भारत प्राचीन समय से
हीं विनम्र स्वभाव के चरित्र से ओत-प्रोत रहा है तथा विभिन्न विचार, समाज, धर्म,
ज्ञान और परिवार को हँसते-हँसते स्वीकार करते आया है। किसी को अस्विकार करने का
इतिहास नहीं रहा है। यहाँ तक कि यह देश आक्रमणकारियों को भी बसाने का काम किया है।
नरम दिल का यह देश अपने मिट्टी की खुशबू से विश्व के सभी नागरिक को आनन्दित किया।
आज के समय में इस विचार को दुनिया के सभी देश अपनाते नजर आ रहे है। इस लिस्ट में
अमेरिका व अन्य देश का नाम गर्व के साथ लिया जा सकता है। यहीं वजह है कि अमेरिका
और ब्रिटेन जैसे देश में भारतीय लोग यहाँ के राजनीति, विज्ञान, सामाजिक, बिज़नेस और
लेखन के क्षेत्र में अपना नाम कमा रहें हैं। फ़िर भारत के राजनीतिक पार्टी इस विचार
से विभेद करते क्यों दिख रहें हैं?
2019 के लोकसभा
चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विरुद्ध देश में निर्मित महागठबंधन पर
भारत के मीडिया, सोशल मीडिया व सत्ताधारी सरकार ने अलग-अलग तरीकों से महागठबंधन को
निचा दिखाने वाला विभिन्न नामों से संबोधित किया जिसे बताना मतलब उनके द्वारा किये
गए गलती को दोहराना होगा जो ओचित्य नहीं लगता। हमारे यहाँ के सोशल मीडिया भी इससे
अछूता नहीं रहा, भारतीय सोशल मीडिया इस मुहिम में बढ़-चढकर हिस्सा लिया जिसे किसी
भी दृष्टिकोण से भारत विचार के अनुकूल नहीं ठहराया जा सकता और न हीं देश के लिए
किसी भी तरीके से हितकारी माना जा सकता है। बीजेपी के समर्थकों ने भी इसपर खूब पोस्ट
के माध्यम से खिल्ली उड़ाते दिखे। भारतीय मीडिया इस गठबंधन का कार्टून के जरिये
खिल्ली उड़ाने का मुहिम चलाया।
मीडिया मंच पर चल
रहे बहस में कुछ लोग तो भारत में एक पार्टी की सरकार की बात कर दिए। जबकि हमारा
संविधान ऐसा नहीं कहता है। यदि हमारे देश के लोकतांत्रिक सरकार के शासन के कार्यों
को देखा जाय तो मिलीजुली सरकार ने भी जनता के हितकारी निर्णय लेने में स्पष्ट
बहुमत वाली सरकार से कम बेहतर साबित नहीं हुआ। इसी मुद्दे पर बिहार के युवा नेता
तेजश्वी यादव जब 2019 के लोकसभा चुनाव का प्रचार-प्रसार कर रहे थे तब उन्होंने अपने
भाषण में पश्चिम बंगाल के मंच से अपने भाषण में ऐसे लोगों को मुहतोड़ जवाब देने का
काम किया था।
तेजश्वी यादव ने
बंगाल में जनता को संबोधन करते हुए कहा कि बीजेपी, बीजेपी माइंडसेट मीडिया और
समर्थक कहते हैं कि महागठबंधन कैसे, ये तो अलग-अलग राह पर चलनेवाले हैं, अलग-अलग
बोलते हैं और कभी एक साथ भी नहीं बैठते ऐसे में देश कैसे चलेगा ? ऐसे लोगों लो जवाब देते हुए यादव कहते हैं कि इस
महागठबंधन में अलग-अलग पार्टियां के लोग हैं, विभिन्न दलों के लोग हैं और विभिन्न
विचारों के लोग हैं। हमारा देश में भी अनेको विचार और धर्म के लोग रहते हैं। इस
देश की पहचान अनेकता में एकता है और यहीं हमारी देश की खूबसूरती है। यहाँ अलग-अलग राज्य
है, अलग-अलग भाषाएँ है, दिखने में अलग-अलग हैं, बोलने में अलग-अलग हैं फ़िर भी हमसब
एक हैं पूरा देश एक है और हमारा महागठबंधन अनेकता में एकता का गठबंधन है।
हालांकि 2019 के
लोकसभा चुनाव में महागठबंधन जनता को अपनी ओर आकर्षित करने में असफल रहा और चुनाव
हार गई। वहीं भारतीय जनता पार्टी स्पष्ट बहुमत से लोकसभा में विजयी रही। अब सवाल
यह खड़ा होता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव किस आधार पे लड़ा गया तथा किस आधार पर
बीजेपी जनता को अपनी ओर आकर्षित करने का काम किया, जिससे चुनाव जीत गई। चुनावी
प्रचार-प्रसार माहौल को देखकर अन्दाजा लगाया जा सकता है। इस लोकसभा चुनाव में
सत्ताधारी बीजेपी के खिलाफ़ निर्मित महागठबंधन पार्टी को जिस प्रकार से तिरस्कार
किया गया जिस प्रकार से उसके खिलाफ़ भाषा तथा संस्कृति का प्रचार-प्रसार में सहारा
लिया गया उसी आधार पर लोगों ने बीजेपी को मतदान किया होगा। यदि इस बात में सच्चाई
नहीं भी हो और जनता दूसरे आधार मानकर बीजेपी को मतदान किया और सत्ता में लौटने का
निर्णय लिया। लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारतीय मीडिया, भारतीय
सोशल मीडिया तथा भारतीय जनता पार्टी एवं इनके समर्थकों के द्वारा चुनावी
प्रचार-प्रसार में जिन भाषाओँ का इस्तेमाल किया गया उसे किसी भी दृष्टिकोण से भारत
के अनुकूल नहीं माना जा सकता। यह बिल्कुल हीं गलत रजनीतिक संस्कार का नींव रखा गया
है जो आगे चलकर देश की राजीनति भाषा को और गन्दी होनें के संकेत देता है।
