कोरोना वायरस से
लड़ने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज़ी ने पूरा देश वासियों को एकसाथ
होने का आवाहन किया था, उस में देश के सारे हिस्सों से लोगों ने औचित्य
जवाब देने का काम किया है, जिसे प्रधानमंत्री को धन्यवाद जरुर कहना चाहिए। बिहार
की राजधानी पटना में भी लोगों ने रविवार शाम को थाली बजाकर, ताली बजाकर, ढोल बजाकर
और कुछ लोगों ने पटाखा फोड़कर प्रधानमंत्री का साथ होने का परिचय दिया। उन लोगों को
साथ होने का परिचय दिया जो इस बीमारी से लड़ रहें हैं और इस बीमारी को खत्म करने के
लिए अपने जान का परबाह किये बगैर मरीजों को सेवा व बीमारी न फैले इसका उपाय में
दिन-रात काम कर रहें हैं।
प्रधानमंत्री के आवाहन पर रविवार के दिन लगभग पटना के अधिकांश लोगों ने हिस्सा लिया जिसमें
अधिकतर घर की महिलाएं दिखीं इनके साथ घर के बच्चे और पुरुष भी एक साथ सूर में सूर
मिलाते नजर आये। हालाँकि बहुत लोग यह स्पष्ट रूप से यह समझने में अन्जान थे कि यह
आयोजन किस लिए किया गया है इसका उद्देश्य क्या है फ़िर भी प्रधानमंत्री के पुकार के
चलते देश का साथ हो लिए। क्योंकि इतना सभी को पता था की कोरोना वायरस से लड़ने के
लिए प्रधानमंत्री का आदेश है जिसे हम सब भारत के नागरिकों को पालन करना है। लोगों
ने पूरा दिन अपने घर में हीं अपने परिवार के साथ रविवार का दिन को बिताया और फ़िर
शाम होने पर घर से बाहर निकलकर देश के उन लोगों को अभिनन्दन किया जो कोरोने को समाप्त
करने के लिए मेहनत कर रहें।
हमे इसे थाली बजाना,
ढोल बजाना के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए बल्कि देशवासियों को एकजूटता के रूप
में लिया जाना चाहिए। हमारे देशवासियों की यह खासियत उभरकर सामने आया है कि देश जब
भी संकट में होगा और देश का नेता मदद करने के लिए लोगों को पुकारेगा उस समय पूरा
देश उसके साथ खड़ा होगा। हम लोग जानते हैं कि मतदान करने के समय लोग अपने चहेते
उम्मीदवार का वोट करते हैं उसमें से एक उम्मीदवार विजयी रहता है बाकी के सारे वोट
असफल उम्मीदवार को जाता है लेकिन लोग जीते हुए उम्मीदवार का अपना नेता मानते
हैं और जीता हुआ नेता सभी जनता को एक समान भाव से देखता है। यहीं वजह रहा कि भारत
के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहे जाने पर पूरा देश एक साथ खड़ा हो गया सब ने
इनका साथ दिया।
हलांकि प्रधानमंत्री
को इस समय कुछ और निर्णय लेने की जरूरत था। लोगों को चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ
बड़े घोषणा की उम्मीद थी, लेकिन नहीं किये जाने पर भी जनता खुश है और प्रधानमंत्री
के साथ है। अभी समय था कि देश के दूर-दराज में स्थित सरकारी अस्पताल पर
प्रधानमंत्री को एक नजर दौड़ाना चाहिए थे जो अस्पताल बद्दतर स्थिति में है या जिस
सरकारी अस्पताल में नये-नये बीमारियों को पहचानने व उसके लेकर उपचार की क्षमता
उपलब्ध नहीं है वहां ऐसे समान मुहैया कराने की घोषणा प्रधानमंत्री से किया जाने की
उम्मीद लोग लगा रहे थे जिसपर लोगों को पानी फिर गया है।
बीमारी से लड़ने और
इस संकट से निकलने के लिए सरकारी उपाय देश के उन क्षेत्रों में नहीं पहुंच सका है
जहाँ पहुंचना चाहिए था, क्योंकि यह वहीं भारत है जहाँ के सरकारी अस्पताल में
ऑक्सिज़न के अभाव में सैंकड़ों गरीब बच्चों ने दम तोड़ दिया था। भारत के लोगों के पास
ऐसे कई जख्म है जिसका डर लोगों को हमेशा सताता रहता है, जिसका समाधान का लोगों को
अपनी सरकार से अभी तक इन्तजार है। देश के इन जनता को कोरोना वायरस जैसे अचानक
आनेवाला महामारी बीमारी से लड़ने के लिए सरकारी अस्पताल में पुख्ता इन्तजाम के लिए
अभी और इंतजार के साथ जीना होगा तब तक जनता को देश के प्रधानमंत्री के साथ हाँ में
हाँ मिलते रहने का समय है। जय हिन्द!

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