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“मोदी सरकार की हर नीति और कदम उनका डीएनए हीं किसान विरोधी है”- संदीप सुरजेवाल।कांग्रेस।

मोदी सरकार की हर नीति और कदम उनका डीएनए हीं किसान विरोधी है- संदीप सुरजेवाल।कांग्रेस।


हरियाणा के किसान सुरजमूखी फसल का एमएसपी की माँग को लेकर आंदोलन करने को मजबूर हो चुके हैं, क्योंकि सरकार किसानों को एमएपपी देने से मना का दी है। और सरकार इसपर काम करने के बजाय किसानों पर लाठियाँ चला रही है और इसके आंदोलन और आवाज को दबाने के प्रयास में लगी है, सरकार के इस नीति को किसान विरोधी नीति नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे!

सरकार खुलेआम किसानों के विरोध में पुलिस बल का प्रयोग कर रही है, जिसे किसी भी तरह से सही ठहराया नहीं जा सकता। इन किसानों के समर्थन में कांग्रेस नेता संदीप सुरजेवाला सरकार के खिलाफ आवज उठाने शुरू कर दिये हैं, जिससे किसानों को न्याय मिलने में शयद मदद मिल सकती है। लेकिन, सुनने को यह मिल रहा है कि सरकार बहरी हो गई है और सरकार अंग्रेजों जैसे हो गई है।मोदी सरकार, एमएसपी रेट पर फसल ख़रीदने से इनकार की और फिर किसानों पर लाठीचार्ज-हरियाणा


किसान के एमएसपी की लड़ाई को आगे बढ़ातेे हुए संदीप सुरजेवाल ने कहा है कि इस सरकार के डीएनए में किसान विरोधी है। आसान भाषा में समझें तो ‘यह सरकार डीएनए से किसान विरोधी है।’ सच में इस सरकार के कार्यप्रणाली को देखा जाय तो यह पता चलता है कि इस सरकार का एक भी फैसला ऐसा नहीं है जो किसानों के हीत में है। यह सरकार गौतम अडानी के हीत में हमेशा से फैसला लेते आ रही है।प्रधानमंत्री कहे थे- किसानो से एमएसपी कोई नहीं छीन सकता, फिर हरियाणा के किसानों को एमएसपी के लिए लाठी खानी क्यों पड़ रही है?


कांग्रेस नेता संदीप सुरजेवाल ने कहा, “कल मोदी के मंत्रिमंडल ने रवी फसलों के एमएसपी की घोषणा कर दी, लेकिन तीन कड़वी सच्चाई है, जिसे बताना और जनता को जानना बहुत आवश्यक है।


पहली- किसान की फसल हिंदुस्तान में एमएसपी पर खरीदी हीं नहीं जाती, जबकि मोदी सरकार हल्ला करके ये बताते रहती है की एमएसपी पर फसल खरीदी जा रही है। यदि ऐसा होता, तो हरियाणा के किसान सुरजमूखी फसल की एमएसपी की माँग कर रहें हैं, सरकार इन्हे क्यों नहीं दे रही है।


दूसरी- किसानों के लागत पर जमा 50 प्रतिशत मुनाफा मिलने का कोई नामोनिशान ही नहीं है। यह सच है कि किसानो को एमएसपी देने के लिए मोदी सरकार ने एक कमेटी बनाई थी, लेकिन ये भी आज मोदी के भाषणों की तरह जुमला निकला। सूचना ये है कि मोदी इस कमेटी में किसान के लोगों को शामिल नहीं किया गया।


तीसरी- मोदी सरकार की हर नीति और कदम उनका डीएनए हीं किसान विरोधी है। देखा जाय, मोदी सरकार जब से आई है, तब से किसानों का कर्जा माफ नहीं की लेकिन गौतम अडानी का कर्जा माफ कर दी। किसानों की सब्सीडी खत्म कर दी, लेकिन गौतम अडानी को सब्सीडी दे दी। 


विश्व अवगत है कि मोद के तीन कृषि कानून जो गौतम अडानी के हीत में सोचते हुए बनाया गया था उसको समाप्त काराने में 750 किसान भारत की राजधानी दिल्ली के पास आंदोलन करने में शहीद हो गए। In preparation to fight again against the tyrannical Modi government, this time there will be a war regarding the MSP of the farmers of India.

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