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दिल्ली दंगा के अपराधियों और पीड़ितों के दर्द की दवा का तलाश करती पुलिस ।।


दिल्ली दंगा का जाँच व पीड़ितों के दर्द की दवा तलाश करती पुलिस।
आख़िर दिल्ली दंगा के हवाले कैसे हो गई क्या इसके परिणाम से अनभिज्ञ थे दिल्लीवासी: किसकी नजर लगी कि भारत की राजधानी दिल्ली दंगा फसाद का भेंट चढ़ गया! कितनों के घर जल गए, परिवार उजड़ गया, रोजी-रोटी का जरिया था जिसे फ़िर से शुरू करना पड़ेगा! कितनों के तो दिलो दिमाग में दंगा का दृश्य हीं चलता रहता है। ये मानसिक रूप से बीमार हो गए, बेचारा अच्छे भले इन्सान थे, लेकिन अब बीमार हो चलें हैं।

घर में एक हीं कमानेवाला था जिसे भी दंगा ने निगल लिया: बड़ी मेहनत से एक ठेला लिया था जो दंगा का भेंट चढ़ गया। अब परिवार का खर्चा कैसे चलेगा? घर में एक हीं कमानेवाले थे, उनको भी दंगा ने निगल लिया! अब पत्नी और बच्चें हैं। ये छोटे-छोटे बच्चे तथा अनपढ़ माँ क्या करेगी? इनके लायक काम हीं क्या है? घरों में पोछा मरना, सड़क पर पलोथिन चुनना या भीख मांगना के अलावा। यदि घरों में पोछा करने का काम मिल गया तो ठीक है वरना आगे के दिन बहुत हीं ख़राब से गुजरनेवाले हैं।

दंगाईयों ने लोगों के अन्दर नफ़रतों का बीज भी बोने का काम किया: ऐसे कई कहानियों को दिल्ली दंगा ने जन्म दिया है। किसी के दिलो दिमाग में नफ़रत का बीज भी बोया होगा। इन दर्द भरे हालातों को लेकर दिल्ली अपने शान्ति की ओर कदम बढ़ा दिया है। दिल्ली में पहले से बेहतर हालात होते जा रहें हैं और इस दंगा के जाँच में दिल्ली पुलिस व एसआईटी जोर-शोर से अपना काम कर रही है।जल्द हीं दंगा के पीड़ित लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद तो किया हीं जाना चाहिए।

दिल्ली में दंगा के बाद राजनीतिक गरमाहट तेज होना लाजमी: अब दिल्ली में राजनीतिक की गरमाहट भी तेज हो गई है। नेताओं लोग एक दूसरे से जवाब मांगना भी शुरू कर दिया है और सब अपने आप को निर्दोष साबित करने पर तुला है। कौन नेताजी इसके दोषी हैं इसका निर्णय जाँच अधिकारी और फ़िर न्यायालय के जज साहेब करेंगें? ये अपने कलम से जो लिख देंगें वह पीड़ितों के लिए न्याय होगा। इसपर सही न्याय हो इसके लिए जाँच कर रहे अधिकारियों और जजों की भूमिका हीं रह जाता है। इनके हाथों में हीं दंगा से पीड़ितों का न्याय सौंप दिया गया है जो दंगा के शुरू होने से समाप्त होने तक का जीता जगता मूकदर्शक भी हैं।

दंगा पीड़ितों का न्याय लेकर कौन फ़रिश्ता उनके पास हाजिर होगा: अब पीड़ितों के लिए यह मायने नहीं रहता कि किसने क्या कहा कि दिल्ली में दंगा हो गया? फलाना नेताजी ने ऐसी बात कह दिया, जिससे कुछ लोगों का मन बहक गया और वे लोग अस्त्र-शस्त्र के साथ निर्दोष लोगों पर टूट पड़े तथा उनके सारे अरमानों को रौंद दिया। ऐसा बेरहमी की तरह रौंदा की जैसे उसका हमने हक मार लिया हो, उसके सम्पति का नुकसान किया हो। अब पीड़ितों को तो यह लग रहा होगा कि अल्लहा/ईश्वर/God का कोई बंदा आता जो हमे पहलेवाला जिन्दगी को लौटा देता! सबकुछ पहले जैसा हो जाता। लेकिन काश! यह किसी के हाँथ में नहीं है। सही न्याय भी मिल जायेगा तब भी सम्भव नहीं हैं। अरे! कितनों इस दुनिया से निकल देंगें बगैर जज का न्याय का फरमान सुने हुए, उनके आत्मा को कौन जवाब देगा।

उतरपूर्वी दिल्ली दंगा जाँच को लेकर पुलिसिया कार्रवाई के ग्राफ: दिल्ली दंगा के जाँच कर रहे अधिकारियों ने अपना एक सिपाही खोकर भी पीड़ितों का न्याय मिले इसके लिए दिन-रात काम कर रही है। इस उधेड़बुन काम में अभी तक 718 मामले दर्ज किये जा चुके हैं तथा तकरीबन 150 हथियार को बरामद किया गया है। आर्म्स एक्ट के तहत 55 मामलें दर्ज किये गयें हैं और  60 लोगों को इस एक्ट के तहत गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इतना हीं नहीं दंगा जाँच अधिकारियों के द्वारा करीब 3400 लोगों को गिरफ्तार करके पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।    

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