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सीएए के विरोध में उठे आवाज दंगा - फसाद के हवाले ।।


भारत में अब यह कहना मुश्किल हो रहा है कि वर्तमान सरकार की संशोधित नागरिक कानून (सीएए) गलत है कि इसके विरोद्ध में खड़े भारत और भारत के बाहर के लोग गलत हैं ! जिस प्रकार से भारत के लोग इसके खिलाफ़ आंदोलन छेड़ दिया है, उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र और छात्राएं आंदोलन में शरीक हो रहें हैं और सीएए को लौटाने के लिए भारत सरकार से अनुरोध कर रहें हैं या इसमें कुछ बदलाव करके फ़िर से लाने की आग्रह कर रहें है। 

भारत के लगभग कोने-कोने से यहीं आवाज आ रही है, इसमें भारत के लोग और विपक्ष के नेता ज़ी भी इस वर्तमान स्वरूप के सीएए को देश के लिए अहितकर व संविधान के प्रतिकूल बता रहें हैं। इस संघर्ष में दो राज्य को दंगाफसाद के आग में जलने के लिए ढकेल दिया गया। 

प्रधानमंत्री के संसदीय गृह राज्य उतर प्रदेश में जब सीएए के विरुद्ध लोगों ने आवाज उठाई तो इस आवाज को दंगा फसाद के हवाले कर दिया। इस प्रकार से आपकी की आवाज कौन सुननेवाला है? आप सब को कूचल दिया जायेगा, आपकी आवाजें यहीं दफ़न हो जाएगी इसलिए तो महात्मा गाँधी का मानना था कि मेरा भारत शांति के खम्भा पर आजाद हो, अहिंसा का बोलबाला हो, यहाँ के जनता को सरकार से शिकायत हो तो जनता अपनी सरकार से शांति से मांग करे।

 अब हम सब को अपने आप से सवाल करना चाहिए कि क्या गाँधी का खम्भा यहीं है कि सीएए कानून के खिलाफ़ उठे आवाज को दंगा फसाद में झोंक दिया जाय! इससे क्या होगा ? प्रशासन आवाज उठानेवालों को पिटेगा, उसपर केस करेगा, उसे जेल भेजेगा और उससे धन भी वसूला जायेगा।

 फ़िर उसके घर की आर्थिक स्थिति बरबाद होगी। उसके बच्चे डर जायेगें और वह बच्चे जब बड़ें होंगें तो सरकार उसपर कितनों अत्याचार करेगी फ़िर भी उसके खिलाफ़ आवाज नहीं उठाएगा क्योंकि वह बचपन में हीं जान चुका है कि इसके परिणाम घर की आर्थिक स्थिति ख़राब कर जाता है। हमारे बच्चे रोड पर आ जएंगें इसलिए वह चुपचाप सहन कर लेगा और अपने बच्चों को भी यहीं सिखा जायेगा। 

यह परिणाम यहीं पर रुकनेवाला नहीं। यह दिनोंदिन अपना दायरा बढ़ाता जायेगा। फ़िर एक दिन ऐसा आएगा कि भारत के लोग अपनी सरकार से सवाल करना पूर्ण रूप से बंद कर देंगें। उनकों यह विश्वास हो जायेगा कि हमारे पूर्वज सरकार के खिलाफ़ आवाज उठाया था, जिसका परिणाम बहुत भयावह हुआ था। क्योंकि सरकार बहुत बलवान होती है, इसके खिलाफ़ खड़ा नहीं हुआ जा सकता। यह बिल्कुल असम्भव काम है। सरकार जो कहती है वह सत्य है और सरकार बहुत बलवान होती है इसके निर्णय को चुपचाप मान लेने में हम सबको भला होगा। ये लोग पूर्ण रूप से एक दिन निष्क्रिय हो जएंगें। 

फ़िर सरकार अपने मनमाने ढंग से निर्णय लेगी और ये लोग चुपचाप अपना रोजीरोटी का इन्तजाम करते रहेंगें। बगैर आवाम की आवाज के सरकार अपना निर्णय लेगी और लोग उसका पालन करेंगें। एक दिन ऐसा भी आएगा कि इस सरकार से ज्यादा ताकतवर अच्छे सोच रखनेवाली दूसरी सरकार आएगी और इस सरकार को लात मारकर सत्ता से बेदखल कर देगी। उस समय यह सरकार चिल्लाएगी बचाओ! बचाओ! कहकर आवाम को आवाज लगाएगी लेकिन जनता इस समय तक बहरी, गूंगी, दिमाग से पैदल और चुपचाप रोजीरोटी के इन्तजाम करनेवाली मशीन की तरह काम करना शुरू कर देगी। 

फ़िर दूसरी सरकार को इस सरकार का बेदखल करना आसान हो जायेगा और इस सरकार का खेल खत्म। जिसके बाद सरकार बनाने के लिए, सरकार से सरकार लड़ते नजर आएगी और जनता अपनी रोजीरोटी के इन्तजाम में संघर्ष करते हुए। जनता कमज़ोर और निर्बल हो जाएगी, इसलिए महात्मा गाँधी सरकार के सामने अहिंसा के साथ अपनी आवाज रखने का सलाह दिए क्योंकि इससे काम देर से होगा परन्तु आपको नुकसान नहीं बल्कि सिर्फ फायदा होगा।    

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