कांग्रेस को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मिला प्रचण्ड बहुमत, मोदी-पावर का हुआ पावर गुल।
कर्नाटक विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत से इस बात को
स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि कर्नाटक के लोगों को काम करनेवाली सरकार की
जरूरत है, जनता कीे समस्या को सुनने व समझने वाली
सरकार की जरूरत है और ऐसी सरकार की जरूरत है, जो
समाज को एकजूट करते हुए राज्य को प्रगति के मार्ग पर ले जाये। ये सारे गुण
कांग्रेस में देखा जा सकता है।
विशेष बात ये है कि ऐसी सरकार से कर्नाटक के लोग परेशान हो चुके हैं, जो चुनावी वादा को जुमला नाम देता हो, जिसमें भाजपा के लोग पीएचडी का डिग्री हासिल
करके कई सालों से बैठे हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी चुनाव के समय जो वादा करती है, वो निभाने के लिए जानी जाने लगी है।
यहीं वजह रहा कि कांग्रेस को कर्नाटक विधान सभा चुनाव में स्पष्ट
बहुमत प्राप्त हुए हैं। कुल 224
विधानसभा सीट में कांग्रेस को 135
सीट प्राप्त हुए हैं। और वहीं भारतीय जनता पार्टी भाजपा को 66 सीट मिले हैं। इस चुनाव परिणाम में कांग्रेस
को 55 सीटें की बढ़त हासिल हुई। जबकि भाजपा
को 38 सीटें का नुकसान हुआ है। वर्ष 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 80 सीटें पर जीत प्राप्त की थी। और भाजपा इस समय 104 सीटें पर जीतकर सत्ता में थी।
वर्ष 2013 से वर्ष 2023 के बीच
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम को देखा जाय तो जिस समय भारत में मोदी फैक्टर
हावी हो रहा था, केन्द्र में भाजपा प्रचण्ड बहुमत हासिल
की ओर बढ़ रही थी, उस समय भी कर्नाटक के लोग कांग्रेस के
करीब हीं थे। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में 122 सीट के साथ सरकार बनाने में सफल रही थी।
वर्ष 2018 में जब मोदी फैक्टर पूरे भारत पर हावी
हो चुका था, भारत में मोदी-मोदी के नारे लगाये जा
रहें थे, उस समय भी कांग्रेस कर्नाटक में 80 सीट लेकर एक मजबूत विपक्ष के रूप में भाजपा व
मोदी फैक्टर के सामने खड़ी थी।
इसे सिद्धारमैया के नेतृत्व का भी लोहा माना जाना चाहिए कि जिस समय
कांग्रेस विकट समयों कि ओर कदम बढ़ा रही थी, उस
समय भी सरकार बनाने और जब भाजपा मोदी के साथ मजबूत स्थिति को प्राप्त कर चुका था, उस समय एक मजबूत विपक्ष के रूप में कांग्रेस
जनता के साथ खड़ी थी।
देखा जाय तो वर्ष 2023 के
चुनाव में कर्नाटक पर मोदी फैक्टर अब मोदी पावर में तब्दिल हो चुका था। भाजपा की
सरकार केन्द्र और राज्य दोनों में थी। जिसके बावजूद कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत
मिलना ये कर्नाटक की जनता के सूझ-बूझ का परिणाम है और कांग्रेस के द्वारा जनता के
लिए और जनता के द्वारा चालाये जानेवाली नीतियों को लेकर तथा इसके साथ चुनाव लड़ना
का भी परिणाम है।

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