विजय (Thalapathy Vijay) का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय।AIADMK (47 सीटें) ने दिया संकेत।।

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विजय (Thalapathy Vijay) का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय।AIADMK (47 सीटें) ने दिया संकेत।।  2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणाम बेहद ऐतिहासिक रहे हैं। अभिनेता से नेता बने विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK) ने अपने पहले ही चुनाव में राज्य के पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के समीकरणों को बदलते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी जगह बनाई है। मौजूदा सत्ताधारी पार्टी DMK (59 सीटें) अपने सहयोगियों के साथ मिलकर भी बहुमत के आंकड़े से काफी दूर है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की हार और पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद DMK ने फिलहाल विपक्ष में बैठने के संकेत दिए हैं। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद राज्य में त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) की स्थिति बन गई है। विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई है, लेकिन सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 118 के जादुई आंकड़े से 10 सीटें पीछे रह गई है। 2021 के चुनाव में कांग्रेस (INC), DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के नेतृत्व वाले 'सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस' (SPA) का हिस्सा थी। इस गठबंधन में DMK ...

भारत की समुद्री विरासत का पुनर्जन्म: बिना इंजन, रस्सियों से सिला 'INSV कौंडिन्य' मस्कट की ओर रवाना

यह जहाज अपनी ऐतिहासिक पोरबंदर से मस्कट की यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार है
यहाँ INSV कौंडिन्य की एक तस्वीर है, जो प्राचीन भारतीय 'टंकाई पद्धति' (Stitched ship technique) से निर्मित जहाज की झलक दिखाती है।


नई दिल्ली/पोरबंदर: भारतीय नौसेना ने इतिहास के पन्नों को एक बार फिर समुद्र की लहरों पर जीवंत कर दिया है। सदियों पुरानी 'टंकाई पद्धति' (Stitched-ship technique) से निर्मित विशेष नौकायन पोत INSV कौंडिन्य अपनी पहली ऐतिहासिक विदेश यात्रा के लिए गुजरात के पोरबंदर तट से ओमान के मस्कट के लिए रवाना हो गया है।

​प्राचीन इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना

​INSV कौंडिन्य कोई साधारण जहाज नहीं है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने में एक भी लोहे की कील का उपयोग नहीं किया गया है।
​सिलाई तकनीक: केरल के पारंपरिक कारीगरों ने लकड़ी के तख्तों को नारियल के रेशों (Coir ropes) से सिलकर तैयार किया है।
​अजंता से प्रेरणा: इसका डिजाइन अजंता की गुफाओं में मिले 1,500 साल पुराने चित्रों पर आधारित है, जो प्राचीन भारत की उन्नत नौसेना शक्ति को दर्शाता है।
​पूरी तरह प्राकृतिक: इसे वाटरप्रूफ बनाने के लिए मछली के तेल, राल और प्राकृतिक गोंद का लेप लगाया गया है।

​बिना इंजन, केवल हवा का सहारा

​आधुनिक युग में जहाँ विशालकाय क्रूज इंजन के दम पर चलते हैं, वहीं INSV कौंडिन्य पूरी तरह इंजन-रहित है। यह केवल अपने 
सफेद पालों (Sails) और हवा के रुख के सहारे अरब सागर को पार करेगा। इसके चालक दल में शामिल भारतीय नौसेना के जांबाज अधिकारी प्राचीन नाविकों की तरह सितारों और दिशा-सूचक यंत्रों की मदद से रास्ता तय कर रहे हैं।

​सांस्कृतिक और कूटनीतिक महत्व

​इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत और ओमान के बीच के उन प्राचीन व्यापारिक मार्गों को फिर से जोड़ना है, जो हजारों साल पहले 'मसाला मार्ग' (Spice Route) के नाम से प्रसिद्ध थे।
​"यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि हमारी खोई हुई समुद्री पहचान को वापस पाने का एक प्रयास है।" - नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी।

एक नज़र में INSV कौंडिन्य:
विशेषता विवरण-प्रकार स्टिच्ड सेलिंग वेसल (Stitched Sailing Vessel)
तकनीक: प्राचीन भारतीय टंकाई पद्धति
मिशन: पोरबंदर से मस्कट (ओमान) की यात्रा
सांस्कृतिक प्रतीक: पाल पर 'गंडभेरुंड' और हड़प्पा कालीन पत्थर का लंगर

यह मिशन न केवल भारत की प्राचीन नौका निर्माण कला को दुनिया के सामने रखेगा, बल्कि यह भी सिद्ध करेगा कि बिना आधुनिक मशीनों के भी भारतीय नाविकों ने विश्व के समुद्रों पर राज किया था।


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