भारत के वित्त मंत्री सीतारमन संसद भवन में अपने विपक्षी संसद सदस्यों पर चिङचिङा गई। उन्होंने चिङचिङाते हुए लोगों को भला-बुरा भी कह दिए। हालांकि अपशब्द जैसे कोई बात नहीं कही, लेकिन अफसोस व्यक्त करनेवाली बात अवश्य है। इनके भाषण सुनने से ये साफ-साफ कहा जा सकता है कि वह विपक्ष में बैठे संसद के सदस्यों को सरकार के कार्य व फैसलों में सिर्फ हामी भरने को कह रही हैं।
मतलब, विपक्ष संसद के सदस्य सरकार के खिलाफ आवाज न उठाए, सरकार के समर्थन में बोले और सरकार के नीतियों को समर्थन करे। जबकि एक लोकतांत्रिक देश में सरकार के फैसलों का आलोचना होना हीं खुबसूरती है। और लोकतंत्र के खुबसूरती से वित्त मंत्री नाराज हो गई। चिड़चिड़ापन के साथ मंत्री महोदया संसद भवन को सर पर उठा लीं और विपक्षी संसद के सदस्यों को भला-बुर सुना दीं। ऐसी नाराज़गी लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है। यह लोकतंत्र के लिए अशुभ के संकेत है, हमारे संसद के सभी सदस्यों को इसपर विचार करना चाहिए।
वित्त मंत्री सीतारमन ने संसद भवन में गुस्सा करते हुए बोलीं, " हमारी देेश के अर्थव्यवस्था अच्छा चल रही है और तेज गति से बढ़नेवाली अर्थव्यवस्था है। फिर भी, उसके उपर जलन से बात करनेवाले लोग संसद में मौजूद है। यह बहुत दुःख की बात है। जब देश आगे बढ़ रहा है, उसपर लोग को गर्व करना चाहिए न की मज़ाक उङाना चाहिए। ये मज़ाक उङाने की बात नहीं है। डालर पूरे विश्व में मजबूत हो रही है, सिर्फ भारत का अर्थव्यवस्था उसके खिलाफ खङा हो रही है। इसको आनंद लेना चाहिए, लेकिन ये लोग इसका मज़ाक उङा रहे है।"
जबकि सरकार के और सरकार के मंत्रियों के खिलाफ बोलना विपक्ष के नेताओं का अधिकार है, इस अधिकार के प्रयोग को वित्त मंत्री मज़ाक उङाना बता रहे हैं। मंत्री के इस व्यवहार को लोकतंत्र के अधिकार को हनन करना कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। आख़िर भारत किस क्षेत्र में विकास कर रहा है? भारत के बेरोजगारी दर में वृद्धि हुई है। महंगाई दर में वृद्धि हुई है। लोग के आमदानी में गिरावट आई है।आख़िर वित्त मंत्री का भारत किस क्षेत्र में विकास कर रहा, जनता को बताना चाहिए।

Comments