कोरोना वायरस से देश
में उत्पन्न आर्थिक स्थिति से निपटने के लिए 1.70 लाख करोड़ रूपये की घोषणा भारत
सरकार द्वारा किया जा चुका है जो एक अप्रैल से सभी लाभार्थियों के खाते में सीधे
deposit हो जायेगा यह पैसा उन लोगों के लिए घोषणा किया गया है जो गरीब है और
बीपीएल के अन्तर्गत आते हों उनलोगों इसका फायदा उठा सकते हैं। चिकित्सा क्षेत्र
में योगदान दे रहे डाक्टरों, नर्सों व कर्मचारियों के लिए भी सरकार ने आर्थिक मदद
पैकेज की घोषणा किया है। भारत सरकार कोरोना को पहले हीं राष्ट्रीय आपदा में शामिल
कर लिया है, जिससे आपदा प्रबंधन की ओर से पांच लाख रूपये की सहायता राशी कोरोना
बीमारी से मौत हुए व्यक्ति के परिवारवालों को देने का प्रवधान है। इस आपदा इससे
प्रभावित लोगों को बहुत राहत मिलनेवाला है।
बिहार भी कोरोना
वायरस को लेकर आर्थिक राहत जागरूकता दिखाते हुए बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री राहत
कोष से जनता के लिए 100 करोड़ रूपये देने की घोषणा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
द्वारा किया जा चुका है। इस आर्थिक राहत का खर्च आपदा राहत केन्द्र का निर्माण
करने तथा lock-down से प्रभावित मजदूरों, रिक्शा चालकों और रास्ते में फंसे लोगों
को सहायता पहुँचाने में किया जाने का सरकारी खाका तैयार किया गया है।
लेकिन कोरोना वायरस
से उत्पन्न परेशानी का स्तर हमारी सरकार द्वारा राहत पैकेज तक सीमित है को मान
लेना सही नहीं होगा। क्योंकि इसके प्रभाव का स्तर बहुत व्यापक हो चुका है, जिससे
निपटने के लिए भारत सरकार को और तैयारी करने की जरूरत है। फ़िलहाल, इससे कुछ फायदा
तो होगा हीं सोचकर सरकार तबतक कुछ और तैयारी कर सकती है परन्तु समस्या को देखते
हुए सरकार का यह निर्णय को आवश्यकता अनुसार सहयोग की उम्मीद कम दिखाई पड़ता है।
भारत में lock-down
लागू होने से लोग अपने-अपने घरों में अवश्य सिमटकर रह गए हैं लेकिन उनके जरूरतों
के समाग्रियों को रोकना बड़ा मुश्किल काम है। इसको पूर्ण रूप से lock-down नहीं किया
जा सकता है। जिसकी आपूर्ति के लिए बाजार का खुला होना आवश्यक है जो lock-down की वजह
से बंद हो चुका है। जिन लोगों की जिन्दगी दिहाड़ी पर गुजरती है उनके लिए भारत सरकार
का राहत पैकेज काम करने में बहुत हद तक सफल साबित होगा। और जिन लोग सीधे तौर पर
कोरोना से प्रभावित हैं उनके लिए राष्ट्रीय आपदा वरदान साबित होनेवाला है इसमें
कोई दो राय नहीं है। जो लोग कोरोना वायरस का संक्रमण को रोकने के लिए lock-down का मजदूर वर्ग
के लोगों को भी राहत मिलना निश्चित हीं है।
इन सभी में बहुत लोग
ऐसे हैं जिनका परिवार दुकान पर निर्भर करता है और कुछ लोगों का परिवार ऐसा भी है जो
शहर में गाय – भैंस पालकर अपने परिवार का पालन कर रहें हैं। इन लोगों को बहुत बड़ी
समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिसके लिए अभीतक किसी प्रकार का राहत पैकेज या समाग्री
की घोषणा नहीं किया गया है। शहर में सरकारी दुग्ध उत्पादन के अलावा छोटे-छोटे खटाल
की मौजूदगी भी है जो आसपास के लोगों को दुग्ध देने का काम करते हैं। इन सभी के
परिवार की आर्थिक स्थिति इसी रोजगार पर टिकी है जो फ़िलहाल lock-down से पूरी तरह
प्रभावित होता नजर आ रहा है। इन पशुपालकों के पास अपने गाय-भैंस को खिलाने के लिए
चारा खत्म हो चुका और पशु चारा की दुकाने lock-down की वजह से बन्द हो चुकी है। पुआल
वाला पशु चारा जो आसपास के दूरदराज के गांवों से आया करता था जो आना बन्द हो गया
है, जिससे बिहार की राजधानी पटना जैसे शहर के बहुत ऐसे पशुपालक हैं जो अपने
जानवरों को सिर्फ घास चराकर रखने को मजबूर हो गयें हैं। यदि यह lock-down जो लम्बा
समय तक रहनेवाला है और यह जरुरी भी है आगे समस्या को विकराल रूप हीं देनेवाला है।
कोरोना वायरस के स्वरूप को देखते हुए हम सभी भारतियों को आगे बहुत सारे समस्या
को सामना करना पड़ सकता है, जिसकी तैयारी भारतीय जनता को कर लेने की जरूरत है और
हमारी सरकार को भी इसपर ध्यान देना चाहिए। यदि मानसिक रूप से भारतीय कमज़ोर पड़ गए
तो आगे का lock-down एक नया समस्या का जनक बन सकता है। क्योंकि यह बात तो स्पष्ट हो
चुका है कि यदि कोरोना वायरस के महामारी से बचना है तो lock-down हीं एक मात्र
विकल्प है जिसे हमारी सरकार लागू कर चुकी है अब सिर्फ हम सब भारतीय को पालन करना है
और इसमें भारत सरकार को काफी सफलता भी मिला है देश के चारों ओर से इसके सहमती के
आवाज बुलंद है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं निकला जाना चाहिए कि लोग अपना
घर-बार को उजड़ता हुआ देखकर भी घर में बन्द रह जाएंगें। लोगों का सब्र की बांध कायम
रहे इसके लिए हमारी सरकार को राहत कार्य पर अब युद्ध स्तर पर काम करने का समय आ
गया है इसमें किसी प्रकार की कमी या कंजूसी आजतक कोरोना वायरस में मिली सफलता पर
पानी फ़िर सकता है। इसलिए सतर्क रहें जागरूक रहें और कोरोना को भगाने में जनता
सरकार को तथा सरकार जनता को दिल खोलकर मदद करे। जय हिन्द!

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