भारत के मध्य भाग
में स्थित राज्य मध्यप्रदेश गुपचुप राजनीतिक का शिकार हो चुकी है जिससे यहाँ का
लोकतान्त्रिक सरकार अस्थिर हो गई है। राज्य की सरकार देश के बड़े नेताओं के महत्वकांक्षा
का भेंट चढ़ गया है। सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा बहुत पहले शुरू हो चुकी थी। उस
समय issue यह बना था कि एक महिला विधायक स्वयं को खरीदे जाने के बारे में बता रहीं
थी। महिला विधायक का कहना था कि मुझे कमलनाथ की कांग्रेस सरकार को सत्ता से गिराने
के एवज में करोड़ो रुपया मिल रहा है, लेकिन वह matter वहीं दब कर रह गया। हल्का
शोरगुल हुआ पर चिराग जलाने में असफल रहा जिसका result आज जाकर मिला है। चलो देर
आया पर दुरस्त आया।
आज मध्यप्रदेश की जनता राजनीतिक नेताओं को आये दौरा (attack)
का शिकार हो गई है।कांग्रेस की सरकार
राज्य में अपना सत्ता लगभग खो चुकी है। सुनने में यह भी आ रहा है कि इनके 22
विधायक राज्य छोड़कर कहीं सैरसपाटे पर निकल चुके हैं। मध्यप्रदेश के कमलनाथ की
सरकार को विधानसभा के सत्र शुरू करना था जिसके लिए विधायकों का होना जरुरी है
लेकिन जनता का दुर्भाग्य देखिये, राज्य के आवाम के लिए कुछ करने या निर्णय लेने का
समय आया तो विधायक फरार हो चुके हैं। कांग्रेस के कई विधायक मुख्य मंत्री कमलनाथ के
साथ देने से इनकार कर दिया है तथा इनमें से कुछ विधायक राज्य को छोड़कर भाग खड़े हुए
हैं। सरकार गिराने की राजनीति समझ में आता है ये अपने विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर
रफूचक्कर हो जाना कैसी राजनीतिक का हिस्सा है? जनता ने vote दिया था कि हमारी आवाज
को विधानसभा में उठाये और मेरा समस्या के निराकरण का उपाय निकाले परन्तु जनता के
द्वारे चुने गए विधायक सरकार चलाने के वजाय दूसरे राज्य में जाकर छुप चुके हैं।
सुनने में यह भी आ
रहा है कि अपने विधायक को लापता होने के दावत में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री
कमलनाथ ने भारत सरकार के गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा था। मुख्यमंत्री ने पत्र
लिखकर गृहमंत्री से आग्रह किया था कि मेरे विधायक को रिहाई किया जाय। पत्र में
कथित का हवाला देते हुए कमलनाथ लिखते हैं कि मेर विधायक बंगलूरु एवं दूसरे जगह पर
बंधक बना कर रखे गए हैं, इनमें कांग्रेस के 22 विधायक शामिल हैं उन विधायकों का
रिहाई सुनिश्चित किया जाय ताकि ये विधायक जल्द शुरू होनेवाले विधानसभा सत्र में
शामिल हों!
पत्र लिखने का
उद्देश्य कुछ भी हो सकता है। क्योंकि भारतीय राजनीति भला किसको समझ में आता है
यहाँ की राजनीतिक में कुछ भी निश्चित नहीं होता। लेकिन इस matter में साफ़ प्रतित
हो रहा है कि भारत के गृहमंत्री को लिखा गया पत्र एक बचकाना हरकत है। हलांकि इस
हरकत को राजनीतिक करने का जरिया नहीं माना जाना चाहिए जिससे किसी का नुक्सान हो
जाय। दूसरे शब्दों में कहें तो इसे बच्चों का खेल भी कह सकते हैं, जिसमें अपने जिम्मदारी
से बचने के लिए बच्चों के द्वारा अपने माता-पिता से शिकायत करना शामिल होता है। एक
आम नागरिक की तरह सोचा जाय तो मालूम होगा कि यहाँ कमलनाथ अपने जिम्मेदारी से पिछा
छुड़ाने चाहते हैं लोगों को बताकर कि हमारे विधायक को किसी ने भगा दिया है, अपहरण
कर लिया है। जबकि कमलनाथ ज़ी को सोचना चाहिए कि जनता ने आप पर भरोसा करके vote किया
था जिसको सम्भालने में शायद आप सफल रहे इसका कारण कुछ भी दिया जा सकता है लेकिन जनता
तो ये समझेगी कि हमारा नेता मुख्यमंत्री राज्य को पांच साल चलाने में असफल रहे।
मध्य्रदेश की
राजनीतिक में इससे भी भयानक भूचाल यह आया है कि कांग्रेस के युवा कांग्रेस नेता
ज्योतिरादित्या सिंधिया भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए हैं। सिंधिया
के साथ इनके समर्थक 22 विधायक भी कांग्रेस छोड़ दिया है और दूसरे राज्य में जाकर छूप
गए हैं जिसके लिए कमलनाथ ने गृहमंत्री से गुहार लगाया। सिंधिया कांग्रेस के लिए
अठारह साल से काम कर रहे थे जिस सम्बन्ध को तोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं। अब
इन्हें भाजपा से क्या फायदा होगा आगे का समय बतायेगा फ़िलहाल कांग्रेस और सिंधिया
दोनों के लिए दुःख की बात यह है की अठारह साल पुराने रिश्ता आज टूट गया। इतना पुराना व गहरा संबंध ऐसे टूट जाएगी मध्यप्रदेश की जनता सोचे नहीं होगें पर यह घटना घट चुका
है जिसे अब मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास में सिर्फ याद किया जायेगा।
इस घटना से हम सब
जनता को यह सीख मिलता है कि हमारे नेताओं सत्ता के लालच में कुछ भी कर सकते हैं।
मध्यप्रदेश की राजनीतिक घटना साबित करता है कि जनता कुछ भी सोचे या कुछ भी चाहे,
नेताओं को अपने हीत में जो अच्छा होगा वहीं करेंगें। जनता का निर्णय अब अहमियत
नहीं रखता है, बल्कि अब नेताओं के राजनीतिक फैसले महत्व रखता है। जनता का काम
सिर्फ वोट करना रह गया है। यहीं इनका अधिकार है बस! सरकार चलाना नेताओं का काम है।
और ये लोग अपने मन मुताबिक काम करते हैं जो लोकतंत्र के लिए कितना लाभदायक होगा
आनेवाला समय हीं बतायेगा।

Comments