कर्नाटक में विधान सभा चुनाव का बिगुल बजें हीं हैं कि बीजेपी के
कारनामें को लेकर कांग्रेस जनता के सामने खड़ी है और शिकायत को लेकर चुनाव आयोग के
पास पहुँच चुकी है।
कर्नाटक में विधान सभा का चुनाव होने हैं और इधर भारतीय जनता पार्टी
अपनी चुनावी पैतरा चलना शरू कर दी है। मामा शकुनी की तरह पाशा फेंकने की तैयारी
में जुट चुकी है। इधर-उधर के काम करने शुरू कर दी है, ताकि चुनाव जीतने में किसी प्रकार की भूल न हो, इसलिए चुनाव से ठीक बिलकुल पहले टेंडर पास कर
दी, ताकि लोग खुश रहें।
कर्नाटक में विधान सभा चुनाव के बिगुल बजें हीं हैं कि बीजेपी के
कारनामें को लेकर कांग्रेस जनता के सामने खड़ी है। और इस शिकायत को लेकर चुनाव आयोग
के पास पहुँच चुकी है। इससे चुनाव में आमजनता पर और चुनाव आयेग पर कितना असर पड़ेगा
देखनेवाली बात होगी।
इस मुद्दा को उठाने से भारतीय जनता पार्टी बीजेपी को और कांग्रेस को
इस चुनाव में कितना नुकसान तथा कितना फायदा होगा, ये भी देखनेवाली बात होगी। लेकिन, बीजेपी
का यह तरीका वाकई में चालाकी भरा और चुनाव आयोग, कांग्रेस और जनता को बेवकुफ समझनेवाला हीं प्रतित होता है।
कांग्रेस ने खुलासा किया है कि कर्नाटक में चुनाव की घोषणा से बिलकुल
कुछ दिन पूर्व हीं राज्य में कई टेंडर की घोषणा कर दी और इसे स्वीकार भी कर लिया
गया है। ये टेंडर सीधे चुनाव को प्रभावित करेंगे। इससे बीजेपी को फायदा होगा।
हालाँकि, घोषित टेंडर चुनाव अधिनियम के दायरे से बाहर है।
कांग्रेस का कहना है कि इसके बावजुद चुनाव से सटे टेंडर की घोषणा
करने के मतलब क्या होंते हैं?
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, “हमने इस बात को लेकर चुनाव आयोग के पास शिकायत लेकर गए, जहाँ हमलोगों को आयोग से उम्मीद मिली है। आयोग
ने इसपर उचीत कार्रवाई करने को कहा है। ऐसा समय आयेगा कि टेंडर को रोका जाय, तो उस स्थिति में टेंडर को रोका जाएगा।”

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