का पीछा करने में कोई हड़बड़ी नहीं की और एक पेशेवर अंदाज में मैच को समाप्त किया।

​✨यह मैच भारतीय टीम की गेंदबाजी की गहराई और T20 क्रिकेट में आक्रामक शुरुआत के महत्व को दर्शाता है।

​टॉस-निर्भर जीत: ठंडी कंडीशन्स में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ।

​दबाव बनाना: शुरुआती 6 ओवरों में दक्षिण अफ्रीका को कम स्कोर पर रोककर भारत ने मैच को पहले ही अपने पक्ष में कर लिया था।
​रोल क्लैरिटी: अभिषेक शर्मा ने ओपनिंग में धमाकेदार शुरुआत की अपनी भूमिका को पूरी तरह से निभाया।

​संक्षेप में, यह भारत की तरफ से एक संपूर्ण और क्लीनिकल (Clinical) जीत थी, जिसने उन्हें सीरीज़ में आगे कर दिया।


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