ओड़िसा में भीषण रेलदुर्घटना, लगभग
300 लोगों को मारे जाने और हजारों लोगों को घायल
होने की खबर।
ओडिसा के बालसोर जिला में बहनागा रेलवे स्टेशन के पास तीन ट्रेनों के
बीच भीषण रेल दुर्घटना हो गई है, इसमें
करीब 300 लोगों को मारे जाने और एक हजार लोगों
को घायल होने की खबर है। लेकिन, अफसोस
अभीतक इसकी जिम्मेदारी मोदी सरकार के किसी महकमा ने नहीं ली है। बताया जा रहा है
कि यह दुर्घटना तीन रेलगाड़ी के बीच हो गई है। इसमें एक मालगाड़ी है और दो पसेंजर
ढोनेवाली ट्रेन है।
बताया जा रह है कि मालगाड़ी पहले से अपने यथास्थान पर खड़ी थी, एक पटरी पर खड़ी थी और पसेंजर ढोनेवाली कोरोमंडल
एक्सप्रेस मेन लाईन से आ रही थी कि अचानक मोड़ ले ली और उस पटरी पर चली गई, जिस पटरी पर मालगाड़ी को पहले खड़ा करके छोड़ दिया
गया था और इसी मालगाड़ी से कोरोमंडल एक्सप्रेस जा टकराई है। कोरोमंडल एक्सप्रेस की
गति इतनी थी कि मालगाड़ी पर चढ़ गई है।
एक दूसरी पसेंजर ढोनेवाली ट्रेन मेन लाईन से उसी समय गुजर रही थी या पहले से छतिग्रस्त थी या पहले से खड़ी थी या पहले से दुर्घटनाग्रस्त थी भी इस दुर्घटना के चपेट में आ गई। इस भयानक दुर्घटना का जन्मदाता कोरोमंडल एक्सप्रेस को माना जाना चाहिए, जो बहुत हाई स्पिड में आ रही थी और उसी गति में मालगाड़ी से जा टकराई, जिसके छीटा से दूसरी ट्रेन भी छतिग्रस्त हो गई।
ऐसा बताया जा रहा है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस में ऐसा कोई सेंसर या
तकनीक लगी हुई होती, जिसमें ये गुण होता कि ट्रेन दूसरे
रेलगाड़ी के नजदीक जाते समय सक्रिय हो जाती और गाड़ी को रोक देती या फिर गाड़ी चालक
को खतरे की सम्भावना को सूचना दे देती और दुर्घटना होने से बचा लेती। लेकिन ऐसा
सोचने से क्या फायदा! अब दुर्घटना घट चुकी है और हजारों परिवार इस घटना के
भुक्तभोगी होंगे।
दुर्घटना इतना भयानक था कि लगभग 300 लोगों की मौत दुर्घटनास्थल पर हीं हो गई है और हजारों लोग घायल हो गए हैं। राहत बचाव में लगे लोग मृत लोगों को गाड़ी पर ऐसे लाद रहे थे, जैसे अनाज की बोरी लाद रहें हों। दुर्घटना में मारे गए लोगो को पकड़-पकड़ कर गाड़ी पर अनाज की बोरी या किसी और की बोरी की तरह लाश को फेंक कर गाड़ी पर लादने के दृश्य को देखकर कोई मानव द्रवित हो सकता है। यह दृश्य मानवता को रोने के लिए काफी है।

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