लोकतंत्र तीर्थयात्री राहुल गाँधी अपने 'भारत जोङो यात्रा' टीम को लेकर राजस्थान के सङकों पर पैदल चल रहें हैं, पूस माह के कठोर ठंडक में भी यात्रा को अहले सुबह शुरु कर देते हैं और ढलते सूर्य में भाषण समारोह की शुरुआत करते हैं। दिन में लोग के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलते हैं, तो रात्री में विचार-से-विचार मिलाकर देश के समस्या पर चर्चा करते हैं। इस दरम्यान राहुल गाँधी ने कहा, "नफ़रत के बाज़ार में, मोहब्बत की दूकान खोल रहा हूँ।"
राहुल गाँधी आगे कहते हैं कि हम यात्रा के दौरान बीजेपी के दफ़्तर के सामने से गुजरते हैं, तब बीजेपी के लोग छत पर खङे होकर संकेत देते हैं, ईशारे करते हैं। वे लोग ईशारे-ईशारे में हमे बहुत कुछ कह जाते हैं और मैं उनके ईशारे को समझ जाता हूँ। वे ईशारे में हमसे पूछते हैं कि सङक पर क्यों चल रहे हो? इनके इस सवाल से एक बार मैं भी सोचा, सङक पर क्यों चल रहा हूँ! लोगों से क्यों मिल रहा हूं! लोगों के समस्या को क्यों सुन रहा हूँ!... आदि।
उन्होंने कहा, "बीजेपी के जो लोग सोचते हैं कि राहुल भारत के सङको पर पैदल क्यों चल रहा है! बीजेपी के उन लोगों जो हमें कह रहें हैं कि मैं पैदल क्यों चल रहा हूँ, उनसे कहना चाहता हूं कि मैं नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दूकान खोल रहा हूँ।" मैं तो कहता हूँ कि बीजेपी के लोगों को भी हमारी तरह नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दूकान खोल देना चाहिए। सच में! नफ़रत से आज तक किसी को कुछ भी हासिल नहीं हुआ है और यदि किसी को कुछ मिला है तो मोहब्बत से हीं मिला है।
वह कहते हैं " मैं पहला आदमी नहीं हूँ, जो नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दूकान खोल रहा हूँ। महात्मा गाँधी भी नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दूकान खोले थे। भीमराव अम्बेडकर, पंडित जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल भी नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दूकान खोले थे। मौलाना अब्दुल कलाम आजाद भी हमारे देश में नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दूकान खोले थे।" राहुल गाँधी सच कह रहें हैं, नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दूकान खोलनेवालों की हमारे देश में बहुत बङी लिस्ट है। श्रीकृष्ण, बुद्ध, सम्राट अशोक आदि ऐसे हीं नाम हैं, जिसने नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दूकान खोल चुके हैं।

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