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मानहानी मुकदमा में दो साल की सजा होने पर राहुल गांधी ने कोर्ट में जज को क्या जवाब दिए!

मानहानी मुकदमा में दो साल की सजा होने पर राहुल गांधी ने कोर्ट में जज को क्या जवाब दिए!

भारत के लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठानेवला, लोकतंत्र का दमनकारी नेता नरेंद्र मोदी के विरोध में खड़ा होनेवाला और इसके बारे मे जनता को बतानेवाला नेता राहुल गांधी का नाम वर्तमान भारत में सबसे पहले आता है। इन्हें मानहानी मुकदमा में दो साल की सजा करा दिया गया है। इससे इनकी सदस्यता चली गई। अब राहुल गांधी मोदी सरकार के विरोध में नहीं बोलेंगे।

 

राहुल गांधी के भाषण से मोदी सरकार की नींव उखड़ने लगे हैं। गांधी ने मोदी सरकार के भ्रष्टाचार के सभी घोटाला का पोल खोल दिए हैं। इससे सरकार घबरा गई और राहुल को सजा कराना ही बेहतर समझी। अब, लोकतंत्र विरोधी शासन चैन से भारत पर शासन कर सकता है। विपक्ष मुक्त भारत, कमजोर व मोदी सरकार के सभी फैसलों में हाथ जोड़कर खड़े रहनेवाला विपक्ष का भारत बनता दिखने लगा है।

 

मोदी सरकार की भ्रष्ट नीतियों के खिलाफ बोलने वाला राहुल गांधी को मानहानी मामला में सजा करा दी गई है। जबकि यह मामला वर्ष 2019 में याचिकाकर्ता द्वारा स्टे ले लिया गया था। राहुल ने मोदी को  गौतम अडानी घोटाला में घसीटना शुरू किये थे, उसके बाद मोदी सरकार ने स्टे लिया मुकदमा को चालू कराया और फिर सजा करवा दिया, ताकि अडानी घोटाला पर कोई सवाल नहीं उठाये।

 

जब मोदी सरकार ने नया जज नियुक्त करके स्टे लिया मुकदमा को चालु किया तो जज ने राहुल गांधी को न्यायालय में हाज़िर होने का आदेश दिया। यह मामला गुजरात कके सुरत कोर्ट में चल रहा था, इसलिए राहुल गांधी सुरत के कोर्ट में उपस्थित हुए। बहस शुरू हुई। दोनों तरफ के वकिल अपना तर्क दिये।

 

न्यायालय में बहस के समय जज ने राहुल गांधी से सवाल पुछा, जिसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा, “हम जनता के प्रतिनिधि हैं और जनता के लिए बोलना मेरा कर्तव्य और अधिकार है। उस जनसभा में मैंने वहीं बोला जो एक विपक्षी नेता को बोलना चाहिए।

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