अभी तक Corona Virus
के चार स्टेज की पहचान की गई है जिनमें प्रथम और दूसरे स्टेज के क्षेत्रों को
आसानी से नियंत्रण किया जा सकता, तीसरे स्टेज को उस क्षेत्र में पूरी तरह से
लॅाकडाउऩ करके इस पर काबू पाया जा सकता है, लेकिन चौथे चरण को सिर्फ़ भगवान/God/अल्लाह/फ़रिश्ता
हीं बचा सकते हैं। चौथे चरण में प्रवेश होने के बाद भारत जैसे गरीब मुल्क के लिए
बहुत हीं भयावह स्थिति होगा जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है इसलिए हमें इस चरण
में जाने से अपने देश को रोकना है और इसके लिए जरुरी यह है कि अभी अपनी सरकार की
बात मानें और लॅाकडाउऩ का अपने मन से दिल से स्वेच्छा से पालन करें।
अब देखने यह है कि Corona
Virus किस स्टेज में हमें कितना नुकसान पहुंचा सकता है। जैसा कि उपर में आपको
मालूम हो गया होगा कि प्रथम एवं द्वितीय चरण को आसानी से नियंत्रण किया जा सकता है
लेकिन तीसरा स्टेज को नियंत्रण करना बड़ा मुश्किल काम है और चौथे का तत्काल कोई
उपाय हीं नहीं है, इसलिए हम लोगों को यह जानना आवश्यक हो गया हैं कि यह स्टेज क्या
होता है ?
प्रथम स्टेज:- मान लिया जाय कि
मधुकर ज़ी इटली से अपने देश को लौटें तो उनको एयरपोर्ट पर उनसे एक फॉर्म भरवा कर
तथा कुछ होने पर एक contact number देकर जिसपर बाद में सम्पर्क करें और सरकार को
बताएं करके सरकार उन्हें घर जाने को कह दिया। मधुकर ज़ी अपने घर गए और एक कमरा में अपनेआप
को बन्द कर लिए। उनके मम्मी-पापा, पत्नी, बेटा-बेटी, भाई-बहन, दोस्तों तथा अन्य
रिश्तेदार व पड़ोसियों को लाख कहने के बाद भी वह अपनेआप को कमरा में बन्द हीं रखते
हैं। सात दिन बाद उनको सर्दी-बुखार जैसे लक्षण महसूस होता तो मधुकर ज़ी को एयरपोर्ट
पर जो उन्हें सरकार ने contact number दिया था उसपर सम्पर्क करते हैं। सरकार उनसे
सम्पर्क करके corona virus का check करती है तो मधुकर ज़ी corona positive पाए जाते
हैं। फ़िर सरकार उनके सभी घरवालों को corona test करती उनके सभी घरवालें negative
पाए जाते हैं। जिसके बाद सरकार मधुकर ज़ी के पड़ोसियों से पूछताछ करती है कि क्या
आपने पांच दिनों से मधुकर ज़ी को देखा था तो सभी से जवाब नहीं में मिलता है। इस
प्रकार सिर्फ मधुकर ज़ी को corona positive निकलता है और बाकी सभी लोग सुरक्षित बच
जाते हैं जिसका पूरा श्रेय मधुकर ज़ी को जाता इसके लिए उनका परिवार, समाज और सरकार
धन्यवाद देती। बहादुर मधुकर ज़ी को सरकार ईलाज करती है फ़िर वह ठीक हो जाते हैं और
साथ में वह अपने परिवार और समाज को भी corona से बचा लेते हैं। अकेले मधुकर corona
को हरा देते हैं उनके नामों का जयजयकार होता है।
दूसरा स्टेज:- इस स्टेज में यह होता
है कि गिरधारी लाल विदेश से लौटता है और एयरपोर्ट पर सरकारी शपथ पत्र भरने के बाद
वह अपनेआप को एक कमरा में बन्द न करके, सरकार की बात न मानकर तथा सरकारी कानून की
धज्जियां उड़ाते हुए वह इधर-उधर काम करने पर लग जाते हैं। इसके इस रवैये से मोहन भाई
को सर्दी-जुकाम होता है तो वह चेकिंग के लिए सरकारी अस्पताल में जाते हैं जहाँ सरकार
उन्हें corona positive का रिपोर्ट बताती हैं जो विदेश नहीं गये थे। अब सरकार इनसे
पूछ-ताछ करती है कि क्या आप किसी ऐसे आदमी के सम्पर्क में आये थे जो विदेश से हाल
फ़िलहाल में लौटा है। वह अपने दिमाग पर जोर देकर बताता है कि हाँ हम जहाँ काम करते
हैं वहां के मालिक गिरधारी लाल ज़ी हाल हीं
में विदेश से लोटे हैं। सरकार विदेश से लोटे गिरधारी लाल से सम्पर्क करती है और
उसको corona test करती तो वह positive निकलता फ़िर इसके सारे परिवारों को corona
check किया जाता है सभी positive निकलते है। फ़िर सरकार इनसे यह पुछती है कि आप
विदेश से लोटे हैं तब से कितने आदमियों से मिल चुके हैं। इसकी जानकरी लेने और उन
सभी corona check करने के बाद भी एक व्यक्ति बच जाता है जिससे विदेश से लोटा
व्यक्ति सम्पर्क में आया था लेकिन दोनों के दोनों एक दूसरे से अन्जान हैं।
तीसरा स्टेज:- इसमें रामकेवट नारायण ज़ी को सर्दी जुकाम का शिकायत होता है
तो वह अस्पताल में ईलाज के लिए भर्ती होते हैं जहाँ सरकार इन्हें corona test करती
है जिसमें उनका test corona positive का रिपोर्ट पाया जाता है। अब इनसे सरकार
पूछती है कि आप विदेश गए थे या किसी ऐसे आदमी से सम्पर्क में आये थे जो हाल फ़िलहाल
में हीं वह विदेश से लौटा हो। सरकार के इस सवाल पर नारायण ज़ी कुछ भी बताने में
असमर्थ रहते हैं। अब सरकार इनके परिवार वालों को corona test करती है और लोग
positive निकलते हैं। इस स्टेज में corona virus का दायरा यहाँ तक बढ़ जाता है जहाँ
के स्रोत के बारे में पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इसी प्रकार चौथा स्टेज है जो
इससे भी और जटिल हो जाता है जहाँ पता करने के सभी रास्ते बन्द हो जाते हैं सिर्फ़
corona virus से पीड़ित लोगों का बोलबाला होता है।
वर्तमान समय में
भारत corona virus के प्रथम स्टेज को पार कर चुका है इसलिए घरों में रहना बहुत
जरुरी हो गया है। जय हिन्द!

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