कांग्रेस युवा नेता सचिन पायलट ने राजस्थान के 'भारत जोङो यात्रा' के मंच से कहा कि मैं नहीं समझता कि आजाद भारत में 'भारत जोङो यात्रा' जैसा कोई दूसरा उदाहरण होगा। हमारे देश में आज जो वातावरण बना है, जो आपस में टकराव की स्थिति पैदा हुई है, उसको समाप्त करने के लिए इस प्रकार के यात्रा निकालने की जरूरत थी।
भारत जोङो यात्रा में बच्चे, बूढ़े, महिला, युवा, किसान, मजदूर इत्यादि सभी वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं।भारी संख्या में लोग इस यात्रा से जुङ रहे हैं। नफरत, आक्रोश, आपसी टकराव आदि जैसे समाजिक समस्याओं को समाप्त करने के लिए कांग्रेस के द्वारा शुरुआत की गई भारत जोङो यात्रा आन्दोलन देश के वर्तमान हालात को देखते हुए बहुत आवश्यक था।
हम सभी लोग देख रहे हैं, बच्चे, बूढ़े, किसान, श्रमिक, बेरोजगार युवा एवं महिला आदि लोग यात्रा से जुङ रहे हैं और साथ कदम-से-कदम मिलाकर चल रहे हैं। यात्रा के दौरान ये लोग राहुल गाँधी से मिलते हैं और अपनी समस्या को बताते है। राहुल गाँधी सभी लोगों से मिलते हैं और उन सभी के बात को ध्यान से सुनते हैं। इनके हरएक बात एवं समस्या को ध्यान से सुना जाता है और फिर उसपर गहन विचार-वमर्श कर उसके निराकरण के उपाय ढूंढने का प्रयास किया जाता है।
राहुल गाँधी सब लोग की बात सुन रहे है, जबकि शासन में जनता की बात सुननेवालों की कमी है। शासन के कोई भी जनता की बात सुनने को तैयार नहीं है। हमारा देश का शासन देश के लोगों की बात सुनने को तैयार नहीं है। हमारे देश के लोग किस दर्द से गुजर रहे हैं, जानने की अभिरुचि शासन में नहीं है। आम नागरिकों के दर्द व स्थिति को जानने के लिए शासन तैयार नहीं रहती। इस मामले में शासन बहरी हो गई है। शासन कान में तेल डालकर बहरी हो गई है।
हमारे देश के आम नागरिक जिस दर्द से सफर कर रहे हैं, उसके बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हमारे नेता राहुल गाँधी पैदल यात्रा कर रहे हैं। वह लगभग 90-से-95 दिनों से लगातार पैदल चलते आ रहे हैं और साथ में देश के नागरिकों का दर्द, हालात आदि को सुनते व समझते आ रहे हैं। मैं नहीं समझता आजाद भारत में इस प्रकार का कोई दूसरा उदाहरण होगा।

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