Main issues in loksbha election 2019. भारत का 2019 के
लोकसभा चुनाव में नेताओं के द्वारा प्रचार-प्रसार में कोई ख़ास मुद्दा सुनने और
देखने को नहीं मिला था। मसलन शिक्षा का अधिकार, रोजगार की गारन्टी, सरकारी महकमा
से बगैर खौप के विकास को लेकर सरकारी सम्पति के बारे में सूचना पाने का अधिकार,
भ्रष्टाचार एवं घोटाला जैसे मुद्दा अब अवशेष में दफ़न हीं रहे। यहीं वजह है कि भारत
में सुरक्षा का मुहिम का प्रचार-प्रसार जोरों पर देखा गया था।
पूर्व समयों के
चुनाव में ये मुद्दे हुआ करते थे:
इससे पूर्व की सरकार
मनमोहन सिंह की सरकार के समय शिक्षा, बेरोजगार, भ्रष्टाचार, जनता के अधिकार, सरकार
के कर्तव्य को निभाने जैसे मुद्दे का बोलबाला होता था।
जिसका परिणाम निकला की देश में कई वर्षों से लटका पड़ा शिक्षा का अधिकार को धरातल पर लागू कर दिया गया। इतना हीं नहीं रोजगार से जुड़े रोजगार गारन्टी जैसे कांसेप्ट को देश में लाया गया। देश में सरकारी बड़े अधिकारी तथा नेताओं द्वारा अपने स्वार्थ के उद्देश्य से सरकारी सम्पति का दोहन व लूट-खसोट (घोटाला व भ्रष्टाचार) के बारे में पूछने के लिए सूचना का अधिकार जैसे बड़ा हथियार जनता को दिया गया।
2019 के लोकसभा चुनाव 'मैं भी चौकीदार' बना मुद्दा:
जिसका परिणाम निकला की देश में कई वर्षों से लटका पड़ा शिक्षा का अधिकार को धरातल पर लागू कर दिया गया। इतना हीं नहीं रोजगार से जुड़े रोजगार गारन्टी जैसे कांसेप्ट को देश में लाया गया। देश में सरकारी बड़े अधिकारी तथा नेताओं द्वारा अपने स्वार्थ के उद्देश्य से सरकारी सम्पति का दोहन व लूट-खसोट (घोटाला व भ्रष्टाचार) के बारे में पूछने के लिए सूचना का अधिकार जैसे बड़ा हथियार जनता को दिया गया।
2019 के लोकसभा चुनाव 'मैं भी चौकीदार' बना मुद्दा:
लेकिन 2019 के
लोकसभा चुनाव में सुरक्षा का मुहिम की तूती बोलते दिखाई दिया, यहीं कारण रहा कि ‘मैं
भी चौकीदार’ जैसे वाक्य खूब पल्लवित हुआ।
यह मुहिम बहुत हीं तीव्र रफ़्तार के साथ देश के नब्ज़ों में दौड़ लगाने शुरू कर दिया। जिससे साफ हो गया कि आम जनता को अपनी सरकार से तार्किक रूप में कुछ नहीं भावनाओं में सब कुछ चाहिए, व्यवहारिक रूप से चुनावी मुद्दे नहीं है लेकिन भावनाओं में ‘मैं भी चौकीदार’ का महल तैयार हो गया था।
सुश्री मायावती ने दिया जवाब:
यह मुहिम बहुत हीं तीव्र रफ़्तार के साथ देश के नब्ज़ों में दौड़ लगाने शुरू कर दिया। जिससे साफ हो गया कि आम जनता को अपनी सरकार से तार्किक रूप में कुछ नहीं भावनाओं में सब कुछ चाहिए, व्यवहारिक रूप से चुनावी मुद्दे नहीं है लेकिन भावनाओं में ‘मैं भी चौकीदार’ का महल तैयार हो गया था।
सुश्री मायावती ने दिया जवाब:
उस समय उत्तर प्रदेश
के भूतपूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जो अनुसूचित जाति और जनजाति का नेतृत्व
करती हैं ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखी थीं कि पीएम श्री मोदी ज्यादतर शिलान्यास आदि
में ही लगातार व्यस्त रहे और प्रचार-प्रसार पर 3044 करोड़ खर्च किया।
इस सरकारी धन से उतर प्रदेश जैसे पिछड़े राज्य के हर गाँव में शिक्षा व अस्पताल की व्यवस्था हो सकती थी लेकिन बीजेपी के लिए प्रचार का ज्यादा महत्व है शिक्षा व जनहित का नहीं।
इस सरकारी धन से उतर प्रदेश जैसे पिछड़े राज्य के हर गाँव में शिक्षा व अस्पताल की व्यवस्था हो सकती थी लेकिन बीजेपी के लिए प्रचार का ज्यादा महत्व है शिक्षा व जनहित का नहीं।
वह अगले ट्विट में
लिखीं थी, बीजेपी व पीएम श्री मोदी अपनी सरकार की नाकामियों व घोर विफलताओं पर से
लोगों का ध्यान बाँटने व गरीबी एवं बेरोजगारी आदि के जनहित के मुद्दे को असली
चुनावी बहस बनने से रोकने के लिये हर प्रकार के गड़े मुर्दे उखाड़ने की कोशिश में
लगे हुए है जो अतिनिन्द्नीय है, जनता सावधान रहे !
'मेक इन इंडिया' का मुद्दा का हाल:
'मेक इन इंडिया' का मुद्दा का हाल:
पीएम नरेंद्र मोदी
जिस प्रकार से ‘मेक इन इंडिया’ की बात देश-विदेश में इसका प्रचार किये थे उस वैसे
तार्किक व्यक्ति को “मैं भी चौकीदार” जैसे वाक्य वाला मुद्दा तार्किक रूप से सही नहीं बैठता है।
इनके “मेक इन इंडिया” के अनुसार देश के प्रत्येक प्रखण्ड में मैट्रिक स्तर का हीं एक ऐसा स्कूल जैसे: इंजीनियरिंग मैट्रिक स्कूल खोलने की बात की जानी चाहिए थी। जिसमें तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाता और इससे मेक इन इंडिया के लिए प्रशिक्षित कामगार मिल जाते।
चुनावी मुद्दे जो भी हो लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी मुद्दा/सोच को भारतीय जनता ने समझा और इन्हें अपना मूल्यवान वोट दिया।
इनके “मेक इन इंडिया” के अनुसार देश के प्रत्येक प्रखण्ड में मैट्रिक स्तर का हीं एक ऐसा स्कूल जैसे: इंजीनियरिंग मैट्रिक स्कूल खोलने की बात की जानी चाहिए थी। जिसमें तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाता और इससे मेक इन इंडिया के लिए प्रशिक्षित कामगार मिल जाते।
चुनावी मुद्दे जो भी हो लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी मुद्दा/सोच को भारतीय जनता ने समझा और इन्हें अपना मूल्यवान वोट दिया।
