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"जब मैंने जजमेंट सुना तो मुझे बहुत दुख हुआ, मुझे लगा कि मैं यहीं आत्महत्या कर लूँ- निर्भया की माँ।"

 

"जब मैंने जजमेंट सुना तो मुझे बहुत दुख हुआ, मुझे लगा कि मैं यहीं आत्महत्या कर लूँ- निर्भया की माँ।"

उन्नाव रेप कांड: दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को उन्नाव रेप कांड के दोषी और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए उसे जमानत दे दी है। इस फैसले के बाद निर्भया की माँ, आशा देवी और पीड़िता के परिवार ने जो दर्द और रोष व्यक्त किया है, वह वाकई विचलित करने वाला है।
​इस मामले की ताज़ा स्थिति कुछ इस प्रकार है:
​विरोध और भावुक प्रतिक्रियाएँ
​निर्भया की माँ (आशा देवी): उन्होंने इस फैसले पर गहरा दुख और आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि "जब मैंने जजमेंट सुना तो मुझे बहुत दुख हुआ, मुझे लगा कि मैं यहीं आत्महत्या कर लूँ।" उन्होंने इसे एक 'नया नियम' बताया कि दोषी अपनी सजा के खिलाफ अपील के बहाने बाहर आ रहे हैं।
​पीड़िता और उसका परिवार: दिल्ली के इंडिया गेट पर पीड़िता और उसकी माँ ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। पीड़िता की बहन ने यहाँ तक कहा कि "अगर उसे (सेंगर को) रिहा किया गया है, तो हमें जेल में डाल दो ताकि हम कम से कम जिंदा तो रह सकें।" परिवार का कहना है कि वे अब सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
​पीड़िता की चिंता: पीड़िता ने आशंका जताई है कि यूपी में चुनाव आने वाले हैं और राजनीतिक कारणों से सेंगर को बाहर लाया गया है ताकि उसका प्रभाव बना रहे।
​कोर्ट का फैसला और शर्तें
​दिल्ली हाईकोर्ट (जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच) ने कुछ तकनीकी आधारों और जेल में बिताए गए 7 साल के समय को देखते हुए यह फैसला लिया है:
​POCSO Act की व्याख्या: कोर्ट ने एक विवादास्पद टिप्पणी में कहा कि विधायक 'पब्लिक सर्वेंट' (लोक सेवक) की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए उस पर POCSO की धारा 5 (Aggravated Sexual Assault) लागू नहीं होती, जिसमें उम्रकैद का प्रावधान है।
​कड़ी शर्तें: सेंगर को निर्देश दिया गया है कि वह पीड़िता के घर के 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगा, अपना पासपोर्ट जमा रखेगा और हर सोमवार पुलिस स्टेशन में हाजिरी देगा।
​महत्वपूर्ण बात: हालांकि उसे इस मामले में जमानत मिल गई है, लेकिन वह तुरंत जेल से बाहर नहीं आ पाएगा क्योंकि पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में उसे जो 10 साल की सजा मिली है, उसमें अभी उसे राहत नहीं मिली है।
​परिवार अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। त्योहार के समय ऐसी खबरों का आना वाकई मन को उदास कर देता है।



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