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Showing posts from June, 2023

नेहरूजी के दूसरा संतान बेटा पैदा लेते हीं, पत्नि कमला नेहरू की तबियत बहुत ख़राब हो गई और........

नेहरूजी के दूसरा संतान बेटा पैदा लेते हीं, पत्नि कमला नेहरू की तबियत बहुत ख़राब हो गई और........ कमला नेहरूजी दिल्ली के व्यापारी पंडित जवाहरमल कौल की पुत्री थीं। 8 फरवरी , 1916 को बसंत पंचमी के दिन दिल्ली में उनका विवाह जवाहरलाल नेहरूजीजी से हुआ था। 19 नवंबर 1917 को इंदिराजी का जन्म हुआ था। कमलाजी की तबियत बार-बार बिगड़ रही थी। नवम्बर , 1924 में उनकी दूसरी संतान ने जन्म लिया। लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर लड़के की मृत्यु हो गई। उनकी तबियत और बिगड़ गई। जाँच कराने पर टीबी निकली। नेहरूजी ने डॉ एम ए अंसारी से सलाह ली तो उन्होंने जेनेवा ले जाने की सलाह दी। पासपोर्ट बनवाने गए तो एकबार फिर अंडरटेकिंग मांगी गई कि यूरोप में रहते हुए वह राजनीतिक आयोजनों में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने फिर मना कर दिया। अंत में जब मोतीलालजी ने हस्तक्षेप किया तब जाकर उन्हें पासपोर्ट मिला। मार्च में नेहरूजी पत्नी को लेकर जिनेवा पहुँचे। अगले 21 महीने वह वहीँ रहे। बाद में बहन कृष्णा नेहरूजी भी पहुँच गईं। जिनेवा से उन्हें मोंटाना के एक सेनीटोरियम में ले जाया गया। लेकिन स्वास्थ्य-लाभ बेहद धीमा था। 5 मार्च , 19...

मणिपुर जाने से राहुल गांधी को मोदी सिपाहियों द्वारा रोके जाने पर कांग्रेस के तेवर आजादी जैसे।

मणिपुर जाने से राहुल गांधी को मोदी सिपाहियों द्वारा रोके जाने पर कांग्रेस के तेवर आजादी जैसे। कई पार्टियों के नेता मणिपुर के मुद्दे पर पीएम मोदी से मिलना चाह रहे हैं, लेकिन पीएम के पास समय नहीं है सरकार की लाख कोशिशों और अवरोधों के बावजूद , कांग्रेस नेता राहुल गांधी मणिपुर के हिंसा पीड़ितों के बीच पहुंच ही गए। मणिपुर के लोगों के बीच पहुंचकर राहुल जी ने उन्हें विश्वास दिलाया कि वो उनके साथ हैं और हमेशा साथ रहेंगे। उनके कंधों पर हाथ रख ये भरोसा दिलाया कि एक रोज सब ठीक हो जाएगा, नफरत की आग बुझेगी और मोहब्बत का गुलिस्तां राज्य में जरूर खिलेगा। ज़ुल्मी सत्ता के गलियारों से ज़ुल्म करने से बाज नहीं आया गांधी को रोकने का हर पैंतरा अपनाया, लेकिन सामने खड़े राहुल गांधी थे , जिन्होंने ठान लिया था कि मणिपुर को उसके हाल पर नहीं छोड़ेंगे लोगों से मिलेंगे और उन्हें मोहब्बत का पैग़ाम देंगे। बस फिर क्या था! राहुल पहुँच गये अपनों के बीच और लोगों का हाल जाना- उन्हें विश्वास दिलाया कि वो हर क़ीमत पर आपके साथ हैं , और आगे भी रहेंगे। मणिपुर के हालत ये हो गई है कि लोग अपना घर छोड़ कर कैम्प में र...

गांधीजी का भारत में पहला अनशन।।

गांधीजी का भारत में पहला अनशन।। अहमदाबाद   मिल-मज़दूरों के औद्योगिक झगड़ों को सुलझाने गांधीजीजी ने जो मांग तैयार की उसको मिल-मालिकों के सामने रखा। उन्होंने 20 फीसदी से अधिक देने से क़तई इन्कार कर दिया और कह दिया कि 22 फरवरी 1918 से मिलों में   ताले   डाल दिये जाएंगे। गांधीजीजी ने मिल-मज़दूरों की एक सभा बुलाई और एक पेड़ के नीचे उनसे यह प्रतिज्ञा करवाई कि वे तब तक काम पर नहीं लौटेंगे जब तक उनकी मांग स्वीकार नहीं हो जाती। प्रतिज्ञा में यह बात भी थी कि वे लोग जब तक मिलों में ताले पड़े रहेंगे तब तक किसी हालत में शांति-भंग न करेंगे। अहिंसा गांधीवादी संघर्ष का हमेशा से अविभाज्य अवयव रहा है। हड़ताली मज़दूरों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। एक शाम जब गांधीजी मज़दूरों के बीच सभा कर रहे थे , एक व्यक्ति ने ताना दिया कि गांधीजी और अनुसूयाबेन तो कार से चलते हैं और उन्हें भोजन की कोई समस्या नहीं है , लेकिन हमारे बच्चे भूखों मर रहे हैं। बात कड़वी थी, लेकिन सच थी। गांधीजीजी ने उसी समय यह घोषणा की कि जब तक मज़दूरों की मांगे नहीं मानी जातीं , तब तक न तो किसी सवारी में ही चलेंग...

