बीजेपी को सरकार बनाते रहेंगें तो ठीक वरना भगवाधारियों अपना काम
करते रहेंगे।
बिहारशरीफ स्थित ‘मदरसा अज़ीज़ी’ के पुस्तकालय को जला दिया गया है।
इसके सभी किताबें धू-धू कर जल गईं। और इसके जलानेवाले किताबों का जलता देख खुश
होता रहा। किताना हृदय विदारक तस्वीर रहा होगा, जब
ज्ञान का ख़जाना किताबें जल रहें होंगे। कोई भी इस तस्वीर को देखकर जल रहे किताबों
को बूझाना चाहेगे, लेकिन रामनवमी पर जूलूस निकालनेवाले
भगवाधारी रामभक्तों ने किताबों को जलने के लिए छोड़ दिया।
किताब जलते रहें और भगवाधारी लोग जश्न में मग्न होता रहा। ऐसे हीं एक
घटना नालन्दा में घट चुकी है। प्रचीन समयों के नालंदा विश्वविद्यालय को किसी
उपद्रवी ने आग के हवाले कर दिया था। इस विश्वविद्यालय के किताब तो कई महीनों तक
धू-धू कर जलते रहे थे, ऐसा भारत के इतिहास के किताबों में
लिखा है। अब, जब हमलोग किताबों को सहेजना, अपने इतिहास को सम्भालना जान गए हैं फिर भी एक
बच्चों को पढ़ाने को समर्पित मदरसा’ को आग के हवाले कर दिये।
रामभक्त भगवाधारी लोग, जिस मदरसा अज़ीज़ी को जला कर राख कर दिया, उस मदरसा को बीबी सोगरा ने अपने पति के याद में बनावाईं थीं। बीबी सोगरा अपने पति अब्दुल अज़िज़ के याद में बिहारशरीफ में ‘मदरसा अज़ीज़ी’ बनवाईं थीं। यह मदरसा बच्चों को शिक्षा देना का काम कई सालों से करता आ रहा था। आज यह मदरसा रामभक्त उपद्रवियों के हाथों जलकर राख हो गया। बिहार शरीफ में ‘सोगरा’ नाम का एक काॅलेज भी है, जिसमें नालंदा के कोई भी छात्र शिक्षा ग्रहण कर सकता है और कर रहें हैं।
मदरसा के गार्ड ने बताया कि करीब सैंकड़ो भगवाधारी लोग, जो रामनवमी के अवसर पर जुलूस के साथ चल रहे थे, इन लोगों मदरसा में घूस गए और पहले तोड़-फोड़
किया, फिर आग लगा दिया। जिसके बाद मदरसा
धू-धू कर जलने लगा। मदरसा के पुस्तकालय में इन लोगों ने आग लगा दिया। जलते किताबों
और जलते पुस्तकालय को कोई भी बुझानेवाला नहीं था। पूरी रात में पुस्तकालय जलकर राख
हो गई।
सौ साल पुराना मदरसा और इसके पुस्तकालय जलकर खंडहर में तब्दील हो गया
और इसके साथ कई पुराने दुर्लभ किताब भी जलकर राख हो गईं। अब सिर्फ काला–धूसर अवशेष
को देखा जा सकता है। इसे पेन्ट करके या मरम्मत करके नया बनाया जा सकता है, लेकिन दुर्लभ किताबें, उसके साथ जुड़े लोगों के यादें, पहले जैसा उसके पास का माहौल अदि को कौन लौटा
सकता है भला! सबसे बड़ी बात जब बच्चे पढ़़ने आएंगे तब उनके अन्दर डर को तो समय ही
निकाल पायेगा।
‘मदरसा
अज़िज़ी’ का जलना को लोग अपने-अपने तरीके से विश्लेषण कर रहें हैं, लेकिन आम लोग के अन्दर डर और शर्म को साफ देखा
जा सकता है। मुसलिम समुदाय में डर है, तो वहीं हिन्दू समुदाय के लोग शर्मिंदा हैं।
एक चीज जिसे राजनीति कहते हैं वो इस मामले में सबसे ज्यादा बेशर्म हो
गया। बिहार में भगवाधारियों द्वारा रामनवमी के दिन मसजिदों पर आक्रमण का सिलसिला
उस समय हीं शुरू हो गया था,
जब बिहार में बीजेपी का शासन था। इस
बार बीजेपी सत्ता से बाहर है, जिसका
परिणाम ये हुआ कि मुसलमानों की संपति में आग लगा दिया गया। यदि बिहार के लोग
बीजेपी को सरकार बनाते रहेंगें तो ठीक, वरना इन भगवाधारियों अपना काम करते रहेंगे।
फिलहाल यहीं लगता है!

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