कलंकित फैसला के नींव पर खड़ा हुआ नई संसद भवन का इमारत।
नई संसद भवन का उद्घाटन तो हो गया, लेकिन इसका निर्माण से लेकर उद्घटन तक पर नजर डाली जाय तो इसमें एक
संगिन अपराध दिखई पड़ेगा। पीएम मोदी की एक बड़ी साजिश दिखाई देगी। मोदी ने जो चाल
चले हैं, उसमें एक स्वच्छ संस्कार का संकेत नहीं
दिखता, स्वस्थ्य लोकतंत्र नहीं दिखता और एक
उचित समय पर निर्णय नहीं लिया गया साफ-साफ दिखाई पड़ते हैं।
मोदी के द्वारा भारत के नई संसद भवन की आधारशिला 1 अक्टूबर को रखी गई, जबकि 2 अक्टूबर के दिन भारत के राष्ट्रपिता माहात्मा
गांधी का जन्म दिन आता है। इस दिन को भारत क्या, पूरा विश्व प्रमुखता के साथ याद करता है। लेकिन, पीएम नरेन्द्र मोदी के दिल में गांधी के प्रति
इतना नफरत भरा है कि संसद भवन का आधारशिला गांधी जी के जन्म दिन के एक दिन पूर्व
रखा।
नरेन्द्र मोदी यहीं नहीं रूके हैं। ये भरत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल
बिहारी वाजपेयी जी को भी नहीं बख्शे हैं। मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के प्रति
कितना सम्मान रखते हैं, इस बात का भी खुलास हो जाता है। पूर्व
पीएम अटल बिहार वाजपेयी जी का जन्म दिवस 25
दिसम्बर को आता है, लेकिन मोदी ने संसद भवन का निर्माणकार्य 10 दिसम्बर को शुरू किया।
अब जब संसद भवन का उद्घाटन करने का दिन निर्धारित करने का समय आया तो
28 मई को चुना। इस दिन भारत के आजादी की लड़ाई में
अंग्रेजो को साथ देनेवाला,
अंग्रेजों से माफी माँगनेवाला, आरएसएस का सर्मथक, लोकतंत्र विरोधी और संविधान को न मानकर
हिंदुत्व के विचारों का प्रचार-प्रसार करनेवाला विर सावरकर का जन्मदिन है। एक ऐसे
व्यक्ति के जन्मदिन पर संसद भवन का उद्घाटन किया गया जो भारत विरोधी आदमी है और
माहात्मा गांधी को हत्या करने में शामिल भी था ऐसा संकेत मिला था।
भारत के लोगों कोरोना महामारी के प्रकोप से तबाह हो रहे थे, इन्हे सरकारी मदद की जरूरत थी, उस समय नरेंद्र मोदी लोगों को मदद न करके नई
संसद भवन बनाना बेहतर समझा। इस नीति को किसी भी हाल में जनता विरोधी हीं समझा
जाएगा। जनता को आर्थिक मदद की जरूरत थी, लेकिन
मोदी ने पेट्रोल, डीजल और अन्य वस्तुओं का दाम बढ़ा दिया
और तर्क दिया कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए ऐसा निर्णय लिया गया है।

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