“महामहिम राष्ट्रपति, द्रोपदी मुर्मू जी का और देश के सर्वोच्च पद का भी अपमान- स्वामी प्रसाद
मौर्या।”
स्वामी प्रसाद मौर्या अपने ट्वीट में महामहिम राष्ट्रपति, द्रोपदी मुर्मू
जी के हौजाखास मंदिर में पूजा दूरी बनाकर करने को लेकर अपमान समझे हैं और इसे देश
के सर्वोच्च पद का भी अपमान बताया है।
स्वामी प्रसाद मौर्या ने ट्वीट में लिखे हैं कि भारत के महामहिम
राष्ट्रपति, द्रोपदी मुर्मू जी को भी जातीय अपमान के कडुवे
सच का सामना करना पड़ा जब दिल्ली के जगन्नाथ मंदिर में रेल मंत्री भारत सरकार
मंदिर के अंदर प्रवेश कर मूर्ति का दर्शन कर रहे हैं।
मौर्या ने आगे लिखा है कि वहीं पर महामहिम राष्ट्रपति मुर्मू जी को
आदिवासी समाज में पैदा होने के नाते मंदिर परिसर के बाहर से ही पूजा कराना देश के
सर्वोच्च पद का न केवल घोर अपमान है अपितु जाति-धर्म के नाम पर जातीय अपमान का
कड़वा सच भी है।
और मौर्या के ट्वीट के comment में लोगों ने क्या लिखा
है, वो भी देखना चाहिए।
जब राष्ट्रपति जी को संसद के उद्घाटन में नहीं बुलाया वो कुछ
नहीं बोली। जबकि, देश भर में उनके इस
अपमान के विरोध में आवाज उठी थी। आज इस अपमान पर भी चुप हैं। आप भारत की
राष्ट्रपति है, एक बार-बस एक बार, हिम्मत दिखाये- मनुवाद के खिलाफ, जनता आपके साथ
है।
यह महिला सम्मान की बात है, दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रपति मुर्मू
जी ने जातिगत अपमान का सामना किया, जबकि
केंद्रीय मंत्री मंदिर में प्रवेश कर रहे थे। यह जातिगत अपमान की दुखद और कड़वी
सच्चाई है, जो सर्वोच्च पद पर भी होती है।
इसलिये मान्यवर कांशीरामजी ने कहा कि वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं
चलेगा। 85 %प्रतिशत और 15%प्रतिशत का झगड़ा है। 15%प्रतिशत लोग 85%प्रतिशत पर राज
कर रहे हैं, यह देखकर एससी एसटी ओबीसी के लोगों को समझने की जरूरत है।
मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई जाति भेदभाव वाली बात होगी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी जिस समय दर्शन कर रही हैं, फोटो देख कर लगता है कि उस समय आरती हो रही है। इसीलिए, गर्भ गृह में इन्होंने प्रवेश नहीं किया। आरती के बाद उन्होंने वहीं से पुजारियों से बात करी, सच केवल महामहिम को पता है।

Comments