बिहार के छपरा में जहरीले शराब पीने से कई शराब सेवन करनेवालों की मौत हो चुकी है। इस घटना से राज्य की राजनीति एक बार फिर पूस का माह के कङाके की ठंडक में गरमा गई है। विपक्ष नेतागण इसको बङा अवसर समझ बैठे है, इसलिए लोहा गर्म है, हथौङा मार दो की नीति पर काम करना शुरु कर दिए और जनता के फिक्र न करके सरकार बनाने के फिराक में लग गए हैं। वहीं, सत्तापक्ष के मुखिया नीतीश कुमार शराबबंदी पर अपना विचार साफ कर दिए हैं।
छपरा में जहरीले शराब के सेवन करने से कई लोगों की मौत हो गई है, इस घटना में मरनेवालों की संख्या इतनी है कि राज्य में चिन्ता का विषय बन गया है। विपक्ष ने संसद भवन के पास हंगामा किया और साथ में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस्तीफ देने की मांग कर दिए। मतलब, विपक्ष सत्ता परिवर्तन के फिराक में अपना हाथ-पैर चलाना शुरु कर दिया है। आपको मालूम होना चाहिए कि बिहार में शराबबंदी कानून बहुत पहले से लागू है। लालू-नीतीश की सरकार ने लागू की थी, जिसे इस कानून को विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों मिलकर समर्थन किए थे। ये भी मालूम हो, जहरीले शराब पीने से लोगों की मौत होना बिहार में कोई नई घटना नहीं है, इतना ही नहीं अन्य राज्य पंजाब, हरियाणा, गुजरात आदि से बिहार में शराब सेवन करने से कम मौत होती हैं, ये भी एक कङवा सच है।
इसके बावजूद विपक्ष के लोग सरकार को ऐसे घेराव कर रहे हैं, जैसे शराबबंदी कानून आज लागू हुई हो और जहरीले शराब का वितरण सरकार ने ही की हो। यूं कहें, छपरा में शराब पीने से लोग की मौत नहीं हुई, बल्कि राशन खाने से मौत हुई हो। जबकि बिहार में शराबबंदी है, तो लोगों को शराब सेवन करने के अधिकार किसने दिए! ये सवाल विपक्ष के हंगामा के आगे दम तोङ दिया, आख़िर क्यों!
सरकार लोगों को शराब पीने से मना कर रही है, इसके बावजूद भी बिहार के लोग शराब धङल्ले से सेवन कर रहे हैं और मारे भी जा रहे हैं। ऐसे हीं घटना छपरा की है, जिसको लेकर विपक्ष राज्य में हंगामा कर रही है और सरकार गिराने के फिराक में लगी है। यह बिहार के सीधे-सादे लोग के साथ धोखा देकर सत्ता हासिल करना नहीं तो क्या है?
वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी का कहना है " शराब के धंधा में फंसे लोग, यदि इस काम को छोड़कर दूसरा काम की शुरुआत करते हैं, उन्हे सरकार की ओर से रोजगार शुरु करने को मदद के रूप में एक लाख रुपए दिया जाएगा और यदि जरूरत महसूस हुआ, तो राशि में इजाफ़ भी किया जाएगा। आज बिहार के गरीब लोग अपने बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं और एक खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं, इसका मुख्य वजह शराबबंदी ही है।"

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