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“मणिपुर में हालात भयावह, लाशों को कोई पूछनेवाला या लेजानेवाला नहीं है”— कांग्रेस।

मणिपुर में हालात भयावह, लाशों को कोई पूछनेवाला या लेजानेवाला नहीं है कांग्रेस।

भारत के पूर्वी क्षेत्र स्थित मणिपुर राज्य दंगा-फसाद के आग में जल कर भस्म होते जा रही है और इधर केन्द्र सरकार हाथ-पर-हाथ धरे किस अनहोनी का इन्तजार कर रही है? यह आन्तरिक कलह से जुड़ा बहुत बड़ा और जरूरी सवाल है, जिसका जवाब भारत के लोग को स्वंय तलाश करने होंगे, ऐसा लगने लगा है। इस घटना की शुरूआत के महीनों होनें को हैं, लेकिन अभी तक केन्द्र सरकार इसे नियंत्रण करने में असफल ही रही।


कांग्रेस ट्वीट करके मणिपुर से जुड़े घटना के वर्तमान हालात के बारे में जानकारी पोस्ट की है। कांग्रेस ने इस पोस्ट में लिखा है कि मणिपुर में 54,000 लोग बेघर हो गए हैं। राज्य के सरकारी संपत्ति लगभग 20 पुलिस स्टेशन को जला दिया गया है। दंगाईयों ने लोगों के 2,000 मकानों को आग के हवाले करके इसे जला दिया।


दंगाईयों ने हिंसा के दौरान 6,000 गोलियाँ, 1,000 सेमी आॅटोमेटिक हथियार लूट लिये हैं। पाँच मंदिरों को जला दिया गया है। इतना ही नहीं करिब दो सौ चर्चो को आग के हवाले कर दिया गया है और इसे जला दिया। चर्चो और मंदिरों को जलाने से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि ये उपद्रवियों जनता का नुकसान पहुँचाना चाहते है, संविधान को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं और भारत के लोकतंत्र को समाप्त करके अपना राज्य चलाना चाहते हैं।


कांग्रेस ने ट्वीट में लिखा है कि मणिपुर की राजधानी इम्फाल के अस्पतालों में लगभग 88 लाशे पड़ी हैं, जिनकी मौत दंगाईयों के हाथों हुई है। मणिपुर की राजधानी इम्फाल के मार्चरी हॉस्पिटल में 5 मई से अभी तक 70 लाशें पड़ी हैं, कोई पूछनेवाला तक नहीं है। इम्फाल के चुराचांदपुर हॉस्पिटल में 18 लाशें पड़ी हैं, इसे भी काई पूछनेवाला नहीं है। सोचनेवाली बात ये है कि इन लाशों को कोई पूछनेवाला या लेजानेवाल क्यों नहीं है!


भारत के गृहमंत्री अमित शाह बिहार के भाषण में बोले थे कि आप लोग (बिहार के लोग) बीजेपी को वोट दीजिए और बीजेपी दंगा-फसाद करनेवालों को उल्टा लटकाकर उसे सीधा करने का काम करेगी। मणिपुर में बीजेपी की ही सरकार है। फिर, अमित शाह मणिपुर में दंगा फैलानेवालों को उल्टा लटकाकर सीधा करने का काम क्यों नहीं कर रहें हैं? दंगा शुरू के 20 दिन हो चुके हैं, लेकिन अमित शाह अभी तक मणिपुर में दंगा नियंत्रण करने और पहले जैसे आम हालात लाने में असफल रहे। ऐसा क्यों?   

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