उमर अब्दुल्ला के बयान पर "INDIA" गठबंधन में मतभेद गहराए।

🗣️उमर अब्दुल्ला के बयान पर "INDIA" गठबंधन में मतभेद गहराए। ।

नई दिल्ली: ​उमर अब्दुल्ला द्वारा राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के नैरेटिव से 'INDIA' गठबंधन का पल्ला झाड़ने के बाद विपक्षी खेमे में तुरंत हलचल मच गई। गठबंधन के कुछ नेताओं ने अब्दुल्ला के बयान को खारिज कर दिया, जबकि कुछ अन्य सहयोगी पहले से ही कांग्रेस के इस अभियान से दूरी बनाए हुए थे।

​1. कांग्रेस और आरजेडी की तीखी प्रतिक्रिया

​उमर अब्दुल्ला के बयान पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और 'INDIA' गठबंधन के प्रमुख रणनीतिकार मनोज झा की ओर से आई।

  • मनोज झा (RJD): उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर सीधा हमला करते हुए कहा, "उमर अब्दुल्ला बार-बार विवादों में घिर रहे हैं, और हमें जवाब देना पड़ रहा है।"
    • ​झा ने तर्क दिया कि जब हम वोटिंग में धांधली और चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं, तो यह मुद्दा बहुत अहम हो जाता है। यह सिर्फ कांग्रेस का मुद्दा नहीं है, बल्कि निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों से जुड़ा हुआ है।
    • ​उनका इशारा स्पष्ट था कि अब्दुल्ला का बयान गठबंधन के साझा संघर्ष को कमजोर करता है।
  • कांग्रेस की चुप्पी/असमंजस: कांग्रेस पार्टी ने सीधे तौर पर उमर अब्दुल्ला की आलोचना करने से परहेज किया है, क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर में उनका एक महत्वपूर्ण सहयोगी है। हालांकि, कांग्रेस के नेताओं ने अपने बयानों में इस बात पर जोर दिया कि 'वोट चोरी' एक राष्ट्रीय मुद्दा है और यह किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है।
    • ​कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने दोहराया है कि लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है वोट का अधिकार और वोट की चोरी करना एंटीनेशनल (राष्ट्र-विरोधी) एक्ट है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सबूतों के साथ इस मुद्दे को गति दे रही है और लोग इस पर चर्चा कर रहे हैं।

​2. अन्य सहयोगी दलों का रुख

​उमर अब्दुल्ला के बयान ने अन्य सहयोगी दलों के रुख को और स्पष्ट कर दिया है:

  • सुप्रिया सुले (NCP - शरद पवार गुट): वह पहले ही लोकसभा में राहुल गांधी के तर्कों को खारिज कर चुकी हैं। सुले ने साफ कहा है कि उन्हें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर पूरा भरोसा है और वह इसी मशीन से चुनी गई हैं। उनका यह बयान कांग्रेस के 'वोट चोरी' के नैरेटिव से पवार गुट की औपचारिक दूरी को दर्शाता है।
  • शिवसेना (यूबीटी): शिवसेना (उद्धव गुट) ने भी संसद में चर्चा में भाग लेते हुए, सीधे 'वोट चोरी' की बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे व्यापक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की बात की थी।
  • टीएमसी, सपा और आप: ये दल चुनावी अनियमितताओं (खासकर वोटर लिस्ट में 'SIR' या स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) का विरोध कर रहे हैं और कांग्रेस के साथ विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हुए हैं, लेकिन 'वोट चोरी' को मुख्य चुनावी एजेंडा बनाने या इसके समर्थन में रैलियों में शामिल होने को लेकर इनकी भागीदारी सीमित रही है।

​3. निष्कर्ष: 'INDIA' में एजेंडा की लड़ाई

​उमर अब्दुल्ला का बयान और उस पर आई प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करती है कि:

  • मुद्दों पर स्वतंत्रता: 'INDIA' गठबंधन के भीतर प्रत्येक घटक दल अपने स्थानीय और राजनीतिक हितों के अनुसार एजेंडा चुनने के लिए स्वतंत्र महसूस करता है।
  • कांग्रेस का एकाकीपन: 'वोट चोरी' को एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन बनाने में कांग्रेस को गठबंधन के भीतर ही सीमित समर्थन मिल रहा है। कई सहयोगी इस मुद्दे को संदेह की दृष्टि से देखते हैं या फिर इससे दूरी बनाकर अपनी छवि को EVM समर्थक या मध्यमार्गी बनाए रखना चाहते हैं। 


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