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चुनाव का परिणाम चार दिन में, जबकि रेलवे ग्रुप डी का चार साल में भी नहीं- समाजिक कार्यकर्त्ता हंसराज मीना।।



समाजिक कार्यकर्ता हंसराज मीना भारत सरकार के फैसलों व कार्यनीतियों पर सवाल खङा करते हुए कहते है कि हमारे देश  में चुनाव का परिणाम चार दिन में घोषित कर दिए जाते हैं, लेकिन रेलवे ग्रुप डी के परीक्षा के चार साल बीत चुके हैं, पर रेलवे परीक्षार्थियों को अभीतक इसके परिणाम का इन्तजार ही करना पङ रहा है। इन्होंने इस बात को ट्वीटर पर पोस्ट के माध्यम से सरकार व देश के सामने रखने का प्रयास किया है।

समाजिक कार्यकर्ता के इस तर्क पर हमारी केन्द्र सरकार को विचार आखिर क्यों नहीं करनी चाहिए? हमारी केन्द्र सरकार को इसपर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आखिरकार देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है। देश के युवा रोजगार के लिए कबतक भटकते रहेंगे भला ! गौर करनेवाली बात यह है कि सवाल उस सरकार पर खङा हो रहा है, जिसने प्रत्येक वर्ष दो करोङ युवाओ को रोजगार उपलब्ध कराने का वायदा किया था, लेकिन अफसोस के साथ लिखना पङ रहा है कि रोजगार के नाम वर्तमान केन्द्र सरकार ने जनता को सिर्फ मुर्ख बनाया है। 

इतना ही नहीं हमारे भारत सरकार के तर्क से दिमाग तब चकरा जाएगा जब भारत के प्रधानमंत्री के द्वारा दिए गए बयान को समझेगें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनसभा को संबोधित करते हुए, ठेला पर चाय और पकौङा बेचने को भी रोजगार साबित कर दिए। प्रधानमंत्री के हिसाब से ठेला पर चाय और पकौङे बेचना रोजगार हो सकता है, लेकिन इसके लिए उच्च शिक्षा प्राप्त कर ने की जरूरत नहीं! एक साधारण योग्य व्यक्ति इस काम को कर सकता है। ऐसे काम को रोजगार की श्रेणी में शामिल करना युवाओ व शिक्षा व्यवस्था के साथ बेईमानी होगी।

समाजिक कार्यकर्ता हंसराज मीना आगे लिखते है कि रेलवे ग्रुप डी परीक्षा के भर्ती नोटिफिकेशन साल 2019 में निकाली गई, जिसमें कुल पद की संख्या 1,03,739 थी। इस के लिए 1.26 करोङ लोग ने आवेदन किए। लोगों ने एक फाॅर्म भरने के लिए 500 रूपए रेलवे विभाग को दिए। इस हिसाब से भारत के लोग का करीब 500 करोङ रूपए यूं ही खर्च हो गए और उपर से इन्तजार का मानसिक तनाव अलग से झेलनी पङी। इतना ही नहीं रेलवे ने पिछले चार साल से ग्रुप डी, स्टेशन मास्टर इत्यादि का भर्ती के नोटिफिकेशन नहीं निकली है। भारत सरकार और युवाओं दोनों के लिए सोचने व निर्णायक फैसला लेने का समय है।

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