“महामहिम राष्ट्रपति, द्रोपदी मुर्मू जी का और देश के सर्वोच्च पद का भी अपमान- स्वामी प्रसाद मौर्या।”

“ महामहिम राष्ट्रपति , द्रोपदी मुर्मू जी का और देश के सर्वोच्च पद का भी अपमान- स्वामी प्रसाद मौर्या। ” स्वामी प्रसाद मौर्या अपने ट्वीट में महामहिम राष्ट्रपति, द्रोपदी मुर्मू जी के हौजाखास मंदिर में पूजा दूरी बनाकर करने को लेकर अपमान समझे हैं और इसे देश के सर्वोच्च पद का भी अपमान बताया है। स्वामी प्रसाद मौर्या ने ट्वीट में लिखे हैं कि भारत के महामहिम राष्ट्रपति , द्रोपदी मुर्मू जी को भी जातीय अपमान के कडुवे सच का सामना करना पड़ा जब दिल्ली के जगन्नाथ मंदिर में रेल मंत्री भारत सरकार मंदिर के अंदर प्रवेश कर मूर्ति का दर्शन कर रहे हैं। मौर्या ने आगे लिखा है कि वहीं पर महामहिम राष्ट्रपति मुर्मू जी को आदिवासी समाज में पैदा होने के नाते मंदिर परिसर के बाहर से ही पूजा कराना देश के सर्वोच्च पद का न केवल घोर अपमान है अपितु जाति-धर्म के नाम पर जातीय अपमान का कड़वा सच भी है। और मौर्या के ट्वीट के comment में लोगों ने क्या लिखा है, वो भी देखना चाहिए। जब राष्ट्रपति जी को संसद के उद्घाटन में नहीं बुलाया वो कुछ नहीं   बोली। जबकि, देश भर में उनके इस अपमान के विरोध में आवाज उठी थी। आज इस...

दलों का महागठबंधन नहीं बल्कि भारतीय दिलों का महागठबंधन का सम्मेलन पटना में।।

दलों का महागठबंधन नहीं बल्कि भारतीय दिलों का महागठबंधन का सम्मेलन पटना में।। आज बिहार की राजधानी पटना में भारत के विपक्ष एक साथ-एक मंच पर जमा हुए हैं। इसमें करीब देश के पन्द्रह राजनीतिक दलों मिलने को आए। यह सम्मेलन बिहार के साथ-साथ यहाँ के नेताओं के लिए भी बहुत बङी उपलब्धी है। इस सम्मेलन में भारत की सबसे बङी पार्टी कांग्रेस भी शामिल हुई है और बिहार का मसिहा के नाम से प्रसिद्ध लालू प्रसाद यादव भी शामिल हुए। इससे साफ हो जाता है कि लालू प्रसाद और कांग्रेस दोनों देश और समाज के लिए अहम स्थान रखते हैं। राजनीतिक चिंतकों का कहना ये है कि यह सम्मेलन भारत का भविष्य निर्धारित करेगा। यदि यह सम्मेलन सफल हो जाता है, तो भारत महंगाई, बेरोजगारी और संविधान का हनन की पीङा से गुजर रहा है, उससे निज़ात मिल सकता है। इस सम्मेलन का नाम दलों का नहीं भारतीय दिलों का महागठबंधन नाम दिया गया है। बताया ये जा रहा है कि इसमें पन्द्रह विपक्षी दलों के नेता इस बैठक में भाग लिये हैं। देश के 6 मुख्यमंत्री और 5 पूर्व मुख्यमंत्री सम्मेलन का हिस्सा बनें।  मदद करें।

“कांग्रेस हिंदुस्तान को जोड़ने और मोहब्बत फैलाने का काम कर रही है, इसलिए आज हम बिहार आए हैं”- राहुल गांधी।।

