रेलवे के रखरखाव और मानव संसाधन को खर्च में मोदी सरकार द्वारा भारी कटौती से बदहाली में गई रेल सुरक्षा- कैग।
रेलवे के रखरखाव और मानव संसाधन को खर्च में मोदी सरकार द्वारा भारी कटौती से बदहाली में गई रेल सुरक्षा- कैग रिपोर्ट।
ओड़िशा के भीषण रेल दुर्घटना ने मोदी सरकार की पोल खोल दी है, इससे साफ हो जाता है कि सुरक्षा पर मौजूदा
सरकार ने काम के नाम पर भारत के लोगों को मुर्ख बनाने का काम किया है। मोदी सरकार
लोगों को नई रेल उद्घाटन का तोहफा देते रही, लेकिन
लोगों के जीवन बचाने पर जो खर्च करने थे, उसमें
मोदी सरकार भारी कटौती व चोरी करती रही।
रेलवे में मानव संसाधन की भारी कमी कर दी गई हैः
मोदी सरकार ने रेलवे में नई बहाली न के बराबर की है। इसमें लोगों को
नौकरी देने से हमेशा मोदी भागते रहे। ऐसे तो किसी क्षेत्र में मोदी जी ने लोगों को
नौकरी देने का काम नहीं किये है। आप रेल मंत्री के ट्वीटर टाइमलाइन पर जाएंगे तो
रेलवे विभाग में 3.12 लाख पद खाली है, मिल
जाएंगे।
रेलवे में लगातार हो रहे दुर्घटनाओं और इसमें बेतहशा बढ़ती संख्या पर
चिंता व्यक्त करते हुए, रेलवे बोर्ड ने हाल ही में खुद माना है कि मानव
संसाधन की भारी कमी के कारण लोको पायलटों पर अधिक समयों तक काम करने के दबाव पड़ने
से ये दुर्घटनाएं में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।
इसके बावजूद नरेंद्र मोदी बहाली नहीं निकाले है। रेलवे में तीन लाख
पद खाली हैं, बड़े अधिकारियों के पद खाली हैं, जिसे पी एम ओ भर्ती करता है वो भी पद अभी तक
खाली पड़े है। ये हालत है रेलवे की। जब आदमी हीं नहीं होगें तो सुरक्षा का काम कैसे
होगा?
रेलवे में रखरखाव पर खर्च में सरकार ने भरी कटौती कर दी हैः
कैग ने अपने रिपोर्ट के जरिए सरकार को बताने का प्रयास किया है कि
रेलवे सुरक्षा बदहाल अवस्था को प्राप्त कर लिया है। कैग ने अपने रिपोर्ट में बताया
है कि पिछले चार सालों में 75 प्रतिशत ट्रेन
एक्सीडेंट्स डिरेलमेंट की वजह से हुई है। रेलवे में यह एक्सीडेंट्स रखरखाव पर
ध्यान न देने की वजह से शुरू होती है, जिसपर
मोदी सरकार ने ध्यान नहीं दिया और इसपर आनेवाले खर्च में हमेशा से कटौती करते रही।
कैग की ताजा आॅडिट रिपोर्ट के अनुसार, 2017-18 और
2020-21 के बीच 10
में से लगभग सात रेल दुर्घटनाएँ ट्रेन डिरेलमेंटअ की वजह से हुई है। वर्ष 2017-21 में पूर्वी क्षेत्र रेलवे में सुरक्षा के लिए
रेल और वेल्ड ट्रैक मेनटेनेंस का शुन्य परीक्षणु हुआ।
कैग के अनुसार राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष में हर साल 20,000 करोड़ रुपए सरकार को उपलब्ध कराने थे, लेकिन सरकार नहीं करा सकी। सरकार इस फंडिंग धनराशि में 79 प्रतिशत राशि की कम कर दी है।
सरकार के इस रवैये से भारतीय रेल का सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से
चरमरा गई है, जिसका परिणाम रेल दुर्घटना के रूप में देखने को
मिल रहा है और उसका भुक्तभोगी भारत के लोग हो रहें हैं।

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