एक समय भारत में आया था जिस समय में भारत के कोना-कोना से यहीं समाचार मिल रहा था कि उन लोग ज्यादा प्रभावित हो रहें हैं जो लोग आर्थिक रूप से कमज़ोर हैं या पैसा कमाने के लिए अपने गृह राज्य को छोड़कर दूसरे राज्य में गए थे। दिल्ली जैसे भारत के बड़े महानगर में ऐसी स्थिति आ गई थी कि वहां से लोग पैदल हीं अपने घर लौटने को मजबूर हो गए । जिसका मूल वजह प्रबन्धन की कमी को जाता है जो बहुत हीं ख़राब स्थिति में पहुंच चुका है। इसकी जितनी शिकायत किया जाय उतना हीं कम होगा। यह घटना भारत सरकार के आर्थिक मदद की ढांचा का पोल खोल देता है तथा अब इससे साफ़ हो जाता है कि भारत के गरीब जनसंख्या को यदि आर्थिक सहारा देने की तत्काल जरूरत पड़ जाय तो मोदी जैसे भारत सरकार से मदद के नाम पर सिर्फ भरोसा, भाषण, माफ़ी तथा एक दूसरों पर जिम्मेदारी थोप कर अपनेआप को बेगुनाह साबित करने के अलावा दूसरे कुछ की उम्मीद नहीं की जा सकती। शहर छोड़कर पैदल अपने घर की ओर कूच करने का सिलसिला तब शुरू हुआ था जब भारत सरकार ने कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई में देश को lock-down कर दिया तथा जिसकी तैयारी करने के जगह सरकार ने लोगों से थाली बजाने, ढोल पीटने, नगा...