बिहार, पटना: “ कांग्रेस हिंदुस्तान को जोड़ने और मोहब्बत फैलाने का काम कर रही है , इसलिए आज हम बिहार आए हैं ” - राहुल गांधी।। कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ने बिहार के मंच से बोले हैं कि कर्नाटक में बीजेपी ने जीत के दावे किए थे , लेकिन जब कांग्रेस पार्टी एक साथ खड़ी हो गई तो बीजेपी कर्नाटक से गायब हो गई। गांधी ने आगे कहा कि इतना ही नहीं बीजेपी तेलंगाना , मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी दिखाई नहीं देगी । इन राज्यों में भी   कांग्रेस जीतेगी। राहुल गांधी बीजेपी के बारे में विशेष रूप से बताते हुए कहते हैं कि बीजेपी भारतीय जनता पार्टी   का मतलब है, दो-तीन लोगों को फायदा पहुंचानावाली पार्टी है। और वहीं कांग्रेस पार्टी का मतलब है- गरीबों के साथ खड़े होकर उनके लिए काम करना।इनके प्रगति के बारे में हमेशा सोचना और उस सोच को भारत के लोगों के लिए लागू करना। गांधी ने आगे कहा कि   हिंदुस्तान में विचारधारा की लड़ाई चल रही है। एक तरफ कांग्रेस ' भारत जोड़ो ' की विचारधारा को लेकर जनता के सामने खङी। दूसरी तरफ बीजेपी, जो आरएसएस के विचार-धारा से प्रेरित होकर काम करती ...

मोदी अमेरिका पहुँचे तो उनकी अगवानी के लिए न तो बाइडेन सरकार का, और न ही वहां की बड़ा अधिकारी आया- सुप्रिया श्रीनेत।

मोदी अमेरिका पहुँचे तो उनकी अगवानी के लिए न तो बाइडेन सरकार का , और न ही वहां की बड़ा अधिकारी आया- सुप्रिया श्रीनेत। यह देख कर बहुत दुःख हुआ कि कल जब PM मोदी अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर पहुँचे तो उनकी अगवानी के लिए न तो बाइडेन सरकार का , और न ही वहां की आर्मी का कोई बड़ा अधिकारी आया। जबकि, राष्ट्रपति ओबामा और डोनाल्ड ट्रम्प के भारत आगमन पर मोदी जी स्वयं एयरपोर्ट पर उन्हें लेने के लिए पहुँचे थे।   आपको शायद याद हो कि जब पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह जी अमेरिका की राजकीय यात्रा पर थे , तब उनके पहुँचने पर अमेरिका द्वारा उन्हें ‘गार्ड ऑफ़ ऑनर’ दिया गया था।   और यह तो सर्वविदित है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू जी इकलौते भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें दो बार एयरपोर्ट पर लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति पहुंचे थे। पहली बार- 1949 में राष्ट्रपति ट्रूमन पंडित नेहरू की एयरपोर्ट पर अगवानी करने आए और फिर दूसरी बार- 1961 में तत्कालीन राष्ट्रपति केनेडी आए और वहां से पंडित नेहरू और प्रेसिडेंट केनेडी ने एक साथ उनके आधिकारिक हवाई जहाज़ ' एयर फ़ोर्स-1’ में वॉशिंगटन   तक की यात्रा की ...

रोजगार देने में मोदी का डंका बज रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि बेरोजगारी का डंका बज रहा है।

रोजगार देने में मोदी का डंका बज रहा है , जबकि सच्चाई यह है कि बेरोजगारी का डंका बज रहा है। भरत के लोगों को रोजगार देने में भी पीएम नरेंद्र मोदी फिसड्डी साबित होते दिख रहें हैं। देखा जाय तो मोदी इस मामला पर लगता है कभी विचार किये हीं नहीं। अडानी लूटपाट नीति के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन मोदी सरकार की प्राथिमिकता कभी भी ख़ाली पद भरने की नहीं रही है। 2014 के मुक़ाबले केंद्र सरकार में सिविलियन नौकरियों के ख़ाली पद दोगुना हो गए हैं। सरकारी महकमों में कुल मिलाकर 30 लाख़ पद ख़ाली हैं। इस मुद्दा पर कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि संवेदनहीन मोदी सरकार दलित विरोधी , आदिवासी विरोधी , पिछड़ा वर्ग और आर्थिक तौर पर कमज़ोर वर्गों की विरोधी है , तभी ये ख़ाली पद नहीं भर रही !   देखा जाय तो मोदी जी कुछ हज़ार भर्ती पत्र बाँटकर , वाहवाही बटोरने की क़वायद में , युवाओं की आँखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं, नई भर्ती कोई निकल नहीं रही और मेला लगाकर हर महीने 70 हजार नौकरियों का ज्वाइनिंग लेटर दिया जा रहा है, जो सब समझ से परे है।   लोगों को नौकरी देने में कांग्रेस...