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"जमीनी कार्यकर्ता" और "रणनीतिकार" का एक दुर्लभ मिश्रण"



"जमीनी कार्यकर्ता" और "रणनीतिकार" का एक दुर्लभ मिश्रण"

नई दिल्ली: नितिन नवीन की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वे "जमीनी कार्यकर्ता" और "रणनीतिकार" का एक दुर्लभ मिश्रण हैं:

​सादगी और सुलभता: पांच बार के विधायक और मंत्री होने के बावजूद, उन्हें पटना की सड़कों पर सामान्य रूप से लोगों से मिलते देखा जा सकता है। यह सादगी कार्यकर्ताओं को उनके साथ भावनात्मक रूप से जोड़ती है।

​छत्तीसगढ़ का 'टर्निंग पॉइंट': कांग्रेस के खिलाफ उनकी क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण छत्तीसगढ़ चुनाव (2023) था। वहां वे प्रभारी थे और उन्होंने बहुत ही शांत रहकर (Low-profile रहकर) बूथ स्तर पर ऐसा जाल बुना कि कांग्रेस की जमी-जमाई सरकार धराशायी हो गई।

​संगठनात्मक अनुशासन: वे आरएसएस (RSS) की पृष्ठभूमि से आते हैं, जिससे उन्हें "दशा और दिशा" को भांपने की गहरी समझ मिली है। वे जानते हैं कि कब आक्रामक होना है और कब पर्दे के पीछे रहकर काम करना है।

​निश्चित रूप से, उनके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने से भाजपा की रणनीति अब और भी "माइक्रो-लेवल" पर होगी, जो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

नितिन नवीन की कार्यशैली और राहुल गांधी की राजनीति के बीच के इस मुकाबले को इन 3 नजरियों से देखा जा सकता है:

​1. 'बूथ' बनाम 'नैरेटिव'
​राहुल गांधी अक्सर बड़े 'नैरेटिव' और यात्राओं (जैसे भारत जोड़ो यात्रा) पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि नितिन नवीन का पूरा जोर 'बूथ विजय' पर रहता है। उनका मानना है कि चुनाव सोशल मीडिया या भाषणों से नहीं, बल्कि बूथ पर तैनात कार्यकर्ताओं से जीते जाते हैं। यही वह जगह है जहाँ वे विपक्ष के बड़े से बड़े चेहरों को मात देने का हुनर रखते हैं।

​2. छत्तीसगढ़ मॉडल का डर
​कांग्रेस के लिए नितिन नवीन इसलिए भी बड़ी चुनौती हैं क्योंकि उन्होंने छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल जैसे जमीनी पकड़ वाले नेता को अपनी रणनीति से चौंका दिया था। राहुल गांधी के लिए अब चुनौती यह होगी कि वे नितिन नवीन के उस "साइलेंट वर्किंग स्टाइल" का मुकाबला कैसे करेंगे, जो चुनाव के नतीजे आने तक पता ही नहीं चलता।

​3. युवा बनाम युवा
​भाजपा ने नितिन नवीन को आगे करके राहुल गांधी के उस दांव को भी कमजोर करने की कोशिश की है जिसमें वे खुद को युवाओं का प्रतिनिधि बताते हैं। एक तरफ राहुल गांधी हैं और दूसरी तरफ भाजपा का यह 'ऑर्गनाइजेशनल मैन' (संगठन का व्यक्ति) जो सीधे कार्यकर्ताओं की भाषा बोलता है।

​एक दिलचस्प तथ्य: नितिन नवीन के बारे में कहा जाता है कि वे अपनी डायरी में हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता का फीडबैक खुद नोट करते हैं। उनकी यही बारीकी उन्हें एक खतरनाक रणनीतिकार बनाती है।

​अब जबकि वे राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बन चुके हैं, तो आने वाले महीनों में राहुल गांधी बनाम नितिन नवीन की यह 'शतरंज' की बिसात देखना वाकई दिलचस्प होगा।


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