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राष्ट्रीय त्यौहार (Nation festival) से दो-दो हाथ करता ग्रामीण क्षेत्र ।।

Republic Day (
26 जनवरी) और 15 अगस्त (Independent Day) के दिन सरकारी, गैरसरकारी, प्राइवेट संगठनों तथा भारत के कोने-कोने में झंडा फहराया जाता है। अब तो यह एक त्यौहार का रूप ले लिया है। इस दिन देश बहुत हीं खुबसूरत और मनमोहक लगता है। यह ख़ुशी भारत को बहुत त्याग और बलिदान के बाद मिला है जिसे हम भारतवासियों को हमेशा याद रखना चाहिए। उनसे प्रेरणा लेकर हमें भी देश के लिए आजादी का जश्न मनाने के साथ-साथ कुछ और करना चाहिए, जिससे देश में एकता
और भाईचारा का प्रसार हो।

छोटे-बड़े संस्थानों व संगठनों झंडा फहराकर, राष्ट्रीय गाना बजाकर और जलेबियां बाटकर अपनी देशभक्ति का नारियल फोड़ देते हैं। लेकिन किसान, मजदूर या आम आदमी ऐसा कुछ नहीं किया करते हैं, इन लोग इस दिन न तो झंडा फ़हराते, न राष्ट्रीय गान गाते और न हीं जलेबियां खाते हैं, फ़िर भी देश के इस जश्न में शामिल हो हीं जाते हैं। सर पर पगड़ी बांध कर खेत के आरी पर खड़ा होकर अपने फसलों को निहारते हैं और सीना को चौड़ा करके शरीर को लम्बा करते हैं उसी समय ये अपना देशभक्ती का धर्म निभा देते हैं। गणतंत्रता दिवस की जानकारी आम आदमी को भोर में हीं हो जाता है जब सरकारी स्कूल के बच्चे भोर के तीन बज़े से हीं जोर-जोर से घंटी बजाते हुए स्वंत्रता सेनानियों का नारा लगाने शुरू कर देते हैं। भारत माता की जय, भारत माता की जय ....... की नारा से गांव गूंज उठता है, बाग बगीचे की चिड़ियाँ भी नन्हें-मुन्ने बच्चों के द्वारा छेड़े ताल में ताल मिलाने शुरू कर देती है। बच्चे जोर से दम लगा कर नारा लगाते हैं कि गली-कुची साफ़ करो, घर-दरवाज़ा साफ़ करो, बापू कीर्ति अमर रहे, सुबाष चन्द्र बोस जिंदाबाद, भगतसिंह जिंदाबाद, चाचा नेहरु जिन्दा बाद, इन्कलाब जिंदाबाद! आम आदमी क्या, धरती से आसमान और आसमान से पाताल तक जयजयकार करने लग जाता है। इन नन्हें बच्चों के नारे से पृथ्वी के सभी प्राणी अपने आप को गणतंत्रता दिवस के रंग में रंग लेता है। पंचायत, प्रखंड, थाना, बैंक, प्राथमिक अस्पताल, जिला मुख्यालय, न्यायालय और सरकारी व निजी विद्यालय एवं अन्य सरकारी दफ़्तरों में गणतंत्रता व स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। इस देशपर्व में आम आदमी भी शामिल होने शुरू कर दिए हैं। इन स्थानों आम आदमी का आनाजाना रोजाना होता है इसलिए ये लोग इस दिन यहाँ आने से अपनेआप को रोक नहीं पाते। इनका अधिकार भी बनता है क्योंकि इन संस्थानों का अस्तित्व आम आदमी पर हीं तो टिकी है।

लेकिन लोगों के बीच गांवों-घरों में इस बात की अब खूब चर्चा होने शुरू हो गया है कि पंचायत भवन में मुखिया ज़ी जिस समय अपना पहला चुनाव जीत कर आये थे उस साल आम आदमी को बुलावा भिजवाकर झंडा फ़हराया और लोगों में जलेबियां भी बांटी थी। लेकिन इस साल इनकों भी किसी ने नजरा दिया। लोगों के बीच में इस बात की खूब चर्चा हो रही है कि पिछले साल मुखिया ज़ी जलेबियां बाँटने में बहुत खर्चा किये थे पर इस साल उन्होंने अपने ख़ास आदमियों के साथ हीं झंडा फ़हराया जो इन्हें अगले चुनाव जीतने में मदद कर सकता है। सरकारी दफ़्तर जैसे थाना, प्रखण्ड, न्यायालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आदि स्थानों पर भी जनता की उपस्थिति नहीं रही यदि आम लोगों का ऐसे स्थान पर प्रवेश हो जाता तो शायद थानादार से लोग डरना छोड़ देते, बीडीओ और सीओ से जनता आमने-सामने बात करने लग जाती या अपने योजना के बारे में पूछने बैठ जाती, न्य्यायाधिश के सामने अपने बेगुनाही का सबूत देने लग जाती, अस्पताल को अपनी दवाईयों का लिस्ट थमा देती आदि नजारे होते इसलिए आम आदमी को इससे दूर रखा गया। सरकारी स्कूल का एक छात्रा का कहना है कि गणतंत्रता दिवस के जलेबी वहीं खा सकता है जो सरस्वती पूजा के अवसर पर 150 रूपये देने में सक्षम है। यूं कहें गणतंत्रता दिवस में शामिल होने के लिए विद्द्यार्थी को सरस्वती पूजा फ़ीस देना अनिवार्य कर दिया गया है।

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