कहानी लोकतंत्र सिपाही राहुल गाँधी की, जिन्होंने लोकतंत्र के लिए एक
तानाशाह सरकार से पंगा लिया।
विपक्ष दिनोंदिन कमजोर होता जा रहा है और मोदी सरकार तानाशाह़। कैसे भाई! तो सुनो।
कहने को तो मोदी सरकार दावा ये कर रही है कि भारत में लोकतंत्र है और
एक मजबूत लोकतंत्र है, यहाँ सबकुछ ठीक चल रहा है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। मोदी सरकार का दावा
मौखिक हीं है, ज़मीनी स्तर पर यह दावा खोखला साबित
होता है। भारत का लोकतंत्र मरने के कागार पर पहुँच चुका है और इसे एक बचानेवाला
चाहिए। ऐसा कोई चाहिए, जो भारत के साथ-साथ, यहाँ का लोकतंत्र को भी मरने से बचा ले।
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी यहीं प्रयास कर रहे थे, लेकिन इन्हे एक स्टे लिया हुआ मुकदमा में सजा
करा दिया गया और फिर लोकसभा की सदस्यता भी छीन ली गई। अब वह लोकसभा नहीं जाते है
और न हीं मोदी सरकार से सवाल पूछते हैं। राहुल गाँधी कोर्ट का चक्कर काट रहें है।
इनकी पार्टी कांग्रेस भी अपने-आप को बचाने में लगी है। बहुत सारे नेता जो मोदी
सरकार से सवाल करना शुरू किये थे, वो
अब चुप्पी साध लिये हैं। कौन कोर्ट का चक्कर काटे!
देखा जाय! तो लोकतंत्र खत्म होने का सबसे बड़ा सबूत राहुल गाँधी ही हैं।
इनके जो हालात हैं वहीं हू-ब-हू भारत के लोकतंत्र का हालत हो गई है। इन्होंने
लोकसभा में गौतम अडानी मामला पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने की साहस
किए थे। उसके बाद इनपर कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई और फिर इनके साथ जो हुआ वो एक
स्वस्थ लोकतंत्र में नहीं हो सकता। गाँधी विपक्ष के नेता थे, वह मोदी सरकार से सवाल पूछ सकते हैं। लेकिन, मोदी सरकार ने सवाल पूछनेवाला नेता को
सवाल पूछने को ही गाली सिद्ध कर दिया, मान-हानि
बता दिया और फिर कोर्ट से सजा भी करा दी।
राहुल गाँधी पर सूरत के एक कोर्ट में मान-हानि का मुकदमा चल रहा है
और कोर्ट ने हीं इन्हे दो साल की सजा सुनाई और फिर लोक सभा की सदस्यता रद्द कर दी।
मामला कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट के फैसला पर ज्यादा लिखना और टिप्पणी करना
मतलब कोर्ट के निर्णय को चुनौती देना होगा, जो
बिल्कुल हीं गलत होगा। कोर्ट को जो काम मिला है, वो ईमानदारी के साथ काम कर रही है। इसपर कोई सवाल खड़ा क्यों करे भला!
कोर्ट का काम ही है, मुकदमा
का निर्णय देना। सामनेवाला क्या है, इससे
कोर्ट के निर्णय पर असर नहीं पड़ना चाहिए। और कोर्ट अपना काम करने में ईमानदार है।
इसपर सवाल खड़े नहीं किये जा सकते। लेकिन, राहुल गाँधी के साथ जो हुआ है और जो हो
रहा है, वो लोकतंत्र के लिए बहुत ही ख़राब दिन
को दर्शाता है। एक विपक्ष पार्टी के आवाज को दबा देना, कूचल देना और उसके ऊपर मुकदमा करना और फिर उस
मुकदमा में अधिकतम सजा देना, ताकि
सदस्यता खत्म हो जाय ये बाते कुछ ठीक नहीं लगती है।
राहुल गाँधी के द्वारा मोदी सरकार से सवाल पूछने से लेकर उनकी
सदस्यता जाने और विपक्ष का आवाज बंद करने तक पर तो देश में चर्चा होनी ही चाहिए।
यदि लोकतंत्र को बचाना है और भारत में न्यायालय को बचाना है, संविधान को बचाना है और भारत को एक स्वस्थ
लोकतंत्रयुक्त देश बनाये रखना है, तो भारत
में राहुल गाँधी चर्चा के केन्द्र हों। क्योंकि, वह एक विपक्ष नेता की तरह काम कर
रहे थे। इनके बयान पर, जो मान-हानि का मुकदमा चला है और इसमें
जो इन्हे सजा मिली है, वो बयान राहुल गाँधी ने ‘हम भारत के
लोग’ की रक्षा हो के उद्देश्य से दिए है, अपने
स्वार्थ में नहीं दिये हैं। यदि ऐसी घटना पर चुप्पी साध लिया जाता है, मतलब ‘हम भारत के लोग’ खत्म और भारत से विपक्ष भी
खत्म। और विपक्ष या सरकार से सवाल करनेवाले के बगैर का देश होना, गुलामी के समान
होना हुआ।
चर्चा जारी है, बनें रहें। ......................

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